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हरियाली तीज या हरतालिका तीज पूजा विधि

Hariyali Teej Or Hartalika Teej Essay In Hindi

हरियाली तीज या हरतालिका तीज पूजा विधि

Hariyali Teej जिसे हरतालिका तीज के नाम से भी जाना जाता है जो की हिन्दू धर्म का एक प्रसिद्द त्यौहार है जो की सावन महीने के शुक्ल पक्ष के तृतीया को मनाया जाता है,

वैसे तो हिन्दू धर्म में अनेको त्यौहार है जिन सभी का अपना धार्मिक, सामाजिक और पौराणिक महत्व है उन्ही त्योहारों में से एक त्यौहार है,

हरियाली तीज जो को सुहागन स्त्रिया अपने पति के दीर्घायु यानी लम्बी आयु की कामना से इस त्यौहार और व्रत का पालन करती है और इसे धूमधाम से मनाती है.

तो चलिए इस वैवाहिक बंधन के पवित्र त्योहार हरियाली तीज या हरतालिका तीज के बारे में जानते है यह कब मनाया जाता है इसकी पूजा विधि क्या है हरियाली तीज या हरतालिका तीज | Hariyali Teej से जुडी पौराणिक कहानी और महत्व पर प्रकाश डालते है.

हरियाली तीज या हरतालिका तीज

Hariyali Teej or Hartalika Teej in Hindi

Hariyali teej or Hartalika Teejहरियाली तीज जिसे हरतालिका तीज, कजली तीज के नाम से भी जाना जाता है यह उत्सव सुहागिन औरते और कुंवारी कन्याये दोनों ही धूमधाम से मनाती है,

एक तरफ जहा सुहागिन स्त्रिया अपने पति के लिए इस दिन नीराजल व्रत रहती है तो दूसरी तरफ अविवाहित कन्याये अच्छे वर पाने के लिए इस व्रत का पालन करती है.

चूँकि हरियाली तीज सावन के महीने में मनाया जाता है जिस तरह इस महीने में धरती हरियाली की पूरी चादर ओढ़ लेती है चारो तरफ हरियाली ही हरियाली ही दिखाई देता है जिसे देखकर हर किसी का मन प्रकृति के प्रति मनमुग्ध हो जाता है तो ऐसे में इस व्रत को हरियाली तीज के नाम से भी जाना जाता है.

तो दूसरी तरफ भारत के उत्तर पूर्वी इलाको में इस त्यौहार को कजली तीज के नाम से भी मनाया जाता है त्यौहार के इस मौसम में चारो तरफ हरियाली ही हरियाली होती है,

सभी पेड़ हरे भरे हो जाते है पेड़ो पर झूले पड़ जाते है मन मयूर नित्य करने लगता है सभी स्त्रिया मिलकर झूले झूलती है,

और लोकगीत के जरिये अपनी खुशियों का इजहार करती है पूरा दृश्य मनोरम हो जाता है जिस कारण से इन लोकगीत कजली के काफी प्रसिद्द होने के कारण इसे कजली तीज के नाम से भी मनाया जाता है.

और कुछ भागो में इसे हरतालिका तीज के नाम से इस त्यौहार को मनाया जाता है यानी सावन के इस पवित्र महीने बिछड़े प्रेमी प्रेमिका फिर से मिल जाते है,

यानि इस त्यौहार के प्रमुख आराध्य देव भगवान शंकर और माता पार्वती के मिलन के रूप में इसे त्यौहार के रूप में मनाया जाता है जिसे हरतालिका तीज के नाम से जानते है.

हरियाली तीज या हरतालिका तीज कब है

Hariyali teej or Hartalika Teej Kab hai

अब आप यही सोच रहे होंगे की की ये हरियाली तीज या हरतालिका तीज कब मनाया जाता है तो हिन्दू धर्म के पंचांग के अनुसार हरियाली तीज या हरतालिका तीज सावन महीने के शुक्ल पक्ष के तृतीया यानि तीसरे दिन मनाया जाता है.

और इस तरफ 2023 में हरियाली तीज या हरतालिका तीज 31 July Sunday को मनाया जायेगा.

हरियाली तीज या हरतालिका तीज से जुडी पौराणिक कहानी व्रत कथा

Hariyali Teej or Hartalika Teej History Kahani in Hindi

हरियाली तीज या हरतालिका तीज मनाने के पीछे बहुत ही पौराणिक कहानी है जो की इस प्रकार है:-

हिन्दू धर्म की मान्यताओ के अनुसार माता पार्वती सैकड़ो वर्ष की तपस्या और 107 जन्मो के के पश्चात पार्वती के रूप में पर्वतराज हिमालय के घर जन्म लेती है,

जो की फिर से शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए राजसी सुख सुविधा को छोड़कर घने जंगलो में बिना कुछ खाए वर्षो वर्षो तक तपस्या में लीन रहती है जिस कारण से उनके पिता बहुत ही दुखी रहते थे.

लेकिन माता पार्वती किसी की प्रवाह किये बिना लगातार अपने तपस्या में लींन रहती थी और फिर सावन माह की शुक्ल पक्ष के तृतीया वाले दिन उसी जंगल में मिट्टी से भगवान शिव की शिवलिंग बनाकर पूजा पाठ करती है जिससे भगवान शिव प्रसन्न होते है और फिर अपनी वधु के रूप माता पार्वती को स्वीकार करते है.

और साथ में भोलेनाथ यह भी आशीर्वाद देते है की अब इस दिन जो भी मेरी भक्ति और पूजा पाठ करेगा उसे मनोवांछित पति और दीर्घायु की कामना पूरी होंगी.

तभी से इस पौराणिक महत्व के चलते हरियाली तीज या हरतालिका तीज का त्यौहार बहुत ही धूमधाम से मनाया जाने लगा.

हरियाली तीज या हरतालिका तीज पूजा विधि

Hariyali Teej or Hartalika Teej Puja Vidhi in Hindi

हरियाली तीज या हरतालिका तीज सुहागिन स्त्रियों का त्यौहार है तो इस दिन जो भी स्त्री इस त्यौहार को मनाती है वे पूरे दिन व्रत रखती है

हरियाली तीज या हरतालिका तीज के दिन महिलाये सुबह जल्दी स्नान करके तैयार होती है और फिर पूरे दिन बिना कुछ खाए पिए व्रत रखती है और फिर शाम के समय में सोलह श्रृंगार के साथ खुद को सजाती है,

एक दुसरे के हाथो में पहले से मेहदी लगाकर रखती है ताकि इस दिन खुद का सोलह श्रृंगार कर सके, इस त्यौहार में बिन मेहँदी के त्यौहार सुना सुना लगता है.

और फिर माँ पार्वती और भोलेनाथ की पूजा के लिए पूरे विधि के साथ मंदिर जाती है इस हरियाली तीज या हरतालिका तीज के दिन महिलाये शाम को मंदिर पर इक्कठा होती है और फिर श्रृंगार के सामान के साथ फल–फूल और पूजा के सामानों को माँ पार्वती को चढ़ाती है,

और हरियाली तीज या हरतालिका तीज व्रत कथा सुनती है और एक दुसरे को सिंदूर लगाती है और पूरे विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करती है और ईश्वर से पति की लम्बी आयु की कामना करती है.

फिर वापिस घर आने के बाद पति के हाथो ही जल ग्रहण कर अपने व्रत को तोडती है और इस तरफ देखा जाय तो करवा चौथ के तरह वह त्यौहार भी पति की दीर्घायु के लिए मनाया जाता है.

हरियाली तीज या हरतालिका तीज का महत्व

Hariyali Teej or Hartalika Teej Mahatva in Hindi

हरियाली तीज या हरतालिका तीज पत्निया अपने पति के लम्बी आयु की कामना के साथ इस त्यौहार को मनाती है हर त्यौहार की तरह इस त्यौहार का अपना विशिष्ट महत्व है,

अक्सर पति पत्नी में लड़ाई झगडे होते रहते है तो इस त्यौहार के जरिये पत्नी अपने पति के लिए प्यार पा सकती है और वैवाहिक जीवन सुमधुर हो जाते है.

इस दिन महिलाये भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते है जिस कारण से ये महिलाये भगवान शिव के आशीर्वाद की अधिकारी बन जाती है जिस कारण से उनके परिवार में सुख शांति और समृद्धि का माहौल का निवास होता है.

इसके अतिरिक्त हरियाली तीज या हरतालिका तीज का सामाजिक महत्व है जिस कारण से किसान को धरती का अन्नदाता कहा गया है वे भी वर्षा के भरोशे रहते है,

ऐसे में यह सावन की बारिश धरती को हर भरा बन देता है और साथ में किसानो की खेती के लिए यह धरती और वर्षा का जल अनुकूल होता है जिस कारण से किसान कजली लोकगीत गाते है और इसे कजली तीज या हरियाली तीज के रूप में त्यौहार मनाया जाता है.

तो आप सभी को इस हरियाली तीज या हरतालिका तीज के त्यौहार की जानकारी कैसा लगा कमेंट में जरुर बताये और इस पोस्ट को जरुर शेयर करे.

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