निराला का निराला दान Nirala Ki Rochak Kahani

अच्छी बातो, जानकारियों के लिए Facebook पर AchhiAdvice.Com Page Like के लिए Click करे !



अंतराष्ट्रीय योग दिवस / International Yoga Day पर जरुर पढ़े

अंतराष्ट्रीय योग दिवस International Yoga Day in Hindi

योग पर 20 अनमोल विचार Yoga Day Quotes in Hindi


दोस्तों निराला जी का नाम महान भारतीय हिंदी कवियों में गिना जाता है इनका जन्म पश्चिम बंगाल में 1896 सन में हुआ था इनका पूरा नाम सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला (Surykant Tripathi Nirala ) था ये मन से बहुत ही दयालु थे

तो दोस्तों आईये जानते है इनके Life के एक अद्भुत घटना की जो हम सभी को प्रभावित करती है

निराला का निराला दान 

Nirala Ki Kahani

एक बार की बात है निराला जी को अपनी लिखी हुई Books के बदले बारह सौ रूपये मिले तो वे बड़े खुश होकर बहुत ही ठाट से एक रिक्शे में बैठकर घर को चल दिए तो रास्ते में उन्होंने देखा की एक बूढी औरत तपती दोपहर की गर्मी में पेड़ की छाया में भीख मांग रही थी वह बहुत ही फटे पुराने कपड़े पहने हाथ फैलायी हुई थी उसकी दशा बहुत ही ख़राब था जिसे देखकर निराला जी ने तुरंत रिक्शा रुकवाया

और रिक्शे से तुरंत उतरकर उस बूढी औरत के पास पहुच गये निराला जी पास आता देखकर बूढी औरत अपने दोनों हाथ फैलाकर निराला जी भीख मागने लगी

और निराला जी जब उस बूढी औरत के पास पहुचे तो तुंरत बोले की क्या आज आपको कुछ नही मिला क्या , तो बूढी औरत ने कहा की बेटा आज सुबह से ही कुछ नही मिला

तो निराला जी ने कहा की आप ने मुझे बेटा कहा तो आप मेरी माँ हुई और ये kaise हो सकता है की निराला की माँ सडक पर बैठकर भीख मांग रही है ऐसी बात सुनकर उस बूढी औरत की आखो में पानी भर आया

फिर निराला जी ने एक रूपये बूढी औरत के हाथ पर रखते हुए बोले मै आपका बेटा और आप मेरी माँ अब बताईए कितने दिन तक आप भीख नही मागोगी तो बूढी औरत ने कहा की दो तीन तक नहीं मागूगी बेटा फिर नीराला जी दस रूपये दिए और पूछा की अब कितने दिन तक नही मागोगी तो बूढी औरत ने कहा बीस पच्चीस दिन फिर निराला जी ने पूछा यदि सौ रूपये दू तो बूढी औरत बोली चार पाच महीने बेटा,

धुप बहुत तेज होने के कारण निराला जी पसीने से भीग गये थे निराला जी हाथो में नोटों का बंडल देखकर बूढी औरत ने अपने आचल फैला दिए निराला जी हर बार पूछते रहे और paise आचल में डालते रहे और बार पूछते अब कितने दिन नही मागोगी, इस तरह एक माँ मागती रही और बेटा देता गया और उधर निराला जी की जेब खाली होती गयी

ये सब देखकर रिक्शे वाला हक्का बक्का देखता रहा और उधर बूढी औरत इतने सारे paise अपने आचल में देखकर पागल सी हो गयी और बोली अब कभी नही मागुगी अब कभी भी भीख नही मागना पड़ेगा और इतना कहने के बाद निराला जी अपने सारे Paise उस बूढी औरत के आचल में डाल दिए और सारे Paise देने के बाद निराला जी सीधे महान कवियत्री महादेवी वर्मा के घर पहुच गये

और पहुचते ही महादेवी वर्मा से निराला जी बोले आप रिक्शे का किराया दे दीजिये तो महादेवी वर्मा जी ने आश्चर्य से पूछा जो बारह सौ रूपये मिले वो कहा गये

निराला जी ने कहा की रूपये तो मिल गये थे लेकिन वे रूपये माँ को दे दिए थे रिक्शे वाला चुपचाप दोनों की baate सुन रहा था और फिर उसे चुप न रहा गया और सारी बात महादेवी वर्मा जी को बता दी, ये सब baate सुनकर महादेवी वर्मा जी आखो में पानी भर आया और उन्होंने रिक्शे वाले को शुक्रिया अदा कर उसके Paise देके विदा कर दिया

loading...

तो दोस्तों देखा आप ने किस प्रकार जो इन्सान महान होते है उनका दिल बड़ा और बहुत ही कोमल होता है उनको किसी की भी दुःख नही देखि जाती है उनके तो सिर्फ दुसरो की khushi में अपनी khushi दिखती है और जो व्यक्ति महान होते है वे दुसरो की Help के लिए अपनी सारी खुशिया भी त्याग देते है


ऐसे व्यक्तियों को अपने पराये में कोई फर्क नही होता है उन्हें तो पराये भी अपने लगते है और महान व्यक्ति किसी से भी मानवता का रिश्ता जोड़ लेते है जो की आम इन्सान को ऐसा नही कर पाते है

तो यदि हमे अपनी khushi के बदले यदि दुसरो को थोडा सा भी khushi दे तो निश्चित ही हमे उस khushi के बदले दोगुना आनंद प्राप्त होता है और जिन इन्सान में ये सब गुण होता है वे निश्चित ही अपने इन कर्मो की वजह से महान हो जाते है

तो क्या दोस्तों हम भी लोगो की बड़ी न सही यदि छोटे छोटे Help कर दिया करे तो निश्चित ही हम एक Achhe Insan तो बन ही सकते है

साथ में और भी Hindi Kahaniya पढ़े- 

तो आप सभी को ये Achhi Hindi Kahani कैसा लगा Please Comment बॉक्स में जरुर बताये

Thanks और धन्यवाद दोस्तों


loading...

4 thoughts on “निराला का निराला दान Nirala Ki Rochak Kahani

  1. मानवता एवं दयालुता की ऐसी प्रतिमूर्ति को अर्द्ध विक्षिप्तावस्था में भूख से मरना पड़ा,…..हमें क्षोभ है निराला

  2. वाह !! बड़ी अच्छी कहानी पढ़ने मिली. ये सच्ची कहानियाँ हमारी धरोहर हैं.

    • Yes रेखा जी जब हम कभी ही हतोत्साहित होते है तो यही कहानिया हमे आगे बढ़ने को प्रेरित करती है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *