जल प्रदूषण निबंध हिंदी में Water Pollution Essay in Hindi

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Water Pollution Essay Nibandh – इस धरती पर जीवन का मुख्य स्रोत्र जल है, लेकिन इस धरती पर बढ़ता जल प्रदुषण एक गम्भीर समस्या बनती जा रही है, जल प्रदूषण से सिर्फ इन्सान ही नही बल्कि इन्सान के साथ साथ जीव जन्तु, पेड़ पौधे, वनस्पतिया यहाँ तक की सारा वातावरण भी इसके खतरे में आ गया है,

तो चलिए इस जल प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए इस पोस्टहम  में जल प्रदूषण निबन्ध, Water Pollution Essay Nibandh बताने जा रहे है, जिसे आप अपनी कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 के विद्यार्थी हो तो, अपने विद्यालय में लिख सकते है, तो चलिए इस जल प्रदूषण पर निबंध को जानते है.

जल प्रदूषण पर हिंदी निबंध

Jal Pradhushan Nibandh Water Pollution Essay in Hindi

Jal Pradhushan Nibandh Water Pollution Essay in Hindiजल ही जीवन का आधार है, ऐसे में यदि लोग जल को प्रदूषित करते है, तो अपने जीवन को ही खतरे में डालते है, फिर यदि ऐसे में भी लोग जल प्रदूषण के रोकने के लिए प्रयास नही करते है, तो आने वाले समय में जल प्रदूषण की यह समस्या भयंकर और विकराल रूप ले सकती है, फिर जिसे पार पाना मुश्किल होगा.

हम इंसानों की ज्यो ज्यो पाने की इच्छा बढ़ती जा रही है, त्यों त्यों हम सभी प्रकृति का दोहन बहुत ही भयंकर तरीके से कर रहे है, जिस कारण से धरती के प्रकृति में असामनता फैलती जा रही है, जिस कारण में जल प्रदूषण भी एक प्रमुख कारण है, जिसके जरिये लोग खुद को गंदे जल के सेवन से जिन्दगी खतरे में डाल रहे है.

जल प्रदूषण का आशय उन तत्वों है, जो की रासायनिक रूप में होते है, लेकिन विकृति तरीके से ये खतरनाक रासायनिक तत्व जल में मिलने से ये जल प्रदूषित होते जा रहे है, जिस जल प्रदूषण के पश्चात् लोग इन्ही रासायनिक घुलित गंदे पानी पिने को मजबूर है.

तो इस जल प्रदूषण के लिए इन्सान खुद जिम्मेदार है, क्युकी सबसे ज्यादा इन्सान जल का उपयोग करता है, और यदि ऐसे में यदि जल प्रदूषित रहेगा, तो लोग इन्ही गंदे पानी पिने को मजबूर है, तो दूसरी तरह इन्सान अपने जीवन को सुगम बनाने के लिए अनेक नये नये आविष्कार कर रहा है,

फिर इंसानों के भोग विलासिता की आवश्यकता दिन प्रतिदिन बढती जा रही है, ऐसे में इंसानों को अत्यधिक संसाधनो की जरूरते पड़ रही है, जिसके लिए अनेक प्रकार के कल कारखाने लगाये जा रहे है, जिसमे काफी मात्रा में जल की आपूर्ति भी होती है, और फिर इन जल के उपयोग में जो जल बचता है, उनमे काफी अधिक मात्रा में रासायनिक तत्व घुल जाते है, जो की काफी जहरीला भी हो जाता है,

फिर इन गंदे विषैले जल को नालो के जरिये प्रवाहित किया जाता है, जो की ये प्रदूषित जल नदी, तालाबो में मिल जाते है, जिस कारण से नदी के साफ जल को ये जल प्रदूषित कर देते है, जिससे नदियों में बसने वाले जीव जन्तुओ का जीवन खतरे में पड़ता जा रहा है.

दरअसल कारखानों से निकलने वाले अपशिष्ट प्रदार्थ और दूषित जल ही जल प्रदुषण के लिए काफी हद तक जिम्मेदार है, और इसके अलावा फैक्ट्रीयो, घरो, कल कारखानों से निकलने वाले कूड़े कचरे भी खुले रूप से जल में छोड़ दिया जाता है, जो की ये कचरे नदियों तालाबो के जल में मिलने के कारण जल प्रदूषण का कारण बनते है.

जल प्रदुषण नियंत्रण के उपाय –

यदि इन्सान समय रहते नही चेतता है, तो एक दिन ऐसा भी आयेगा जब इस धरती पर पिने योग्य जल नही रह जायेगा, ऐसे में यदि जल प्रदूषण को रोका नही गया तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है, सो जल प्रदूषण को रोकने के लिए कारखानों से निकलने वाले कूड़े कचरों, प्रदूषित जल को नदियों तालाबो में मिलने से रोकना चाहिए, जिसके लिए इन कचरों को फेकने के लिए समुचित व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे की ये अपशिष्ट प्रदार्थ नदियों के जल में नही मिलने पाए,

इसके अतिरिक्त हमे इन अपशिष्ट प्रदार्थ के Recycle के जरिये इनका दुसरे कार्यो जैसे खाद आदि में उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए, जिससे इनका फिर से उपयोग किया जा सकता है.

इसके अतिरिक्त जहाजो से निकलने वाले तेल, विषैले परमाणु जल परिक्षण पर भी रोक लगाना चाहिए, क्योकि ये सभी जल प्रदूषण को बढ़ावा देते है, तथा इन विषैले जल प्रदूषण से अनेक जीव जन्तु बेमौत मारे जाते है, जिसके कारण पारिस्थितिक तन्त्र में असंतुलन का खतरा भी बढ़ता जा रहा है,

उपसंहार –

जल प्रदूषण होना एक बहुत गम्भीर समस्या है, जिसका सीधा असर मानव जीवन पर दिखाई पड़ता है, ऐसे में हर सभी को जल प्रदूषण के खतरे को देखते हुए भविष्य में जल को लेकर आपस में ही लोग लड़ने नही लगे, अभी से जल प्रदूषण को रोकने के लिए सभी को मिलजुल कर कार्य करना होगा, तभी जल प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सकता है, और हम आने वाले अपने भविष्य के लोगो को साफ और स्वच्छ जल मुहैया करा सकते है.

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