मलावथ पूर्णा के सफलता की सच्ची कहानी Malavath Poorna Real Story


Real Life Success Story of Climb Mount Everest Malavath Poorna in Hindi

माउंट एवरेस्ट फतह मलावथ पूरना के सफलता की सच्ची कहानी

वो कहते है न जब इरादे बुलंद हो तो एवेरस्ट जैसा पर्वत भी सर झुकाने को तैयार होता है और मन में ठान लिया जाय तो कोई भी सफलता की उचाई को आसानी से फतह किया जा सकता है और दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा और मन में जोश हो तो असंभव को भी आसानी से संभव बनाया जा सकता है और अक्सर कहा जाता है की प्रतिभा की कोई उम्र भी नही होती है ऐसा अक्सर सुनने को मिलता है लेकिन इसे साबित करना बहुत ही मुश्किल काम है एक तरफ जहा आज के जमाने में लडकियों को घर से अकेले नही निकलने दिया जाता है वही सब से परे मात्र 13 वर्ष की आयु में मलावथ पूरना / Malavath Poorna ने अपने जोश और जज्बे के दम पर दुनिया के सबसे चोटी माउंट एवेरस्ट / Mount Everest को फतह किया जो की आज की लड़कियों के लिए Malavath Poorna एक आदर्श की मिशाल बन गयी है तो आईये जानते है मलावथ पूरना / Malavath Purna के सफलता की पूरी कहानी को जिनके हौसलों से हर कोई प्रेरणा ले सकता है

मलावथ पूर्णा का जीवन परिचय

Malavath Poorna Biography in Hindi

मलावथ पूर्णा / Malavath Poorna का जन्म 10 जून 2000 को भारत के तेलंगाना राज्य के निजामाबाद जिले के पकल में हुआ था, इनकी माता लक्ष्मी और पिता देवीदास एक गरीब किसान है जो की आदिवासी जनजाति से आते है जो की बड़ी मुश्किल से खेती में मजदूरी करते हुए महीने का 3000 रूपये से भी कम कमा पाते है मलावथ पूर्णा के माता पिता दोनों पढ़े लिखे नही है लेकिन वे अपने बच्चो को पढ़ा लिखाकर कुछ बनाना चाहते है इसी सपने को साकार करने के लिए अपनी गरीबी को भुलाकर अपनी बच्ची मलावथ पूर्णा अपने गाव के सरकारी स्कूल से पढाई की शुरुआत करने को भेजा, जहा मलावथ पूर्णा शुरू से ही पढने में तेज थी और वे दूसरी लडकियों से हटकर कुछ अलग ही करने का सपना मन में हमेसा देखती थी लेकिन जब वे नौवी कक्षा में पहुची तो इनके सपनों को पर लगने लगे और एक दिन इनके स्कूल में निरिक्षण के दौरान आईएस अधिकारी प्रवीण कुमार / Pravin Kumar ने इनके बुलंद हौसलों को देखा और इनके हौसलों के आगे नतमस्तक हो गये और फिर यही से शुरू होती है मलावथ पूर्णा के सफलता की कहानी की शुरुआत जिसे जानकर हर कोई आश्चर्यचकित हो जाता है तो आईये जानते है मलावथ पूर्णा के सफलता की पूरी कहानी / MalavathPurna Success Story in Hindi

मलावथ पूर्णा के सफलता की सच्ची कहानी

Real Success Story of Malavath Purna in Hindi / Malavath Purna ke Jivan ki Sachhi Kahani

वो कहते है हिम्मते मर्द तो मददे खुदा, जब खुद के हौसलों में इतनी जान हो की उगता हुआ सूरज भी आपको सलाम करना चाहे यदि खुद पर इतना तो विश्वास हो तो एवरेस्ट सरीखे बर्फ की चोटिया भी आपके हौसलों के आगे पिघलकर रास्ता दे सकती है जब अपने मंजिल को पाने के लिए राही अपने मंजिल की तरफ बढ़ते है तो रास्ता खुद ब खुद तैयार हो जाती है कुछ ऐसी ही मन में ठानकर कुछ कर गुजरने की इच्छा रखने वाली मलावथ पूर्णा जब अपने बुलंद हौसलों से एवरेस्ट सरीखे ऊची चट्टान को अपने छोटे छोटे कदमो के आगे बौना साबित किया तो मलावथ पूर्णा के हौसलों के आगे लड़की होना क्या, उम्र का मायने क्या रखना सब छोटा पड़ गया और अपने बुलंद हौसलों से मलावथ पूर्णा ने वो कर दिखाया जिसकी कल्पना तो दूर लोग सपने में भी नही सोच पाते है

मलावथ पूर्णा / Malavath Purna एक ऐसे आदिवासी समाज जनजाति से आती है जिस समाज में लड़की का पैदा होना भी अभिशाप माना जाता है और गरीबी के लिए एक कलंक के रूप में लडकियों को देखा जाता है एक ऐसा समाज जहा लडकियों पर हजार तरह के बंदिशे लगी रहती है लडकियों की पढाई लिखाई तो दूर घर से निकलना भी एक तरह से गलत माना जाता है लेकिन इन सब से परे अपने माता पिता के सपनो की परी बेटी मलावथ पूर्णा / Malavath Purna बचपन से कुछ ऐसा कर गुजरना चाहती थी की जिससे उस समाज में लडकियों को भी एक समान इज्जत मिले, मलावथ पूर्णा / Malavath Purna जिस समाज में रहती है वह लडकियों को यह हमेसा महसूस कराया जाता है की वे लड़किया है उनके लिए घर से भी बाहर निकलना कोई जरुरी नही है लेकिन इन सब बातो से बेपरवाह मलावथ पूर्णा बचपन से पढने लिखने में तेज थी और उसके हौसलों को देखकर तो स्कूल के अध्यापक भी दंग रह जाते थे

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फिर एक दिन जब स्कूल निरिक्षण करने आये आईएस अधिकारी प्रवीण कुमार जब मलावथ पूर्णा / Malavath Purna से मिले तो उसके बातो और हौसलों को देखकर काफी प्रभावित हुए और फिर यही से मलावथ पूर्णा के सफलता की शुरुआत का पहला कदम साबित हुआ मलावथ पूर्णा से प्रभावित होकर मलावथ पूर्णा को पर्वतारोहण का प्रशिक्षण देने को बोले जिसे सुनकर मलावथ पूर्णा के माता पिता को यह बात अच्छी न लगी की आखिर समाज के लोग क्या कहेगे की बेटी को घर का कामधाम न सिखाकर पर्वतारोहण सिखा रहे है लेकिन बुलंद हौसलों वाली मलावथ पूर्णा अपने माता पिता को समझाते हुए कहती है की हमे तो कुछ ऐसा करना है जिससे दुनिया भी सलाम करे हम लड़की है तो क्या हुआ हम वो कर सकते है जिसकी दुनिया कल्पना भी न करती हो और अगर मै एक बार सफल हो गयी तो हमारे समाज की सोच बदल जाएगी इन सब बातो से मलावथ पूर्णा के माता पिता पर्वतारोहण सिखने के अनुमति दे देते है फिर इसके पश्चात प्रवीण कुमार के देखरेख में मलावथ पूर्णा / Malavath Purna नौवी कक्षा में ही 8 महीने का पर्वतारोहण का कड़ा प्रक्षिक्षण लेना शुरू करती है

पर्वत को भी पार कर सके,

सागर भी बना दे राह,

विश्वास हो ऐसा दिल में,

कि पत्थर पर भी फूल खिला दे ,

जगाओ दिल में विश्वास इतना, 

जागती आँखों से भी देख सको सपना

दिखा दो लक्ष्य के लिए जुनून इतना,

असफलता ना पड़े कभी राहों में चखना,

करो तुम खुद पर भरोसा इतना,

कभी भी झुकाना पड़े ना सर अपना,

प्रशिक्षण पूरे होने के मलावथ पूर्णा अपने गुरु प्रवीण कुमार के देखरेख में एवरेस्ट चढ़ाई की शुरुआत करते है और 60 दिनों के दुर्गम सफर के पश्चात मात्र 13 वर्ष की आयु में मलावथ पूर्णा ने 25 मई 2014 को दुनिया के सबसे ऊची चोटी माउंट एवेरस्ट पर चढ़ने में सफलता प्राप्त किया और फिर मलावथ पूर्णा दुनिया की सबसे कम उम्र की माउंट एवेस्ट पर चढ़ने वाली लड़की बन गयी जो की अपने आप में एक मिशाल है

मलावथ पूर्णा के हौसले तो एवरेस्ट चढ़ाई के दौरान बुलंद थे लेकिन कई बार चढ़ाई के दौरान ऐसे भी पल आये जिनसे मलावथ पूर्णा तो डिगी नही लेकिन बीच रास्तो में मिलने वाले एवरेस्ट चढ़ाई के दौरान मानव के मृत शरीर उन्हें डरा जरुर देती थी लेकिन मलावथ पूर्णा खुद में इतना हौसलों से बुलंद थी की इन सब बातो की परवाह किये बिना आगे बढती चली जाती और फिर एक ऐसा भी समय जब मलावथ पूर्णा जो हासिल करना चाहती थी उन्हें मिल गया और अपने आखिरी कदम एवरेस्ट के शिखर को चुमते ही तिरंगा पहराकर अपना नाम इतिहास के पन्नो में दर्ज कराया और इस समाज में लोगो के लिए एक मिशाल बन गयी और ये भी सच कर दिखलाया की अगर हौसलों में जान हो तो लड़किया भी आज के ज़माने में बहुत कुछ हासिल करके दिखा सकती है और इस तरह मलावथ पूर्णा भी अपने गुरु प्रवीण कुमार की तरह आईएस बनकर देश की सेवा करने की इच्छा रखती है

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और एवेरस्ट फतह के पश्चात  इस तरह मलावथ पूर्णा को भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा कई इनामो से पुरस्कृत किया गया उनके जीवन पर आधारित फिल्म “पूर्णा” का निर्माण भी राहुल बोस के निर्देशन में हुआ, यहाँ तक की राहुल बोस मलावथ पूर्णा के हिम्मत के हौसलों से इतने प्रभावित हुए की उन्होंने खुद कहा की पूर्णा के बिना बालीवुड भी अपूर्ण है इसलिए पूर्णा के जीवन के बारे में सबको जानना चाहिए जो आज के ज़माने में लड़कियों के लिए एक प्रेरणास्रोत्र है

तो आप सबको मलावथ पूर्णा के जीवन के सच्ची कहानी / Real Life Success Story of Climb Mount Everest Malavath Purna in Hindi कैसा लगा प्लीज हमे कमेंट बॉक्स में जरुर बताये

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9 Comments

  1. Great the mountaineer. sayad logo ko inke baare me jitna sunna achha lagta hai. ye karna utna hi muskil hai.
    Mai bhi ek chhote se gaon se hu aur mai ek mountaineer banna chahta hu bas kisi ki madad chahta hu jo mujhe training me madad kare waise mai har roj subah 4 baje yahi soch rakhkar din ki suruwat karta hu……..pleas help me for mountaineer Please contact me..

    1. शिवम् आप ऐसे लोगो के बारे में सर्च करे और उनसे कांटेक्ट करे कोई ना कोई आपका साथ जरुर देगा . Best of Luck

  2. Its unbelievable because being a child of 13 year, when children generally used to see some dreams for their life, Poorna has completed her dreams at that time.

  3. HI I am Mukesh kumar Gupta
    Mujhe mount everest par chadna hai. Mera age 19 hai lekin Mujhe money problem hai Mujhe ye lakshay kaise hasil hoga please Mujhe bataiye.

  4. Really Poorna u r great😊
    You have made India proud👍👌
    You did a great job
    I am proud of you….☺️
    And Best luck for your brigh future…..👍

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