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शेर और सियार की बाल कहानी

Sher aur Siyar ki Bal Kahani

बच्चो के लिए शेर और सियार की बाल कहानी

बचपन मे हर किसी को अपने दादी नानी से अनेक कहानिया सुनने को मिलती है, जो की कहानिया तो बहुत छोटी होती थी, लेकिन इनसे काफी बड़ी सीख मिलती है, तो चलिये इस पोस्ट मे शेर और सियार की बाल कहानी बताने जा रहे है, जिस बाल कहानी Sher aur Siyar ki Bal Kahani को पढ़कर आपके बचपन के दिन जरूर याद आ जाएगे।

शेर और सियार की बाल कहानी

Sher aur Siyar ki Bal Kahani

Sher aur Siyar ki Bal Kahaniएकबार की बात है, किसी जंगल मे एक शेर रहता था, जो की अपने शक्ति के दम पर रोज नए नए शिकार करता था, फिर उन्हे खाकर अपना जीवन अच्छे से गुजारा कर रहा था, तभी एक दिन की बात है, एक मरियल सा सियार जो की कई दिनो से भूखा था, वह शेर के पास जाकर बोला महाराज आपकी जय हो, आप हमे अपने शरण मे ले लीजिये और अपना दास बना लीजिये, आप जो कहे कहेगे वैसे आपकी सेवा करेगे, इसके बदले जो भी आप बचा खुचा खाना देंगे उसी को खाकर अपना जीवन गुजारा कर लेंगे,

सियार की ये सब बाते सुनकर शेर को दया आ गयी और फिर सियार को अपने सेवा के लिए रख लिया, और इस तरह शेर जो कुछ भी शिकार करता था, उसके खाने के बाद जो कुछ भी बचता था, सियार को खाने के लिए दे देता था, जिसे खाकर धीरे धीरे मोटा ताजा हो गया,

और फिर वह सियार खुद को शेर के इतना ही ताकतवर भी समझने लगा था, एक दिन की बात है, और सियार अपना रौब झाड़ते हुए शेर से बोला “महाराज अब मै अब आपकी तरह ताकतवर हो गया हु, और आपकी तरह शिकार भी कर सकता हु, इसलिए अब आप आराम कीजिये, मै आपके लिए शिकार करुगा”

सियार की सब बाते सुनकर शेर को यकीन आ गया की सियार को अपने अंदर घमंड आ गया है, लेकिन फिर भी शेर ने उस सियार को समझाते हुए बोला “तुम भले ही पहले की तुलना मे मोटे ताजे हो गए हो, लेकिन शेर जितना तुम्हारे अंदर ताकत नहीं आ सकती है, इसलिए तुम शिकार करने की बात छोड़ दो, और जो शिकार करुगा, उसी से अपना गुजारा करना” लेकिन उस घमंडी सियार को शेर की ये सब बाते तनिक भी पसंद नहीं आई और फिर सियार बोला “महाराज आज मै आपके लिए शिकार करता हु, आप मेरे साथ आइए, मै आपको आज अपनी ताकत दिखाता हु”

फिर सियार और शेर एक ऊंची पहाड़ी पर गए जहा नीचे उन्हे ढेर सारी अपने झुंड मे दिख रहे थे, फिर सियार बोला “महाराज आप देखते जाइए आज मै अपने से कई गुने बड़े जानवर का शिकार करके दिखाता हु,” यह बात सुनकर वह शेर सियार को एकबार फिर से समझाने की कोशिश किया, लेकिन वह ताकत के घमंड मे चूर सियार शेर की एक न सुनी,

फिर वह घमंडी सियार ऊंची पहाड़ी से हाथी के ऊपर कूद गया, लेकिन इतने मे हाथी पीछे हट गया, जिससे वह सियार धड़ाम से हाथी के पैरो के आगे गिरा, जिसे उसके शरीर की हड्डिया टुट गयी, फिर इतने मे हाथी ने अपना एक पैर हाथ के ऊपर रख दिया, जिस कारण से उस सियार के तुरंत ही प्राण पखेरू निकल गए, और फिर इस सियार बिना मौत के ही अपने घमंड के चलते मारा गया,

जिसे देखकर शेर ने कहा – जो घमंडी होते है, उनकी बुद्धि भी हर ली जाती है, फिर उनकी यही दुर्गति होती है, और बिना बात के बिन मौत मारे जाते है।

कहानी से शिक्षा

इस कहानी से हमे यही शिक्षा मिलती है, हमारे अंदर चाहे कितनी भी शक्ति क्यू न आ जाए, लेकिन कभी भी अपने शक्ति भी घमंड नही करना चाहिए, क्यूकी घमंड का एक दिन अंत जरूर होता है,

तो आपको यह बाल कहानी शेर और सियार की बाल कहानी कैसा लगा, कमेंट बॉक्स मे जरूर बताए और इस कहानी को शेयर भी जरूर करे।

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