पिता दिवस फादर डे पर निबन्ध | Father Day Essay in Hindi | Father Day Nibandh

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Essay on Father’s Day in Hindi | Father’s day Nibandh

पिता दिवस पर हिन्दी में निबंध | फादर डे

माँ की ममता ही होती है जो इन्सान को अपनेपन का अहसास दिलाता है लेकिन इसके अतिरिक्त एक पिता ही होता है जो अपने संतान की सुख के लिए अपनी इच्छाओ का अंत कर देता है और रात दिन मेहनत में इसलिए लगा रहता है की उनकी संतान दुनिया की वो हर ख़ुशी मिले जो उसे नही मिल पाया,

जिस कारण से हिदू धर्म में एक पिता को उसकी महानता के लिए आकाश से भी ऊचा माना गया है और एक संतान के लिए उसके पिता ही सबसे बड़े आदर्श होते है जिनके पदचिन्हों पर हर संतान चलना चाहता है और एक सन्तान की सफलता और उपलब्धी से सबसे ज्यादा ख़ुशी उसके पिता को ही होती है.

वैसे तो हमारी भारतीय संकृति पिता के सम्मान के लिए हर दिन अपने आप में महत्वपूर्ण है लेकीन वर्तमान में पिता के सम्मान में पिता दिवस यानि Father Day मनाया जाता है,

तो चलिए इस पिता दिवस के बारे इस निबन्ध के जरिये बता रहे है जिसके जरिये आप भी पिता दिवस के महत्व को समझ सकते है और अपने पिता के सम्मान को भी अधिक बढ़ा सकते है.

पिता दिवस पर विशेष निबन्ध | फादर day

Father Day Essay in Hindi | father’s day Nibandh

father's day

पिता दिवस यानि पितृ दिवस या Father Day समाज में पिता के सम्मान में मनाया जाने वाला पर्व है जिसे विश्व के हर कोने में किसी न किसी नाम के रूप में जरुर मनाया जाता है,

लेकिन भारत में इसे प्रतिवर्ष जून के तीसरे रविवार को पितृ दिवस के नाम से मनाया जाता है जिसके मनाने का मुख्य उद्देश्य पिता को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है.

पिता एक ऐसे इन्सान होते है जो अपने संतान को बहुत ज्यादा प्यार करते है लेकिन कभी भी वे लोगो से अपने प्यार को दिखाते नही है भले ही माँ के दुलार में बच्चे थोड़े बिगड़ने लगते है लेकिन पिता की वो डांट और डर होता है जिससे बच्चे गलत रास्ते या गलत कार्यो से करने से कतराते है.

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जिस प्रकार माँ हमारी प्रथम शिक्षिका होती है तो पिता भी एक गुरु के समान होता है जो अपने संतान रूपी शिष्य को भले ही बाहर से डांट पड़ती है लेकिन अंदर से अपने शिष्य को सम्हालते हुए जीवन में आगे बढ़ने का पाठ पढ़ाते है.

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पिता के इस कार्य पर कबीरदास जी यह दोहा एकदम सटीक बैठती है जो इस प्रकार है :-

गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढि गढि काढैं खोट,

अंतर हाथ सहार दै, बाहर बाहै चोट.

अर्थात गुरु यानी पिता उस कुम्हार के समान होता है जो अपने घड़े को सुंदर बनाने के लिए घड़े के अंदर हाथ डालते हुए बाहर से थाप देता है और उसे एक सुंदर घड़े का रूप देता है,

ठीक उसी प्रकार एक पिता भी एक गुरु के रूप में अपने शिष्य रूपी सन्तान को कठोर अनुशासन रखते हुए लेकिन मन से प्रेम भावना रखते हुए अपने बेटो को बुराई के रास्ते से बचाते हुए इस संसार में अपने संतान को सम्मानित बनाता है और और उसे सफलता के मार्ग अपर ले जाता है.

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इस प्रकार जब बच्चे छोटे होते है तो पिता के रूप में अच्छे बुरे का फर्क सिखाते है और यही बच्चे जब बड़े हो जाते है तो पिता अपने बच्चो के दोस्त बनाकर एक सलाहकार के रूप में आगे बढने का मार्ग प्रसस्त करते है.

पिता दिवस को मनाने की आवश्यकता

Why Celebrate Father Day in Hindi

वैसे तो भारतीय संस्कृति में माँ बाप के साल के 365 दिन सम्मान का दिन होता है हर दिन पिता के सम्मान के लिए उपयुक्त है लेकिन आज के बदलते समाज के दौर में सबकुछ तेजी से बदलता जा रहा है,

जिसमे हमारी रिश्तो पर भी गहरा असर दिखाई देने लगा है तो चलिए जानते है की आज हमे पिता दिवस क्यों मनाने की आवश्यकता पड़ने लगी है.

1 :- वैसे तो पिता दिवस के मनाने का मुख्य उदेश्य पिता के सम्मान देना होता है जो किसी ए दिन के फिक्स होता है लेकिन हमारे देश में पिता को ईश्वर तुल्य माना गया है जो की संतान की जन्म देने वाला होता है,

यानी जीवन की शुरुआत के लिए माँ के साथ पिता का भी उतना योगदान है जिससे हमे अनमोल जीवन मिलती है जिस जीवन का मोल किसी भी दाम से पिता के इस कर्ज को चुकाया नही जा सकता है लेकिन बदलते परिवेश में अब एक दिन पिता के सम्मान के लिए भी चुना गया है जिसे हम सभी पिता दिवस के रूप में मनाते है.

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2 :- जैसे जैसे हम भारतीय विकास के पथ पर आगे बढ़ते जा रहे है हमारी भारतीय संस्कृति पर पाश्चात्य संस्कृति हावी होती जा रही है जिस कारण से इन्सान अब अपने बारे में ज्यादा से ज्यादा सोचने लगा है,

पहले के ज़माने में जहा एक ही छत के नीचे एक पिता के सभी संतान और परिवार के सभी सदस्य मिलजुलकर रहा करते है जिस कारण से बड़े परिवार की वजह से परिवार के सभी सदस्यों को बराबर सम्मान मिलता था लेकिन आज के समय में लोगो की सोच बदलती जा रही है.

समाज अब इतना आगे निकल चुका है की लोग अपने ही बीबी और बच्चे के साथ रहना पसंद करने लगे है जिस कारण से अब उनके बूढ़े माँ बाप का साथ बुढ़ापे में छूटता जा रहा है,

पूरे जीवन भर अपनी खुशियों को त्यागकर अपने संतान की देखभाल करने वाली माँ बाप को अब के बच्चे एक मिनट में अपने परिवार से अलग कर देते है जिस कारण से एक पिता के इस खोये हुए सम्मान को दिलाने के लिए पिता दिवसमनाने की आवश्यकता पड़ने लगी है.

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3 :- पहले के समय माँ बाप के साथ उनके बच्चे रहा करते थे और माँ बाप की यही चाहत होती थी की उनके संतान उनके बुढ़ापे में देखभाल करेगे जिस कारण से वे अपने बच्चो की निस्वार्थ परवरिश करते है,

लेकिन आज के समय में इन्ही बच्चो को नौकरी और रोजगार के लिए अब गाँव और घरो से दूर शहरो में जाना पड़ता है जिस कारण एक ऐसा भी समय आता है बच्चे अपने परिवार को लेकर शहर में व्यवस्थित तो जाते है.

लेकिन अत्यधिक महगाई के कारण यही बच्चे अपने माँ बाप के देखभाल में खुद को असमर्थ पाने लगते है जिस कारण वे अपने बूढ़े माँ बाप को वृद्धाआश्रम में छोड़ आते है,

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जहा पर इन माँ बाप का जीवन अंधकारमय हो जाता है पूरे जीवन भर अपनी खुशियों का त्याग करने वाले इन बूढ़े माँ बाप के लिए अपने बच्चो के बिना बाकि बचा जीवन काटना मुश्किल होता है.

जिस कारण से आज के समय में फिर से पिता दिवस मनाने की बहुत अधिक आवश्यकता पड़ने लगी है जिसके जरिये माँ बाप के प्रति बच्चो में फिर से वही अपनापन और प्यार लाया जा सके.

4 :- तेजी से विकास की राह पर चलते हुए लोगो की जीवन शैली भी बदलती जा रही है और लोगो की सोचने में भी बहुत अंतर देखने को मिलने लगा है पहले जहा लोग अपनो के बिना नही रह पाते थे,

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लेकिन आज के इस दौर में लोग अब अकेले ही रहना पसंद करने लगे है जिस कारण से उनके बूढ़े माँ बाप एक तरह से बोझ लगने लगते है.

और आज के समय इतनी भयानक परिस्थिति में बहुत चुकी है जिसकी कल्पना मात्र से हृदय में सिहर सी उठने लगती है जरा सोचिये एक पिता अपने चार संतानों को अपनी कमाई से बराबर हिस्से से आराम से खिला सकता है उन्हें पढ़ा लिखकर काबिल बना सकता है लेकिन जैसे ही ये माँ बाप बूढ़े हो जाते है,

तो यही बाप बच्चो को बोझ लगने लगते है और यही बच्चे उनके खाने पीने, रहने तक का बटवारा कर देते है की कितने टाइम तक किस बेटे के माँ बाप रहेगे और फिर उस समय के बीतने के बाद वही बूढ़े माँ बाप को दुसरे बेटे के यहा रहना पड़ता है.

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जरा सोचिये अगर आपके साथ ऐसा हो तो आपके ऊपर क्या बीतेगी, लेकिन आज की हकीकत यही है तो ऐसे में माँ बाप को बोझ समझने वालो संतानों के लिए ऐसे में आखे खोलना बहुत जरुरी हो जाता है,

जिसके लिए पिता दिवस मनाने की जरूरत पड़ने लगती है जिसके जरिये माँ बाप के खोये सम्मान को फिर से दिलाया जा सके.

पिता दिवस का महत्व और हमारा कर्तव्य

Importance of Father Day and Our Responsibility in Hindi

जैसा की हम सभी जानते है की हमारे पिता ईश्वर तुल्य होते है जिनकी तुलना किसी अन्य व्यक्ति से नही की जा सकती है तो इस पिता दिवस पर अपने पिता के लिए क्या कर्तव्य होना चाहिए और हम सभी के लिए पिता दिवस का क्या महत्व है इसके बारे में जानते है.

1 :- पिता का स्थान सर्वोच्च होता है उनके सम्मान में कभी कमी आने दे, कोई भी ऐसा कार्य ना करे जिससे आपके पिता का सर किसी के आगे झुके.

2 :- पिता के प्रति हमेसा प्यार का भाव रखना चाहिए, और उनके बताये गये रास्तो पर सदैव चलना चाहिए.

3 :- पिता के प्यार को कभी कम नही आकना चाहिए, अक्सर अब तो यह भी सुनने की मिलता है की जैसे ही बच्चे बड़े हो जाते है तीखी बहस में यहाँ तक की कह देते है उनके पिता जी आजतक आखिर किया ही क्या है,

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भले ही ये शब्द हमारे भूल से निकले हो लेकिन यही शब्द पिता को अंदर ही अंदर से तोड़ देते है जिसकी भरपाई करना मुश्किल होता है सो कभी भी पिता के सम्मान को ठेस पहुचाने की कोशिश नही करे.

4 :- पिता के महत्व को कभी कम नही समझे, अगर एक पिता क्या होता है उसका अपने परिवार में क्या होता है उस संतान से जाकर पूछो जिनके सर से बाप का साया उठ चुका होता है इसलिए पिता का हमेसा सम्मान करे क्युकी वही हमारे भविष्य के निर्माणकर्ता है.

5 :- कभी भ भूलकर माँ बाप को वृद्धाश्रम में भेजने का प्रयास नही करना चाहिए भले ही दो रोटी कम खाए चलेगा, लेकिन अपने बूढ़े बाप को हमेसा अपने साथ रखे, यही एक पिता के लिए जग की सबसे बड़ी ख़ुशी होती है.

6 :- भले ही आज कितने बड़े क्यों न हो जायेगे लेकिन पिता के नजरो में आप उनके बच्चे ही रहेगे सो कभी भी उनके आगे बड़े होने का दिखावा न करे.

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7 :- एक पिता ही ऐसा होता है जो पूरे परिवार को एकसाथ लेकर चलता है इसलिए हमेसा पिताजी के कार्यो में सहयोग करे, जरा कल्पना कीजिये जिस घर से पिता का सर हट जाता है उस परिवार को टूटने में ज्यादा वक्त भी नही लगता है ,

इसलिए पिता के महत्व को समझे और हमेसा उनके बनाये हुए नीतियों पर चले तभी आप सफलता को जरुर पा सकते है

तो इस प्रकार देखा जाय की हम पिता के सम्मान में चाहे कितना भी कर ले उनके त्याग के आगे कुछ भी नही है इसलिए आज के समय में पिता दिवस के रूप में उन्हें सार्वजनिक रूप से तो सम्मान तो दे ही सकते है,

तो ऐसे में हम सभी का यही कर्तव्य बनता है की पिता के सम्मान को हमेसा बनाये हुए आगे बढ़ते रहे और पिता के सहयोग और आशीर्वाद से जीवन के कठिनाईयों से पार पाते रहे.

तो आप सभी को पिता दिवस की ढेर सारी शुभकामनाये…

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Happy Father Day

तो आप सबको पिता दिवस पर हिन्दी में निबंध | Essay On Father’s Day in Hindi कैसा लगा कमेन्ट में जरुर बताये और इस निबन्ध को शेयर भी जरुर करे.

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