ईमानदारी का फल स्टोरी इन हिंदी Imandari Ka Phal Story in Hindi

0

Imandari Ki Kahani In Hindi | imandari ka phal story in hindi | hindi story

ईमानदारी और मेहनत का फल | ईमानदारी का महत्व एक हिंदी कहानी 

अमन आज पहली बार शहर पंहुचा था, क्यूकी उसकी पढाई ख़त्म हो चूका था और पूरे परिवार की जिम्मेदारी उसके सर पर आ चूका था, और उसके पिता जी जो की एक गाव में रहते थे, उन्हें अपने खेतो और घर के काम से कभी फुर्सत ही नही मिला जो कभी शहर आते, अब तो अमन  के ऊपर ही घर की सारी जिम्मेदारीया थी, जो अपने इसी aim को पूरा करने के लिए नौकरी के तलाश में पहली बार घर, गाव छोड़ कर पहली बार शहर आया था,

अमन जैसे ही स्टेशन से उतर कर स्टेशन के बाहर निकला , तब उसको बड़ी बड़ी इमराते देख के उसेक सपनों को भी पंख लगने लगे थे, शायद उसे काम की तलाश थी, और उसे किसी व्यक्ति की भी तलाश थी जो उसके सपने की पूरा कर सके, उसको कही से भी कोई अच्छा सा काम मिल जाये, यही सब सोचते हुए अमन किसी पान वाले की दुकान के पास खड़ा हुआ था,

अचानक उस पान की दुकान के पास के बड़ी सी लम्बी कार आकर रुकी और उसमे से एक एक बहुत ही धनी व्यक्ति निकला और पान के दुकान पर कुछ सामान लेने लगा, और जैसे ही उस व्यक्ति ने अपने जेब से पैसे निकलने के जेब में हाथ डाला था की पैसे निकलते समय उनके जेब से पर्स जमीन पर गिर गया, लेकिन उस सेठ व्यक्ति को इस बात का तनिक भी ध्यान न था ,

लेकिन इसी बीच पास खड़े अमन का ध्यान उस गिरे हुए पर्स के पड़ा और तो अमन ने बिना समय गवाए उस पर्स के पास पंहुचा, और जैसे ही पर्स को उठाकर सेठ जी को पर्स देना चाहा था , की इतने में उस सेठ व्यक्ति का गाडी चल पड़ा था, लेकिन अमन बहुत तेजी से गाडी की तरफ दौड़ा था की की गाडी अब तो बहुत दूर जा चुकी थी,

अब समन को समझ नहीं आ रहा था की क्या करे की वो पर्स वापस उस व्यक्ति को कर दे, इतने में उसे ध्यान आया की क्यू न पाने वाले दुकान को पर्स दे दिया जाय

इतना सोचकर वह पान वाले के पास पर्स देने को पंहुचा और सारी बात बताई, लेकिन पान वाले ये कहकर पर्स लेने से मन कर दिया की यहाँ तो हजारो लोग ऐसे आते रहते है, तो वह किन किन पर ध्यान रखेगा, इसलिए पान वाले ने अमन को ये कहकर समझाया की यह उसे अपना इनाम समझकर रख लेना चाहिए, और इतने बड़े शहर में किसके पास समय है जो लोगो का मदद करते फिरे, इतना कहकर पान वाले ने वो पर्स लेने से मना कर दिया,

लेकिन अमन जो की उसे ईमानदारी अपने माता-पिता से भरपूर मिली हुई थी, उसका दिल इस पर्स और पर्स में रखे पैसे लेने से साफ़ मना कर रहा था, अब तो अमन पूरा मन बना चूका था की वह पर्स जरुर उस व्यक्ति को लौटा देंगा, ऐसा सोचकर अमन ने पर्स के अंदर चेक किया तो उसमे ढेर सारे पैसे, कुछ जरुरी कागजात और id proof थे

अब तो अमन को id proof में दिए हुए address से उसकी आखो में चमक आ गया था उसे उस व्यक्ति से मिलने का address proof भी मिल गया था , अब तो अमन बिन समय गवाए हुए उस सेठ व्यक्ति से मिलने के लिए ऑटो लिया, और दिए पते के सहारे वह उस व्यक्ति के घर पहुच चूका था, लेकिन उस व्यक्ति का घर देखकर ओ एकबार उसे अहसास हुआ की इतने बड़े घर के आगे इन पर्स में रखे चंद रुपयों का क्या महत्व. लेकिन फिर भी अमन अपने निश्चय पर दृढ था, वह किसी तरह उस पर्स को सेठ को लौटाना चाह रहा था , यही सोच कर अमन जैसे ही घर में जाना चाहा तो security ने उसे रोक लिया, और किससे मिलना है तो अमन ने उस व्यक्ति का id कार्ड दिखा दिया, तो सिक्योरिटी ने अपने सेठ के फोटो को तु्रन्त पहचान लिया और कुछ समय प्रतीक्षा करने को कहा,

फिर अमन प्रतीक्षा करने लगा तो करीब एक घंटे के बाद वह सेठ आये तो सिक्योरिटी ने सारा मामला बता दिया तो सेठ तुरंत अमन से मिले, तो अमन ने बड़ी खुशी के साथ सेठजी का पर्स वापस कर दिया, तो सेठ जी अपने पर्स को वापस पाकर बहुत ही खुश हुए और अमन की ईमानदारी से भी बहुत प्रभावित थे,

तो सेठ जी बिना समय गवाए पर्स से कुछ पैसे निकाले और अमन को देने लगे, तो अमन ने इन पैसो को लेने से साफ़ इंकार कर दिया, और अमन ने सेठ जी से बोला की अगर मुझे इन पैसो की जरुरत होती तो मैं वही ये पैसे ले लेता जहा से ये पर्स गिरा था, लेकिन मुझे बिना मेहनत के किसी का पैसा लेना का कोई अधिकार नही है, तो सेठजी ने बोला ये तुह्मारी ईमानदारी का इनाम है तो अमन ने एक बार फिर से इन पैसो को लेने से इंकार कर दिया, और बोला सेठजी अगर मुझे कुछ देना है तो काम दीजिये, मै आपका जीवनभर अहसान मंद रहूँगा,

इतना बात सुनकर सेठजी जी अमन से बहुत ही खुश हुए, और अमन की ईमानदारी और मेहनत के प्रति झुकाव को देखकर सेठ जी ने उसे अपने factory में clerk के post पर रख लिया , अमन ने बहुत ईमानदारी और मेहनत के बल पर सारे काम को सीख लिया और इस तरह अमन की ईमानदारी से प्रभावित होकर सेठ जी ने उसे अपने सेक्रेटरी के पद पर रख लिया था , इस तरह अमन अपने ईमानदारी के बल पर अपने सपनो को साकार कर लिया .

तो देखा दोस्तों ऐसे तो हमारे जीवन में हजार मौके आते है जब खुद को दुसरो के सामने proof करने के लिए .

लेकिन हम सभी कुछ चंद पैसो की खातिर अपना इमान खो देते है जो की एक अच्छे समय के बाद वो पैसा भी खत्म हो जाता है लेकिन यदि हम उस सही समय पर सही निर्णय ले तो हमे अपने जवन की खुशियों को पाने में भी सफल होते है, इसलिए हमे अपने जीवन में मिले  किसी भी अवसर को खोना नही चाहिए. और हो सके तो अपने आप के मेहनत और अपनी ईमानदारी पर पूर्ण रूप से विस्वास रखना चाहिए चाहे हम कितने ही कष्ट में क्यू न हो, क्यू की एक बार अगर हम बिन मेहनत का खुसिया को पा  लेते है तो फिर हमे ऐसे ही बिन मेहनत के सबकुछ पा लेने की इच्छा हो जाती है जो की इस दुनिया में मिलना सम्भव है ,

जैसे की कहा भी गया गया है – मेहनत और ईमानदारी का फल हमेसा मीठा होता है.

इसलिए हम चाहे कितनी भी विसम परिस्थतियो में क्यू न हो अपने ईमानदारी और पर कभी भी भरोसा नही छोडना चाहिए,

तो आप सभी को ये कहानी कैसी लगी comment box  में जरुर बताये. और इस कहानी को शेयर भी जरूर करे.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here