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राम भक्त हनुमान जी के जयंती पर विशेष निबन्ध

Hanuman Jayanti Essay in Hindi

हनुमान जयंती पर विशेष निबन्ध

हनुमान जयंती जो की भगवान हनुमान के जन्म का त्यौहार है जो की यह त्यौहार हनुमान जयंती चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है, हिन्दू धर्म के मान्यताओ के अनुसार इसी दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था. जिस कारण से प्रत्येक वर्ष इस दिन Hanuman Jayanti बहुत ही बड़े धूमधाम से मनाया जाता है.

त्रेतायुग में भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त, भगवान शिव के अंशावतार हनुमान जी को यह रामचंद्र जी वरदान प्राप्त है की वे अनंत काल के लिए इस धरती पर विराजमान रहेगे और लोगो का मंगल कल्याण और धर्म स्थापना करते रहेगे, जिस कारण से इस कलयुग में भी हनुमान जी पर लोगो का बहुत अधिक विश्वास है, और  जब भी लोगो पर किसी भी डर, भय, आतंक आता है तो सबसे पहले लोगो के मुख पर हनुमान जी का ही नाम आता है.

तो चलिए हनुमान जी के इस पावन जन्मोत्सव पर हनुमान जयंती के बारे में जानते है..

हनुमान जयंती 2023

Hanuman Jayanti in Hindi

Hanuman Jayantiइस साल 2023 में लोगों के द्वारा हनुमान जयंती हिन्दू कैलेंडर के के अनुसार चैत्र माह की पूर्णिमा यानि 8 अप्रैल बुधवार को मनाया जायेगा।, भारत के अलग अलग राज्यों में हनुमानजी के जन्म की अलग अलग तिथियां मानी जाती है. जिस दिन हनुमानजी का जन्म हुआ, उस दिन को हनुमान के भक्तगण “हनुमान जयंती“ के त्यौहार के रूप में मनाते हैं. इस दिन की मान्यता भले ही अलग हो परन्तु सभी भक्तों के मन में हनुमानजी के प्रति आस्था तथा श्रद्धा समान ही है.

हिन्दू माह चैत्र की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को श्री राम भक्त हनुमानजी ने जन्म लिया. हनुमानजी केसरी तथा अंजनी के पुत्र थे. इन्हे अंजनीपुत्र तथा केसरीनन्दन भी कहा जाता है. एक मान्यता के अनुसार इंद्र के राज्य में विराजमान वायुदेव ने ही माता अंजनी के गर्भ में हनुमानजी को भेजा था, इसलिए इन्हें वायुपुत्र और पवनपुत्र भी कहा जाता है.

हनुमान जी की कथा

Hanuman Jayanti Story in Hindi

हनुमानजी को महावीर, बजरंगबली, मारुती, पवनपुत्र, अंजनीपुत्र, केसरीनन्दन के नाम से भी जाना जाता है. बचपन में हनुमान जी का नाम मारुती था, तो चलिए हनुमान जी से जुडी एक कहानी जानते है जिससे यह पता चलता है की केसरी नंदन मारुती का नाम हनुमान कैसे पड़ा? इससे जुड़ा एक संसार प्रसिद्ध कहानी है,

यह घटना हनुमानजी की बाल्यावस्था में घटी, एक दिन मारुती अपनी निद्रा से जागे और उन्हें तीव्र जोरो से भूख लगी थी, उन्होंने पास के एक वृक्ष पर लाल पका फल देखा, जिसे खाने के लिए वे निकल पड़े, दरअसल मारुती जिसे लाल पका फल समझ रहे थे वे सूर्यदेव थे और वह अमावस्या का दिन था और राहू सूर्य को ग्रहण लगाने वाले थे।

लेकिन रहू सूर्य को ग्रहण लगा पाते उससे पहले ही हनुमान जी ने सूर्य फल समझकर निगल लिया। राहु कुछ समझ नहीं पाए कि हो क्या रहा है? उन्होनें इंद्र से सहायता मांगी, इंद्रदेव के बार-बार आग्रह करने पर जब हनुमान जी ने सूर्यदेव को मुक्त नहीं किया तो,  इंद्र ने बज्र से उनके मुख पर प्रहार किया जो की यह ब्रज उनक्व हनु यानी ठोड़ी पर लगी, जिसके पश्चात सूर्यदेव मुक्त हुए, वहीं इस प्रहर से मारुती मूर्छित होकर आकाश से धरती की ओर गिरते हैं, पवनदेव इस घटना से क्रोधित होकर मारुती को अपने साथ ले एक गुफा में अंतर्ध्यान हो जाते हैं,

जिसके परिणामस्वरूप पवन देव द्वारा समस्त वायु को रोक देने के बाद सम्पूर्ण पृथ्वी पर जीवों में त्राहि- त्राहि मच उठती है, इस विनाश को रोकने के लिए सारे देवगण पवनदेव से आग्रह करते हैं कि वे अपने क्रोध को त्याग पृथ्वी पर प्राणवायु का प्रवाह करें, सभी देव मारुती को वरदान स्वरूप कई दिव्य शक्तियाँ प्रदान करते हैं और उन्हें हनुमान नाम से पूजनीय होने का वरदान देते हैं, जिस कारण से उस दिन से मारुती का नाम हनु पर चोट लगने के कारण उनका नाम हनुमान पड़ा,

इस घटना की वर्णन तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान चालीसा में की गई है –

जुग सहस्र जोजन पर भानू।

लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

हनुमान जयंती व्रत पूजा विधि

Hanuman Jayanti Puja Vidhi in Hindi

हनुमान जयंती के दिन व्रत रखने वालों को कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है| व्रत रखने वाले व्रत की पूर्व रात्रि से ब्रह्मचर्य का पालन करें| हो सके तो भक्तजनों को जमीन पर ही सोना चाहिए, इससे अधिक लाभ होगा| प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर प्रभू श्री राम, माता सीता व श्री हनुमान का स्मरण करें और तद्पश्चात नित्यक्रिया से निवृत होकर स्नान कर हनुमान जी की प्रतिमा को स्थापित कर विधिपूर्वक पूजा करना चाहिए,

इसके बाद हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करें, और फिर हनुमान जी की आरती करना चाहिए, इस दिन स्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का अखंड पाठ भी करवाया जाता है, और प्रसाद के रुप में गुड़, भीगे या भुने चने एवं बेसन के लड्डू हनुमान जी को चढ़ाये जाते हैं,

पूजा सामग्री में सिंदूर, केसर युक्त चंदन, धूप, अगरबती, दीपक के लिए शुद्ध घी या चमेली के तेल का उपयोग करना चाहिए और पूजा के लिए फूलो में गैंदा, गुलाब, कनेर, सूरजमुखी आदि के लाल या पीले पुष्प अर्पित करना चाहिए और फिर इस दिन हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढ़ाने से मनोकामना की शीघ्र पूर्ति होती है..

हनुमान जयंती मनाने का महत्व

Hanuman Jayanti Mahatva in Hindi

हनुमान जयंती का समारोह प्रकृति के अद्भुत प्राणी के साथ पूरी हनुमान प्रजाति के सह-अस्तित्व में संतुलन की ओर संकेत करता है। हनुमान जी ने बानर कुल में जन्म लिया था, और हिन्दू धर्म के लोग हनुमान जी को एक दैवीय जीव के रुप में पूजते हैं। यह त्योहार सभी के लिए बहुत अधिक महत्व रखता है, हालांकि जो लोग ब्रह्मचारी, पहलवान और बलवान होते है वे इस समारोह की ओर से विशेष रुप से प्रेरित होते हैं। क्योकि हनुमान जी बल और बुद्धि के देवता माने जाते है, हनुमान जी अपने भक्तों के बीच में अनेक नामों से जाने जाते हैं, जैसे- पवन कुमार, महावीर, बालीबिमा, मारुतसुत, संकट मोचन, बजरंगवली, पवनसुत, अंजनिसुत, मारुति, आदि।

हनुमान अवतार को महान शक्ति, आस्था, भक्ति, ताकत, ज्ञान, दैवीय शक्ति, बहादुरी, बुद्धिमत्ता, निःस्वार्थ सेवा-भावना आदि गुणों के साथ भगवान शिव का 11वाँ रुद्र अवतार माना जाता है। इन्होंने अपना पूरा जीवन भगवान श्री राम और माता सीता की भक्ति में लगा दिया और बिना किसी उद्देश्य के कभी भी अपनी शक्तियों का प्रदर्शन नहीं किया।

हनुमान भक्त हनुमान जी की प्रार्थना उनके जैसा बल, बुद्धि, ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए करते हैं। इनके भक्तों के द्वारा इनकी पूजा बहुत से तरीकों से की जाती है, कुछ लोग अपने जीवन में शक्ति, प्रसिद्धी, सफलता आदि प्राप्त करने के लिए बहुत समय तक इनके नाम का जाप करने के द्वारा ध्यान करते हैं, वहीं कुछ लोग इन सबके लिए हनुमान चालीसा का जाप करते हैं। जो की आज के समय में हनुमान भक्तो के लिए काफी सहायक भी है.

हनुमान जी की आरती

“आरती किजे हनुमान लला की| दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरवर काँपे | रोग दोष जाके निकट ना झाँके ॥

अंजनी पुत्र महा बलदाई| संतन के प्रभु सदा सहाई॥
दे वीरा रघुनाथ पठाए| लंका जाए सिया सुधी लाए॥

लंका सा कोट समुंद्र सी खाई| जात पवनसुत बार न लाई॥
लंका जाई असुर संहारे| सियाराम जी के काज सँवारे॥

लक्ष्मण मूर्छित पडे सकारे| लानि संजिवन प्राण उबारे॥
पैठि पताल तोरि जम कारे| अहिरावन की भुजा उखारे॥

बायें भुजा असुर दल मारे| दाहीने भुजा सब संत जन उबारे॥
सुर नर मुनि जन आरती उतारे| जै जै जै हनुमान उचारे॥

कचंन थाल कपूर लौ छाई| आरती करत अंजना माई॥
जो हनुमान जी की आरती गावे| बसहिं बैकुंठ परम पद पावें॥

लंका विध्वंश किए रघुराई| तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई॥
आरती किजे हनुमान लला की| दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥”

श्री हनुमान चालीसा

दोहा:

“श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि।

बरनऊँ रघुवर विमल जसु, जो दायकु फल चारि।।

बुद्धिहीन तनु जानि के, सुमिरौ पवन कुमार।

बल बुद्धि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार।।”

चौपाई

“जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिंहु लोक उजागर।।

रामदूत अतुलित बल धामा, अंजनि पुत्र पवन सुत नामा।।

महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी।

कंचन वरन विराज सुबेसा, कान्न कुण्डल कुंचित केसा।।

हाथ ब्रज औ ध्वजा विराजे, कान्धे मूंज जनेऊ साजे।

शंकर सुमन केसरी नन्दन, तेज प्रताप महा जग वन्दन।।

विद्यावान गुनी अति चातुर, राम काज करिवे को आतुर।

प्रभु चरित्र सुनिवे को रसिया, राम-लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियंहि दिखावा, विकट रूप धरि लंक जरावा।

भीम रूप धरि असुर संहारे, रामचन्द्र के काज सवारे।।

लाए संजीवन लखन जियाए, श्री रघुबीर हरषि उर लाए।

रघुपति कीन्हि बहुत बठाई, तुम मम प्रिय भरत सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावें, अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावें।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा, नारद सारद सहित अहीसा।।

यम कुबेर दिगपाल कहाँ ते, कवि कोबिद कहि सके कहाँ ते।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा, राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मन्त्र विभीषन माना, लंकेश्वर भए सब जग जाना।

जुग सहस्र जोजन पर भानु, लील्यो ताहि मधुर फल जानु।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख मांहि, जलधि लाँघ गये अचरज नाहिं।

दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुलारे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे।

सब सुख लहे तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहूँ को डरना।।

आपन तेज सम्हारो आपे, तीनों लोक हाँक ते काँपे।

भूत पिशाच निकट नहीं आवें, महावीर जब नाम सुनावें।।

नासे रोग हरे सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत वीरा।

संकट ते हनुमान छुड़ावें, मन क्रम वचन ध्यान जो लावें।।

सब पर राम तपस्वी राजा, तिनके काज सकल तुम साजा।

और मनोरथ जो कोई लावे, सोई अमित जीवन फल पावे।।

चारों जुग परताप तुम्हारा, है प्रसिद्ध जगत उजियारा।

साधु संत के तुम रखवारे, असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन्ह जानकी माता।

राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को पावें, जनम जनम के दुख विसरावें।

अन्त काल रघुवर पुर जाई, जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई, हनुमत सेई सर्व सुख करई।

संकट कटे मिटे सब पीरा, जपत निरन्तर हनुमत बलवीरा।।

जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करो गुरुदेव की नाईं।

जो सत बार पाठ कर कोई, छूटई बन्दि महासुख होई।।

जो यह पाठ पढ़े हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा।

तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ हृदय मँह डेरा।।”

दोहा

“पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।”

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1 COMMENT

  1. आपके इस लेख में हनुमान जी का काफी सुंदर वर्णन किया गया है जो मुझे काफी अच्छा लगा है

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