रुपयों का पौधा Best Moral Hindi Story

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Moral Hindi Story on Savings

बचत करने की सीख देती एक Hindi Kahani

बचपन वो दौर होता है जैसा हम दुसरे से देखते है ठीक वैसा ही करने की सोचते है यदि हमारी बचपन में इस उड़ान को सही दिशा दिया जाय तो निश्चित ही यही आदत जीवन में आगे चलकर सफलता के मार्ग पर ले जाती है इसी कारण से हमारे परिवारों में बडो का बच्चो के प्रति बहुत ही बड़ा महत्व है जो बच्चो की भविष्य निखारने में मदद करते है

तो चलिए आज हम एक ऐसी ही Kahani बताने जा रहे है जो हम सभी को एक बहुत ही अच्छी नैतिक शिक्षा देती है

रुपयों का पौधा सीख देती एक हिन्दी कहाँनी

Moral Tell Hindi Story | Hindi Kahani

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चिंकी जो की बहुत ही गरीब परिवार से थी इसी गरीबी के चलते किसी तरह उसके माता पिता उसके पढाई लिखाई का जिम्मा संभाल रहे थे चुकी अब गर्मी का मौसम शुरू हो चुका था जिसके कारण हर साल की इस साल भी स्कूल बंद होने का समय आ गया था सभी बच्चे गर्मियों की छुट्टियों में घुमने का प्लान बना रहे थे कोई बच्चा पिकनिक मनाने की प्लान कर रहा था तो दूर घुमने का प्लान कर रहा था

लेकिन चिंकी जो की अपने घर की गरीबी हालात से अच्छी तरह परिचित थी उसे पता था की उसके माता पिता के पास इतने पैसे नही है की वह दूर कही पिकनिक मनाने जा सके इसलिए वह चुपचाप सभी की बाते सुन रही थी और मन ही मन अपने गरीबी पर भी सोच रही थी

और अब स्कूल बंद हो गया था तो उसके माता पिता चिंकी को अब घुमने के लिए नाना के घर ले आये जो की उसके नाना का घर पास के ही गाँव में था जिस कारण से अब चिंकी नाना के घर आकर भी बहुत खुश थी

फिर अगले दिन वह सुबह जल्दी उठ गयी थी टी उसके नाना अपने साथ घुमाने के लिए अपने बगीचे ले गये जहा तरह तरह के खूब बड़े बड़े पेड़ थे जिनपर फल और फूल लगे हुए थे जिन्हें देखकर चिंकी बहुत खुश हुई

इसी समय बगीचे में काम करने वाले एक व्यक्ति पर गयी जहा वह नये पौधे के लिए गड्ढा खोदकर बीज लगा रहे थे जिसे देखकर चिंकी ने पूछा “अंकल यह आप क्या कर रहे है” तो उस व्यक्ति ने बताया की वह पेड़ के बीज लगा रहा है जिससे कुछ समय बाद पानी देने पर इसमें से छोटा पौधा निकलेगा और फिर यही बड़ा होकर हमे ढेर सारी फल भी देंगा”

चिंकी उस व्यक्ति का बात सुनकर बहुत ही खुश हुई और फिर कुछ देर बाद अपने नाना के साथ घर आ गयी और घर के पिछवाड़े में वह भी कुदाल और पानी लेकर पहुच गयी और फिर उसने थोडा गड्ढा किया और बीज के साथ अपने पास के पैसे के सिक्के को भी गड्ढे में डालकर मिट्टी से ढक दिया और रोज सुबह सुबह पानी देने लगी,

जिसे देखकर एक दिन उसके नाना ने पूछा लिया “चिंकी बेटा तुम यहा रोज पानी किसलिए देती हो” तो अपने नाना का सवाल सुनकर चिंकी बोली “ नाना जी आपने बताया था की बीज लगाने से उसमे से पौधे निकलते है और फिर वे बड़े होकर पेड़ बनते है और फिर फल देते है तो मैंने भी अपने मम्मी पापा की गरीबी को दूर करने के लिए पैसे का पेड़ लगायी हु जिसके लिए मै रोज इसमें पानी देती हु जिससे इसमें से रूपये का पौधा निकलेगा और फिर इन पैसो से हमारी गरीबी दूर हो जाएगी”

चिंकी की बात सुनकर उसके नाना जी हँस दिए बोले “बेटा रूपये के पौधे भी कही होते है क्या ?

इसपर चिंकी कुछ जवाब नही दे पायी तो नाना जी बोला “रुको मै तुम्हे समझाता हु” इसके बाद वे चिंकी से बोले “तुमने जो पैसे को जमीन के अंदर लगाया है उसे निकाल लो फिर मै तुम्हे समझाता हु की रूपये के पौधे कहा लगा सकते है”

नाना जी बात सुनकर चिंकी जमींन के अंदर से लगाये पैसे को निकाल ली और अपने नाना को दे दिया इसके बाद उसके नाना घर से एक गुल्लक लेकर आये और फिर बोले “चिंकी बेटा, आज से यह गुल्लक तुम्हारा है इससे अपने पैसे के पौधे लगा सकती हो, अब तुम क्या करना जो भी खर्च करने के जो भी पैसे मिले उसमे से कुछ हिस्से बचाकर इस गुल्लक में डालना, फिर धीरे धीरे जब यह गुल्लक भर जायेगा, तो फिर देखना यही गुल्लक तुम्हारे रुपयों का पेड़ के समान हो जायेगे जो ढेर सारे एक साथ पैसे देंगे”

अब चिंकी समझ चुकी थी की पैसे का कोई पौधा नही होता है बल्कि इसे तो बचत और मेहनत से बढाया जा सकता है

इसके बाद चिंकी को जब भी पैसे खर्च करने को मिलते थे तो उन पैसो के कुछ हिस्से को गुल्लक में डालने लगी थी और इस तरह धीरे धीरे एक साल बीत चुके थे और फिर सारे बच्चो ने फिर से एकबार पिकनिक जाने का फैसला कर रहे थे तो अबकी बार चिंकी भी कहा चुकने वाली थी अब तो वह ख़ुशी ख़ुशी दौडकर घर आई और अपने मम्मी पापा से पिकनिक जाने के लिए उस गुल्लक को दिखा दिया जिससे देखकर चिंकी के मम्मी पापा बहुत खुश हुए क्युकी चिंकी की छोटी छोटी बचत अब एक बड़े पेड़ के रुपयों के समान हो गये थे जो की उसके सपनों को पूरा करने के लिए काफी था इस प्रकार एक सही मार्गदर्शन से चिंकी अब बचत करना सीख गयी थी और इन बचत से अपने सपनों को भी पूरा करना सीख गयी थी फिर इस तरह चिंकी अबकी बार पिकनिक मनाने भी गयी और वहा खूब एन्जॉय भी किया

कहानी से शिक्षा

वो कहते है ना घड़ा तभी सुंदर बनता है जब अंदर से सहारे देकर बाहर से थपकी लगायी जाती है तो निश्चित ही घड़ा बहुत ही सुंदर बनता है ठीक उसी प्रकार हम सभी का बचपन भी होता है जिसे हमारे माता पिता के मार्गदर्शन और सही दिशा से अपने आने वाले जीवन को बहुत ही सुंदर बना सकते है

इस कहानी में चिंकी भले ही गरीब परिवार से थी लेकिन उसकी छोटी छोटी बचत उसके सपनों को पूरा करने के लिए काफी था और ऐसा सबकुछ उसके नाना जी के सही मार्गदर्शन से हुआ

इस प्रकार यदि हमे भी अपना जीवन सुंदर बनाना है तो हमे अपने माता पिता के मार्गदर्शन से हमेसा आगे बढ़ते रहना चाहिए क्युकी कोई भी माँ बाप अपने बच्चो का हमेसा भला ही चाहते है और जो भी मार्गदर्शन करते है सदा उनके हित में ही होता है

तो आप सबको यह Hindi कहानी रुपयों का पौधा कैसा लगा कमेंट में जरुर बताये और इसे शेयर भी जरुर करे.

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