अंतराष्ट्रीय महिला दिवस International Woman Day

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अंतराष्ट्रीय महिला दिवस यानि International Women Day हर साल 8 मार्च को पूरे विश्व में मनाया जाता है कोई भी पर्व या तिथि विशेष मनाने के पीछे कोई न कोई ऐसा जरुर कारण होता है जिससे हमारा समाज प्रभावित होता है हमारे समाज में महिलाओ की भागीदारी, विशेष योगदान, महिलाओ के प्रति सम्मान और महिलाओ के प्रति समाज निर्माण में योगदान को देखते हुए हर वर्ष पूरे विश्व में 8 मार्च को अंतराष्ट्रीय महिला दिवस | International Women Day मनाया जाता है.

अंतराष्ट्रीय महिला दिवस | International Women Day मनाये जाने का उद्देश्य जातीपाती, राजनीती, समाज में फैले कुरुतियी और उचनीच की भावना और समाज में महिलाओ को बराबरी का दर्जा दिलाना और समान अधिकारों की रक्षा करना है और आज के इस 21वि सदी के दौर में महिलाओ ने पुरुषो के साथ कन्धा से कन्धा मिलाकर समाज के हर क्षेत्र में अपनी भागीदारी निभा रही है, और समाज में हर तबके की महिलाओ के अधिकारों की रक्षा हो इसी अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिवर्ष सयुक्त राष्ट्र संघ | United Nation Organization के नेतृत्व में हर साल 8 मार्च को पूरे World में अंतराष्ट्रीय महिला दिवस | International Women Day मनाया जाता है.

तो आईये अंतराष्ट्रीय महिला दिवस | International Women Day के इस शुभ अवसर पर अंतराष्ट्रीय महिला दिवस | International Women Day के बारे में जानते है और अपने समाज के हर महिलाओ की तरक्की हो ये सुनिश्चित करते है और एक सभ्य समाज निर्माण में हम सभी अपना योगदान देने का प्रण ले.

अंतराष्ट्रीय महिला दिवस | International Women Day

अंतराष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास | International Women Day History

International Woman day

वैसे तो सदियों से हमारे समाज में महिलाओ को सिर्फ घर के कामो तक ही सिमित रखा जाता रहा है हर समय नारी को केवल घर के काम करने वाली और परिवार की जिम्मेवारी उठाने का भार उठाने वाली ही समझा जाता रहा है कभी भी हमारे समाज में महिलाओ को बराबरी का दर्जा नही दिया जाता है इस मुख्य कारण समाज में फैले कुरूतियो और अपने अनुरूप बस पाने विकास की भावना रही है.

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जिसके कारण हर वक्त ये महिलाये हमारे समाज में हमेसा से उपेक्षित रही है जिसको देखते हुए सर्वप्रथम विश्व के सबसे पुराने लोकत्रंत देश संयुक्त राज्य अमेरिका | United State of America मे वहा की राजनितिक पार्टी सोसलिस्ट पार्टी के तत्वाधान में 28 फरवरी 1909 को पहली बार अंतराष्ट्रीय महिला दिवस | International Women Day मनाया गया जिसका मुख्य उद्देश्य अमेरिकी लोकत्रंत में चुनाव में महिलाओ की भागीदारी और उनको वोट दिलाने के अधिकार से मनाया गया,

क्यूकी उस ज़माने में अमेरिकी लोकत्रंत और दुनिया के अनेको देशो में महिलाओ को वोट देने का अधिकार नही था फिर 1910 में कोपेनहेगन सम्मेलन में पहली बार महिला दिवस को अंतराष्ट्रीय दर्जा दिया गया और पूरे विश्व स्तर पर महिलाओ के सम्मान हेतु और समाज में भागीदारी हेतु इसे अंतराष्ट्रीय महिला दिवस | International Women Day के रूप में मनाया जाने लगा.

फिर प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 1917 में महिला दिवस के अवसर पर रूस की महिलाओ ने अपने हक़ की अधिकारों की रक्षा और मुलभुत अधिकारों जैसे रोटी, कपड़े के मांग पर पहली बार हड़ताल पर जाने का फैसला किया, पूरे विश्व के इतिहास में यह किसी भी देश की महिलाओ द्वारा इतना साहसिक फैसला था की,

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वहां की तत्कालीन सत्ता जार की सरकार पूरी तरह से हिल गयी और जार सरकार को अपनी सत्ता खोना पड़ा और फिर उस समय रुसी महिलाओ को वोट देने का अधिकार प्रदान किया गया और यह सब ऐतिहासिक घटना 8 मार्च को हुआ जिसके कारण रूस में स्वन्त्र रूप से अंतराष्ट्रीय महिला दिवस | International Women Day मनाया जाने लगा.

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जिसके कारण धीरे धीरे महिलाओ की मांगो की आवाज़ पूरे विश्व में उठने लगी जिसके कारण विश्व के सभी देशो को अपने समाज में महिलाओ के सम्मान और भागीदारी के लिए इनके मौलिक अधिकारों को प्रदान किया जाने लगा फिर संयुक्त राष्ट्र संघ के गठन के बाद पूरे विश्व में महिला के अधिकारों की रक्षा के लिए अनेक नीतिया और कार्यक्रम बनाये गये और फिर 8 मार्च को विश्व के सभी राष्ट्रों में अंतराष्ट्रीय महिला दिवस | International Women Day मनाया जाने लगा,

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जिसके कारण अपने देश भारत | India में भी महिला दिवस | International Women Day को विशेष महत्व दिया जाने लगा और फिर व्यापक रूप से हमारे देश में भी महिला दिवस | Women Day मनाते है.

अंतराष्ट्रीय महिला दिवस निबन्ध

International Women Day Essay

Women day

महिला को अनेको नाम से पुकारा जाता है कभी यही महिला नारी कहलाती है तो कभी स्त्री तो कभी औरत भले ही इन महिलाओ का चाहे किसी भी नाम या रूप में देखा जाय लेकिन हमारे समाज में बिना महिलाओ के सहयोग के बिना सम्पूर्ण विकास की कल्पना नही की जा सकती है चाहे इन्सान के परवरिश की बात हो या लालन पालन की हो वंशवृद्धि की हो या एक अच्छे समाज निर्माण की बात हो या कला संस्कृति और धर्म की हर जगह महिलाओ के सहयोग के बिना हमारे समाज की कल्पना भी नही की जा सकती है.

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फिर भी समाज के अनेको हिस्सों में आज भी कई बार इन महिलाओ को उपेक्षित होना पड़ता है लेकिन इन सबसे परे आज की महिलाये अपने अदम्य साहस और साहसिक निर्णयों के चलते समाज में हर क्षेत्र में अपने हुनर और सफलता की डंका बजा रही है,

आज के इस महिला सशक्तिकरण के दौर में महिलाओ की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की दुनिया के सबसे पुराने लोकतान्त्रिक देश संयुक्त राज्य अमेरिका | USA में भी एक महिला के रूप में हिलेरी क्लिटन | Hillary Clinton भी सबसे बड़े सवैंधानिक पद राष्ट्रपति पद के लिए अपना एक मजबूत दावा पेश कर चुकी है जो की इस बात की ओर इशारा करती है आज के दौर में ये महिलाये पुरुषो के मामले में कही भी पीछे नही है और दुनिया के हर क्षेत्रो में ये महिलाये पुरुषो के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर चल रही है.

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भारत में महिला दिवस

Women Day in India

वैसे तो जब से मानवता की उत्पप्ति हुई है भारतवर्ष को संस्कृति का जनक कहा जाता है और प्राचीन काल से ही भारत को विश्वगुरु का दर्जा हासिल है कहने का आशय यह है की हमारा देश भारत पूरे विश्व को मानवता की राह पर चलने का मार्ग दिखाता रहा है और बात जब महिलाओ की आती है तो हमारा देश भारत सदियों से ही महिलाओ के सम्मान में सदैव अग्रणी रहा है भारतीय संस्कृति भी तो यही कहती है.

यस्य पूज्यंते नार्यस्तु तत्र रमन्ते देवता

अर्थात जहा नारी की पूजा होती है वहां पर ईश्वर स्वय खुद निवास करते है.

हमारे भारतीय संस्कृति में महिलाओ को देवी का दर्जा प्रदान किया गया है और कहा भी गया है की जहा पर इन देवी रुपी नारियो का सम्मान नहो होता है वहा पर सम्पूर्ण मानव जाती का विनाश हो जाता है और भारत के सबसे बड़े युद्ध महाभारत भी नारी के अपमान से ही शुरू हुआ था जो की सम्पूर्ण वंश के विनाश के बाद ही संपत हुआ है कहने का आशय है भारतीय संस्कृति में एक स्त्री को विशेष दर्जा प्रदान किया गया है यहाँ तक हमारी संस्कृति में किसी भी कन्या के जन्म को धन की देवी माँ लक्ष्मी के आगमन के रूप में देखा जाता है.

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लेकिन बदलते परिवेश के इस दौर में जहा आज के इंसानों की सबसे बड़ी जरूरत पैसा और धन हो गया है जिसके कारण महिलाओ को लेकर अनेक प्रकार के कुरूतियो का भी जन्म हुआ है जैसे दहेज, कन्या भ्रूण हत्या, महिलाओ को शिक्षा का अधिकार न देना, समाज में केवल उपभोग की वस्तु समझना ऐसी तमाम बुराईया जन्म ले चुकी है जो की कही न कही बुरे रूप से समाज को ये कुरूतिया अंदर ही अन्दर खोखला कर रही है.

लेकिन फिर भी आज के इस दौर में हमारे देश की महिलाओ ने समाज की इन कुरूतियो से आगे बढ़ते हुए सफलता के नित नये परचम लहरा रही है इन नामो से कल्पना चावला, सानिया मिर्जा | Sania Mirza, साक्षी मलिक | Sakshi Malik, दीपा कर्माकर | Dipa Karmakar, मैरीकॉम | Mary Kom, इरोम चानू शर्मिला | Irom Chanu Sharmila, माधुरी दीक्षित | Madhuri Dixit, प्रियंका चोपड़ा, स्मृति ईरानी, सुमित्रा महाजन, किरन बेदी, मदर टेरेसा, इंदिरा गाँधी, सरोजनी नायडू, लता मंगेशकर,प्रतिभा पाटिल  जैसे अनेको नाम है,

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जिन महिलाओ के अपने अदम्य साहस के बलबूते हमारे देश का नाम रोशन किया है और हमारे देश में ऐसे अनगिनत महिलाओ के नाम मिल जायेगे जो की समाज के हर क्षेत्र में अपनी प्रमुख भूमिका निभा रही है.

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महान कवियत्री सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा लिखा गया यह लेखन बरबस ही हमे याद आन पड़ता है:-

मैंने हँसाना सीखा है

मैं नहीं जानती रोना।

बरसा करता पल-पल पर

मेरे जीवन में सोना॥“

अर्थात एक महिला अपने जीवन में कितना भी दुःख सह ले लेकिन दुखो के आगे लोगो को हँसाना नही छोडती है शायद यही गुण एक महिला को माँ के  रूप में भी देखा जाता है माँ शब्द अपने आप में व्यापक है माँ का अर्थ ही होता है सदा देना, एक महिला के रूप में माँ कभी भी अपने संतान से प्राप्ति की कामना नही करती है इन्ही सब कारणों से भारतीय संस्कृति में माँ के रूप में एक महिला को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है.

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आज के दौर में अंतराष्ट्रीय महिला दिवस की जरूरत

International Women Day in Today Time

महिला और हमारी भारतीय संस्कृति में बहुत ही गंभीर रिश्ता है हमारी भारतीय संस्कृति हमेसा महिलाओ का सम्मान करना सिखाती है जब जब महिलाओ का अपमान हुआ है तब तब इस धरा पर महाभारत जैसे युद्द देखने को मिलते है एक समय था जब हमारे देश में भारतीय नारी को सम्मान के साथ देखा जाता था,

और महिलाओ को देवी और लक्ष्मी का रूप मानकर हमारे देश में महिलाओ का पूजा जाता था लेकिन बदलते युग के इस दौर में इन्सान अपने चरित्र से इस कदर नीचे गिर गया है की उसे स्त्री एक पूजनीय और इज्जत का रूप न रहकर केवल उपभोग की वस्तु समझी जाने लगी है जो कही न कही हमारे समाज के एक बुरे और संक्रिर्ण मानसिकता को सोच को दर्शाता है.

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आजकल जैसे ही हम सभी सुबह टीवी न्यूज़, अख़बार खोलते है तो हर दस में एक खबर महिला शोषण के बारे में जरुर होती है जो की हमारे विकसित हो रहे समाज का एक बुरा सच भी है आज के दौर में जब हम कभी भी घर से बाहर निकलते है तो हर लड़की अपने मुह पर दुप्पटा बाधे ही निकलती है हो सकता है ये लडकिया या महिलाये हमारे घर या किसी के भी घर की भी हो सकती है,

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क्या हम सभी ने कभी इस पर विचार किया है की जब भारत और पूरी दुनिया अपनी आजादी को हर साल मनाती आ रही है तो क्या किसी महिला के लिए अपने ही देश ऐसे पाबन्द होकर घर से निकलता पड़ता है तो क्या हम अपने आप को पूर्ण रूप से आजाद मान सकते है शायद नही और यही ऐसे तमाम कारण है जिससे पूरे विश्व समुदाय को आज के खुद को विकसित मानने वाले दौर में अंतराष्ट्रीय महिला दिवस | International Woman day मनाने की जरुरत की आवश्यकता पडती है.

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धीरेन्द्र सिंह द्वारा कही गयी इस रचना में भी एक नारी के भागीदारी को दर्शाता है:-

घर से दफ़्तर चूल्हे से चंदा तक

पुरुष संग अब दौड़े यह नार

महिला दिवस है शक्ति दिवस भी

पुरुष नज़रिया में हो और सुधार’’

अंतराष्ट्रीय महिला दिवस

भले ही हमारे समाज में आज भी महिला को अबला समझी जाती है लेकिन जब भी कोई महिला अपने मन से ठान ले तो वो सफलता के वो परचम लहरा सकती है जिसकी कल्पना हम पुरुष भी नही कर सकते है इसका ताजा उदाहरण 2016 में आयोजित रियो ओल्प्म्पिक खेलो में भारतीय महिलाओ के के प्रदर्शन को देखने को मिला, और जब भी कभी कोई महिला मानसिक और शारीरिक शोषण का भी शिकार होती है तो भी वे कभी अपने कदम से पीछे नही हटती है.

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इसकी एक बेमिशाल उदाहरण अरुणिमा सिन्हा के बुलंद हौसलों को देखकर इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है की अगर एक महिला प्रेम का रूप है तो वह सृष्टी संघारक के रूप में माँ दुर्गा का भी रूप धारण कर सकती है और एवेरेस्ट सरीखे ऊची से ऊची चोटी को भी अपने कदमो के नीचे कर सकती है.

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तो आईये हम सभी इस अंतराष्ट्रीय महिला दिवस | International Woman day के अवसर पर हम सभी प्रण ले की हम सभी हमेसा महिलाओ का सम्मान करेगे की क्यू की यही महिला हमारी माँ, बहन या किसी भी रूप में व्यक्तित्व निर्माण में अपना योगदान देती है और यही हमेसा आगे बढने को प्रेरित भी करती है.

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