टिंकू का उपहार संस्कार सिखाती एक Hindi Moral Story


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टिंकू का उपहार एक सीख देती हिन्दी मोरल स्टोरी

वो कहा जाता है ना बच्चे भगवान का रूप होते है वे शुद्ध पानी की तरफ निर्मल होते है उन्हें जिस रंग के संस्कार में ढाला जाय वे उसी रंग में ढल जाते है यानी आप अपने बच्चो को सही संस्कार देते है तो निश्चित ही आपके बच्चे आगे चलकर हमेसा अच्छाई और भलाई के ही मार्ग पर चलेगे वो कहा गया है जैसा बोओगे वैसा ही काटोगे यानी यदि आप बबूल के पेड़ लगाते है तो उसमे से काटे ही निकलेगे आम कभी नही निकल सकते

तो चलिए आज हम बच्चो के इसी संस्कार पर सीख देती एक ऐसे Kahani यहा बता रहे है जिनसे आप भी बहुत बड़ी सीख ले सकते है

टिंकू का उपहार सीख देने वाली कहानी

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Hindi Moral Kahaniटिंकू जो की चौथी क्लास में पढता था जिसके माता पिता ने उसे हमेसा अच्छे कार्यो को करने के लिए प्रेरित किया करते थे एक दिन टिंकू अपने क्लास में पढाई कर रहा था की उसके टीचर ने बताया की अगले हफ्ते सारे बच्चे पिकनिक मनाने स्कूल बस से चलेगे जिसके लिए सभी बच्चे अपने माता पिता को बता दे और रास्ते के अपने खर्च के लिए कुछ पैसे भी जरुर रख ले और फिर शाम तक सभी बच्चे वापस लौट आयेगे

टीचर की यह बात सुनकर सभी बच्चे ख़ुशी से चिल्लाने लगे तो टीचर ने किसी तरह सभी बच्चो को शांत कराया इसके बाद तो बच्चो में गजब का उत्साह भर गया सभी बच्चे अब शाम की छुट्टी का प्रतीक्षा करने लगे और जैसे ही शाम को छुट्टी की घंटी बजी सभी बच्चे दौड़ते हुए अपने घर को भागे ताकि जल्दी जल्दी पिकनिक की बात अपने माता पिता से बता सके.

और फिर टिंकू भी अपने घर पहुच गया और मम्मी से पूछा की बताओ मम्मी आज हमे स्कूल में क्या हुआ, तो टिंकू की मम्मी बोली हमे कैसे पता होगा बेटा, तुम बताओ तुम्हारे स्कूल में आज क्या क्या हुआ

तो अपने मम्मी की बात सुनकर टिंकू ख़ुशी से नाचने लगा और बताया की अगले हफ्ते सारे बच्चे और टीचर स्कूल बस से पिकनिक मनाने जा रहे है जहा हम खूब घुमेगे और सभी बच्चो के साथ खूब एन्जॉय भी करेगे जिसके लिए हमे रास्ते के खर्चे के लिए कुछ पैसे भी ले जाना होगा”

इस पर टिंकू की मम्मी खुश होते हुए बोली की यह तो बहुत ही अच्छी बात है चलो अच्छा है इसी बहाने तुम घूम भी लोगे और नई जगह का अनुभव भी ले सकते हो

तो इतने में टिंकू के पापा भी उसके पास आ गये और बोले बेटा हमे नही बताओगे क्या हुआ आज स्कूल में,

तो टिंकू ख़ुशी से बोला जरुर पापा आपको तो बताना ही पड़ेगा, आपसे तो पैसे भी लेने है हमारे स्कूल से सभी पिकनिक के लिए अगले हफ्ते जा रहे है तो क्या मै जा सकता हु,

तो टिंकू के पापा ने कहा ठीक है बेटा तुम भी जाना और अपने दोस्तों के साथ ही रहना.

तो इतने में टिंकू की छोटी बहन बोल पड़ी मै भी जाउंगी तो टिंकू बोला यह स्कूल का पिकनिक है इसमें तो बस स्कूल वाले ही जायेगे इसलिए तुम नही जा सकती हो

तो टिंकू की बहन बोली ठीक है मेरे लिए वहा से कुछ जरुर लेते आना

इसके बाद टिंकू के पापा ने रास्ते खर्चे के लिए टिंकू को 100 रूपये दे दिए इसके बाद तो टिंकू और भी खुश हो गया और वह जल्दी से तैयारी करने लगा

और फिर अगले हफ्ते सभी बच्चे सुबह बताये गये जल्दी टाइम पर स्कूल पहुच गये जहा पहले से ही सभी बस खड़ी थी इसके बाद सभी बच्चे बस में स्वर होकर पिकनिक के लिए निकल पड़े

इसके बाद में सभी बच्चे और भी खुश हो गये सभी एक दुसरे से अपने ख़ुशी का इजहार करने लगे और सभी खाने पिने की बाते करने लगे और फिर स्कूल की बस एक हिल स्टेशन पर रुकी जहा आस पास खूब घुमने की जगह थी सभी बच्चे वहा उतरकर चारो तरफ खूब घुमे और फिर सबने एक साथ लंच किया इसके बाद वे सभी पास के मार्केट में चले गये और सभी ने वहा से कुछ ना कुछ जरुर ख़रीदा

फिर इसके बाद सभी बच्चो ने पूरे दिन खूब एन्जॉय किया और शाम को फिर बस से वापस स्कूल लौट आये और फिर उसके बाद सभी बच्चे अपने घर चले गये

इसके बाद टिंकू भी खूब ख़ुशी के साथ घर पंहुचा और और फिर उसके माता पिता, उसकी छोटी बहन सभी एकसाथ बैठ गये और टिंकू से पिकनिक के बारे में पूछने लगे की वहा क्या क्या हुआ

तो टिंकू ने ख़ुशी ख़ुशी पूरे दिन की बाते बता दी इसके बाद उसकी बहन ने पूछा की मेरे लिए वहा से क्या लाये हो

तो टिंकू ने अपने बैग से एक सुंदर खिलौना निकाल कर अपनी बहन को दे दिया जो की दिखने में बहुत ही सुंदर था इसके बाद तो उसकी बहन भी बहुत खुश हो गयी तो फिर टिंकू की मम्मी ने पूछा बेटा मेरे लिए क्या लाये हो

तो टिंकू ने दो चेन निकालकर अपने मम्मी और पापा को दे दिया जो की वह भी बहुत सुंदर था जिसे देखकर सभी बहुत खुश हो गये

फिर इसके बाद टिंकू के मम्मी पापा ने पूछा बेटा तुम पाने लिए क्या वहा से ख़रीदे

तो टिंकू ने कहा “आप सभी मेरे लिए जीवन का सबसे बड़े उपहार हो, इससे बड़ी मेरी ख़ुशी की क्या बात हो सकती है और फिर आप लोगो के अलावा मेरे लिए क्या चाहिए”

टिंकू की यह बात सुनकर उसके मम्मी पापा बहुत ही खुश हुए और टिंकू को गले लिए

कहानी से शिक्षा

इस कहानी से हमे यही शिक्षा मिलती है की यदि हम अपने बच्चो की अच्छा बनते देखना चाहते है तो उन्हें अच्छे संस्कार ही अच्छा बना सकते है तो यदि टिंकू को अच्छे संस्कार नही मिले होते तो वह भी अपने पैसो को फिजूलखर्ची में लगा देता और मिले पैसे का सही से उपयोग नही कर पाता,

लेकिन टिंकू के मिले संस्कार ने ही उसे अच्छा सोचने और करने के लिए प्रेरित किया तो ऐसे में यदि आप भी या अपने बच्चो को अच्छा बनाना चाहते है तो उन्हें हमेसा अच्छी बाते सीखने के लिए प्रेरित करे ताकि आगे चलकर यही बच्चे आपके सपनों को हकीकत में बदल सके

तो आप सबको यह सीख देती Kahani टिंकू का उपहार कैसा लगा कमेंट में जरुर बताये और इस कहानी को शेयर भी जरुर करे

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2 Comments

    1. आपका नाम भी टिंकू है सो ऐसा ख रहे है कोई नही, हमे नाम नही कहानी से हमे क्या सीख मिलती है ये ज्यादा मायने रखती है .

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