थॉमस एल्वा एडीसन की जीवनी | Thomas Alva Edison Biography in Hindi

थॉमस एल्वा एडीसन एक ऐसे महान वैज्ञानिक जिन्होंने इस दुनिया में प्रकाश से रोशन किया यानि उन्होंने ही बल्ब का अविष्कार किया था, जिस आविष्कार के चलते आज ये दुनिया प्रकाश से जगमगा रही है, तो इस पोस्ट में थॉमस एल्वा एडीसन की जीवनी को पढेगे, जैसा की आप जानते है की जैसे ही अँधेरा होता है तो हम तुरंत बिजली बोर्ड चालू करते है फिर तुरंत बल्ब के द्वारा चारो तरफ उजाला हो जाता है तो ये हमारे अँधेरे को दूर करने वाली बल्ब का प्रकाश हमे तुरंत अँधेरे से दूर कर देता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है की ये बल्ब किसने बनाया होगा या कैसे पहली बार बना होगा जो हमारे जीवन के अस्तित्व में आया तो शायद हमने कभी इसके बारे में सोचने का वक़्त ही नही मिला हो.

जरा सोचिये एक छोटे से बल्ब बनाने में अगर हम आज एक बार असफल हो जाए तो क्या हम दोबारा इसे बनाने का प्रयाश करेगे उत्तर सबका शायद ना में ही हो, क्यूकी आज के ज़माने में जब हम एक बार अगर अपनी जिन्दगी में किसी काम को करने में असफल हो गये तो हमे आगे के सारे रास्ते बंद नजर आने लगते है.

लेकिन जरा आप सोचिये इस बल्ब को बनाने में थॉमस ऐल्वा एडीसन 10000 बार से भी ज्यादा हुए फिर भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी लेकिन हजारो बार असफल होने के बाद भी महान वैज्ञानिक थॉमस ऐल्वा एडीसन ने अपने जीवन में कभी हार नही मानी और प्रकाश देने वाले बल्ब का आविष्कार किया जो की सबकी जिन्दगी में एक तरह से प्रकाश से भर दिया.

तो आईये थॉमस ऐल्वा एडीसन के जीवन और जीवन से जुडी से कुछ बाते Thomas Alva Edison Biography in Hindi के जरिये जानते है ..

थॉमस ऐल्वा एडीसन का जीवन परिचय 

Thomas Alva Edison Biography in Hindi

Thomas Alva Edison

Thomas Alva Edison Biography in Hindi – थॉमस ऐल्वा एडीसन का जन्म 11 फ़रवरी 1847 ईस्वी को अमेरिका के ओहायो राज्य के मिलैन नगर में हुआ था, थॉमस अल्वा एडिसन को दुनिया में सबसे अधिक आविष्कारक करने वाले के रूप में जाना जाता है.

लेकिन सोचो दोस्तों क्या थॉमस ऐल्वा एडीसन बचपन में भी ऐसे थे तो शायद नही, उन्हें बचपन में मंदबुद्धि के रूप में जाना जाता है एक बार तो उनके स्कूल के अध्यापक तो उन्हें स्कूल के ड्रेस और फीस न होने के कारण उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया.

गरीबी के कारण उनकी माँ ने उन्हें घर पर ही पढ़ाने का निर्णय लिया और जिस बेटा के पीछे माँ की पढाई हो तो उसे अपनि जीवन में सफलता मिलना निश्चित ही है फिर इसके बाद वे Open School से फॉर्म भरकर माँ से ही पढाई करते हुए सारे एग्जाम पास करते गये और माँ द्वारा दी गयी शिक्षा के चलते ही मात्र दस साल की आयु में उन्होंने अपना पहला प्रयोगशाला भी बना लिया था और माँ के द्वारा दी गयी पुस्तको पर अपना प्रयोग करना शुरू कर दिया था.

इतना ही नही जब वे बारह साल के थे अपनी माँ की आर्थिक स्थिति सुधराने के लिए वे समाचारपत्रों को  भी बेचना शुरू कर दिए थे इस तरह से वे प्रतिदिन एक डालर कमाने लगे.

और फिर आगे चलकर उन्होंने तार कर्मचारी के रूप में नौकरी करने लगे और इन्ही कमाए पैसो से अपना प्रयोग करते थे.

एडिसन बचपन से ही माँ की शिक्षा से वे काफी जिज्ञाशु हो गये थे और उनकी सबसे बड़ी खूबी यही थी की जो जानते या मालूम होता तो उसपर प्रयोग करना शुरू कर देते थे ताकि पता चल सके की कही गयी बाते सत्य तो है न.

एक बार इनके बचपन में इन्हें बताया गया की कीड़े खाने से ही पक्षी उड़ते है तो उन्होंने जिज्ञासावश इसे सिद्ध करने के लिए वे बगीचे से ढेर सारे कीड़े उठा लाये और उनका घोल बनाकर अपने दोस्त को पिला की शायद उनका दोस्त उड़ने लगे लेकिन इसका उल्टा असर हुआ और वह बीमार हो गया.

वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडिसन को आविष्कार के प्रति इनका जूनून को देखकर इन्हें लोग पागल और सनकी कहने लगे थे लेकिन इनकी कभी हार न मानने की प्रवित्ति ही इन्हें महान बनाती है शायद दूसरा कोई होता तो बल्ब का अविष्कार नही हो पाता लेकिन हाजार बार असफल होने के बावजूद भी इन्होने वो कर दिखाया जो शायद इस दुनिया के लिए अद्भुत भेट है पूरी दुनिया आज इन्ही की देंन से प्रकाश से प्रकाशित है.

वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडिसन अपने प्रयोगों की खातिर अपने नौकरी तक छोड़ दिए थे जो की एक अदम्य साहस का परिचय दिखता है बचपन में मंदबुद्धि का बालक अपने जीवन काल में 1,093 आविष्कारों का जनक बने जो की शायद एक विश्व रिकॉर्ड है इतने अधिक आविष्कार इनके अलावा अब तक किसी ने नही किया है.

दोस्तों थॉमस अल्वा एडिसन का मानना था की अगर हम हजार बार असफल हो रहे है तो इसका मतलब हम कुछ गलत कर रहे है वरना हम पहली ही बार में सफल हो सकते है इसलिए जब हम पहली बार या कितनी बार भी असफल हो रहे है तो हमारे मन में बस यही होना चाहिए की बस एक बार और इसके बाद अब गलती नही करना तो अगर हजार बार असफल होकर भी हम सफलता के कदम चूम सकते है.

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उनका मानना था की हम किसी से अगर प्रेरणा ले सकते है तो निश्चित ही हम उसे पूरा करने में अपना १००% परिश्रम भी दे सकते है अगर परिश्रम सही से किया जाय तो हजार बार असफल होने के बाद भी हम सफल हो सकते है.

और अगर हम अपनी कमजोरियों से हार मान लेते है तो यही हमारी सबसे बड़ी असफलता है जो की कोई भी ऐसा नही चाहेगा यानी असफलता से सीख लेने से ही हम सफलता की ओर बढ़ सकते है 21 अक्टूबर 1879 ई. को एडिसन ने बल्ब विश्व को भेंट किया, और उन्होंने अपने जीवनकाल में ऐसा करके दिखाया जो की मानवता जाति के लिए एक मिशाल है.

अगर इन्सान का जन्म हुआ है तो उसे इस दुनिया से एक दिन जाना भी पड़ेगा और यही सार्वभौमिक सत्य है इस महान वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडिसन ने 18 अक्टूबर 1931 को संसार से विदा ली। और जाते जाते पूरी दुनिया को रोशन कर गए.

थॉमस अल्वा एडिसन का हमारे जीवन में सीख

Thomas Alva Edison Biography in Hindi – आज के समय में सोचिये अगर हम कुछ भी करते है तो उसका पहली बार में सौ प्रतिशत अपने पक्ष में परिणाम चाहते है जो की हमारे अनुकूल हो और जिससे हम अपने कार्यो में पहली ही बार में सफल के रूप में जाने जाए लेकिन ऐसा कदापी विरलय लोग कर पाते है.

लेकिन अगर हम पहली बार में असफल हो भी गये तो इसका मतलब कदापि ये नही है की अब हम कभी सफल ही नही हो सकते है क्यू की सफलता के पीछे असफलता जरुर होती है.

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सफलता और असफलता भी एक सिक्के के दो पहलु है अगर हम बार बार असफल हो हो रहे है इसका सीधा मतलब है की हमारे द्वारा कुछ गलत किया जा रहा है जो की हमरे सफलता की राह में रुकावट डाल रही है.

तो जो लोग सच में कुछ करना चाहते है वे ही लोग अगर हजार बार असफल हो भी जाये तो भी वे कभी हार नही मानते है और यही उनकी परिश्रम और लगन एक दिन निश्चित सफलता दिलाती है.

मान लीजिये हम किसी भी क्षेत्र में अपना सौ प्रतिशत दे रहे है फिर भी हम असफल हो रहे है इसका मतलब हमारे द्वारा कही न कही कोई गलती की जा रही है तो ये वही स्थिति होती है जब हमारे जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा होती है.

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अगर इस समय मन में ठान ले की एक बार और कोशिश करेगे तो निश्चित ही अगली बार पहले की अपेक्षा हम और अच्छा करे फिर भी न सफल हो तो हम खुद से हार माने ही न.

क्यू की जैसा कहा भी गया है –

“मन के हारे हार है मन के जीते जीत”

यानी हमने मान की हम जीत नही सकते है तो हमारी सबसे बड़ी हार है इन्सान परिस्थतियो से हार जाए तो आगे जीत भी सकता है लेकीन खुद से मान ले की वह कभी जीत नही सकता तो वो फिर चाहकर भी जीत नही पाता है.

तो दोस्तों हम जो भी कुछ अपनी जीवन में बनना चाहते है हो सकता है हमे पहली बार में निराशा हाथ लगती हो लेकिन हमे खुद से कभी हार न मानना चाहिए और फिर से कोशिश एक बार का मन्त्र अपनी जीवन में अपनाना चाहिए फिर तो हमारी सफलता निश्चित ही होंगी.

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तो आप सबको थॉमस अल्वा एडिसन के बारे में दी गयी जानकारी कैसा लगा कृपया कमेंट बॉक्स में जरुर बताये.

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