मेरी माँ पर निबंध हिंदी में My Mother Essay in Hindi

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My Mother Essay – इस दुनिया का अस्तित्व तभी तक है, जबतक माँ है, माँ ही श्रृष्टि की जननी है, बिन माँ के सारा संसार सुना है, तो चलिए निबन्ध के इस पोस्ट में मेरी माँ पर निबंध हिंदी में बताने जा रहे है, जिसे आप अपनी क्लास में भी लिख सकते है, चाहे वे किसी भी क्लास 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 और 12 के छात्र हो, तो चलिए मेरी माँ पर हिन्दी निबन्ध, My Mother Essay, Meri Maa Nibandh नीचे दे रहे है, जिसे आप भी इसे शेयर कर सकते है.

मेरी माँ पर हिंदी निबंध | माता पर निबन्ध

My Mother Essay in Hindi Maa Nibandh for Class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12

जब कोई बच्चा बड़ा होकर बोलना शुरू करता है तो उसका पहला शब्द होता है “माँ” यानी एक शिशु के लिए माँ ही सबकुछ होती है, और जैसा की कहा भी गया है की बिन माँ सब सुन, यानि बिना माँ के घर एकदम सुना सुना लगता है. हर किसी के जीवन में माँ का खास महत्व होता है, आज जो भी बड़े होकर बनते है, उसमे कही न कही माँ की छाप जरुर होती है,

My Mother Essayममता और प्यार का दूसरा नाम ही माँ है, पूरी दुनिया में एक माँ ही होती है, जो अपने बच्चो से निस्वार्थ प्यार करती है, पूरी दुनिया तो हमे जन्म लेने के बाद जानती है, लेकिन एक माँ ही होती है, जो हमे कोख से ही जानना शुरू कर देती है, यानि एक इन्सान के जीवन की शुरुआत उसकी माँ के आशीर्वाद से ही होता है.

जब हम पैदा होते है, बड़े होकर चलना शुरू करते है, फिर बोलना शुरू करते है, खाना पीना शुरू करते है या फिर पढ़ाई लिखाई के लिए आगे बढ़ते है, हर स्थिति में माँ से इन चीजो की शुरुआत होती है, चाहे हमे चलना सीखना हो, माँ ही चलाना सिखाती है, बोलना सीखना हो, तो ममा ममा बोलकर बोलना सिखाती है, चाहे हमे भूख लगती है तो पहले अपना दूध पिलाती है, जब दांत अ जाते है, तो अपने हाथो से प्यार से हमे खाना खिलाती है, और फिर पढ़ने के लिए सबसे पहले हमारी पहली शिक्षिका माँ ही बनती है, जो हमे अक्षर, मात्रा का ज्ञान सिखाती है.

यानी माँ ही ऐसी होती है, जो अपने दुखो को भूलकर अपने बच्चो की परवरिश करती है, भले ही माँ भूखी सो जाए लेकिन कभी भी कोई माँ अपने बच्चो भूखे नही सोने देती है. और रात में जब नीद नही आती है, तो हमारी माँ लोरिया सुनाकर सुलाती है, और बच्चो को परियो, राजाओ, राजकुमारों की कहानिया भी सुनाकर रोमाचित करती है.

माँ अपने बच्चो को देखकर हमेसा खुश होती है, अगर बच्चो को थोडा सा भी दुःख होता है, तो माँ विचलित हो जाती है, और अपने सारे गमो को भूलकर अपने बच्चो के दुःख दूर करने में लग जाती है. इस तरह हर किसी की ऐसी प्यारी माँ होती है.

उपसंहार –

माँ शब्द सुनकर ही हमारा मन प्रफुल्लित हो जाता है, ऐसे में जिस प्रकार हमारी माँ हमारी देखभाल और परवरिश करती है, ठीक वैसे ही हमे भी अपने माँ बाप की सेवा करनी चाहिए, तभी हम एक अच्छे संतान होने का फर्ज निभा सकते है.

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2 COMMENTS

  1. आपके द्वारा लिखे हुए सभी पोस्ट बहुत ही काम के और हेल्पफुल होते है और आपके लेख को पढ़कर समझना भी बहुत आसान होता है. में अक्सर आपके ब्लॉग को पढ़ती हूँ और आपके द्वारा लिखा हुआ पोस्ट मेरी समझ में आसानी से आता है

  2. सच में माँ जैसा दुनिया में कोई नही, माँ मेरी माँ या दुनिया की सारी माँ को मेरा सहृदय से नमन है, मेरी तरफ से दुनिया की हर एक माँ को मेरा प्रणाम.

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