HomeBiographyमहात्मा गाँधी के जीवनी पर निबंध - Mahatma Gandhi essay in Hindi

महात्मा गाँधी के जीवनी पर निबंध – Mahatma Gandhi essay in Hindi

Mahatma Gandhi Biography In Hindi

महात्मा गाँधी के जीवनी पर निबंध

Mahatma Gandhi Biography in Hindi – अक्सर स्कूल, कॉलेज या सार्वजनिक जगहों पर हे महात्मा गाँधी जी के बारे में बोलने या लिखने का मौका दिया जाता है, तो आज इस पोस्ट में महात्मा गाँधी पर हिन्दी निबन्ध | महात्मा गाँधी Essay | महात्मा गाँधी की जीवनी | गाँधी जी की जीवनी पर निबन्ध बताने जा रहे है, जैसा की जानते है की महात्मा गाँधी यानी वो महापुरुष जिन्होंने सत्य और अहिंसा के बल पर भारत देश को आज़ादी दिलाई और पूरी दुनिया के लिए अहिंसा का मार्ग दिखलाया जो की अद्भुत है जब पूरी दुनिया प्रथम विश्व युद्ध और द्वितीय विश्व के आग में झुलस रही थी पूरी दुनिया सिर्फ गोली और बारूद के ढेर पर खड़ा था ऐसे में अहिंसा की बात करना भी बेमानी था.

लेकिन इस विषम परिस्थिति में भी महात्मा गाँधी जी ने अहिंसा के बल पर अंग्रेजो को भारत छोड़ने पर विवश कर दिया और भारत देश को आजादी दिलाई जो की पूरी दुनिया को दिखा दिया की यदि हम सत्य है और अहिंसा के मार्ग पर चले तो भी बड़े से बड़े विषम परिस्थिति का सामना किया जा सकता है.

तो आईये जानते है महात्मा गाँधी के जीवन और उनके किये गये कार्यो के बारे में जो की आज भी लोग बताये गये उनके मार्ग का लोग अनुसरण करते है. तो चलिए Mahatma Gandhi biography Gandhi Biography पर हिन्दी निबन्ध को जानते है.

महात्मा गाँधी जीवन परिचय

Mahatma Gandhi Biography Essay In Hindi

Mahatma Gandhi Biography

महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 में भारत के गुजरात राज्य के पोरबन्दर शहर में हुआ था इनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था, गाँधी जी के पिता का नाम करमचंद गाँधी और माता का नाम पुतलीबाई था, पुतलीबाई पूजापाठ में विशेष रूचि थी जिनका प्रभाव इनके ऊपर बचपन से ही पड़ा जिसके कारण महात्मा गाँधी जी भी बचपन से ही धार्मिक स्वाभाव के हो गये जो आगे चलकर यही प्रभाव इनके जिन्दगी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

इनकी प्रारम्भिक शिक्षा पोरबन्दर से फिर राजकोट से हाईस्कूल और इंटर की पढाई भावनगर से हुआ बाद में इनके घर वाले चाहते थे की महात्मा गाँधी बैरिस्टर बने जिसके लिए इनको आगे की पढाई लॉ के लिए लन्दन भेज दिया गया.

गाँधी जी का कम मात्र 14 वर्ष की आयु में ही कस्तूरबा देवी से शादी हो गया था क्यू की उस समय बाल विवाह का प्रचलन था.

लन्दन से लौटने पर वे भारत में ही वकालत की प्रैक्टिस करने लगे जिसमे वे सफल नही हुए फिर इसके बाद वे दक्षिण अफ्रीका चले गए जहा उन्हें एक कम्पनी में क़ानूनी सलाहकार के रूप में काम करने का अवसर प्राप्त हुआ जिसके चलते गाँधी जी 20 वर्षो तक अफ्रीका में बिताये और इस बीच वे अफ्रीका में भारतीयों के मूल अधिकारों के लिए भी लड़ते रहे और तत्पश्चात वे भारत वापस लौट आये और फिर वे भारत की आज़ादी के लिए अनेको आन्दोलन किये और फिर भारत 15 अगस्त 1947 को आज़ाद हुआ इसके पश्चात आजादी के कुछ महीनो बाद ही 30 जनवरी 1948 को इनको गोली मारकर हत्या कर दिया गया.

लेकिन गांधी जी इस दुनिया से जाते जाते भारतवासियों को आज़ादी देते गये जिसके कारण महात्मा गाँधी जी आज भी भारतवासियों के दिलो में जिन्दा है.

महात्मा गाँधी के अलग अलग नाम

Name for Mahatma Gandhi

महात्मा गाँधी को उनके कार्यो से अलग अलग नामो से लोग पुकारते है.

महात्मा गाँधी के अलग अलग नाम
महात्मा – महात्मा यानि ऐसे सज्जन पुरुष जो की ईश्वर में आस्था रखता हो इसलिए इन्हें महात्मा गाँधी के नाम से भी जानते है.
बापू – बापू यानी एक गुजराती शब्द जिसका अर्थ पिता से होता है इसलिए इन्हें बच्चे और इनसे छोटे सभी प्यार से बापू बुलाते थे.
राष्ट्रपिता – महात्मा गाँधी को भारत का राष्ट्रपिता या Father of Nation भी कहा जाता है क्यूकी गाँधी के नेतृत्व में ही भारत देश आज़ाद हुआ और सभी राज्यों का गठन करके एक राष्ट्र बना, राष्ट्रपिता सर्वप्रथम नेताजी सुभाषचंद्र बोस द्वारा सम्बोधित किया गया था.
सत्य और अहिंसा के पुँजारी – महात्मा गाँधी ने आजीवन भर सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलकर अपना जीवन बिताया जिसके चलते सभी लोग इन्हें सत्य और अहिंसा का पुजारी के नाम से भी पुकारते है.
साबरमती के संत – गांधीजी साबरमती में अपने अपने आश्रम में अपने मानने वालो के साथ रहते थे जिनके कारण इनके स्वाभाव के कारण इन्हें साबरमती का संत भी कहा जाता है.

महात्मा गाँधी के जीवन कार्य

Mahatma Gandhi Social Life Information in Hindi

महात्मा गाँधी आजीवन भर सत्य और अहिंसा का साथ देते थे और इसी सत्य और अहिंसा के रास्ते पूरी दुनिया को एक नया रास्ता दिखलाया उनकी कही गयी बात आज भी उतनी सत्य है – बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो और बुरा मत कहो यानी गाँधी जी ने कहा था की हमे न तो किसी की बुराई के बारे में सुनना ही चाहिए, न ही देखना चाहिए और किसी के बारे में न तो बुरा कहना भी चाहिए.

गाँधीजी ने अपने जीवन में अनेको ऐसे कार्य किये जो की आन्दोलन के रूप में जाने जाते है

महात्मा गाँधी के जीवन कार्य 
1 – 1893 से 1914 तक दक्षिण अफ्रीका में नागरिक अधिकारों के लिए आन्दोलन.
2 – 1906 में रंग भेद नीति के खिलाफ जुलू में सत्याग्रह आन्दोलन.
3 – 1918 में चंपारण और खेडा सत्याग्रह आन्दोलन.
4 – 1919 में सविनय अवज्ञा आन्दोलन.
5 – 1920 इसवी में अंग्रेजो के दमन नीति के खिलाफ असहयोग आन्दोलन.
6 – 1921 इसवी मे भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस के के कार्यकारिणी अध्यक्ष बने जिनके नेतृत्व में कांग्रेस को स्वराज के नये नाम से गठित किया गया.
7 – 1922 से 1924 ईस्वी तक राजद्रोह मुकदमा चलाकर दो साल तक जेल में रखा गया बाद में इन्हें मुक्त कर दिया गया.
8 – 1930 ईस्वी में नमक कर के विरोध में दांडी मार्च यात्रा जो की काफी सफल रहा.
9 – 1932 में हरिजन आन्दोलन आन्दोलन चलाया.
10 – 1933 ईस्वी में सविनय अवज्ञा आन्दोलन.
11 – 1939 में भारत छोड़ो आन्दोलन.
12 – 1942 में गाँधी जी ने करो या मरो का नारा दिया जो की आज़ादी की लडाई के काफी निर्णयायक साबित हुआ.
13 – 1946 ईस्वी में द्वितीय विश्व की समाप्ति के बाद स्वंत्रता प्राप्ति के लिए अंग्रेजो पर दबाव.
14 – 15 अगस्त 1947 को भारत की आज़ादी.
15 – आजादी के बाद भारत-पाक युद्ध रोकने के लिए आमरण अनसन.

तो इस प्रकार महात्मा गाँधी जी अपने पूरे जीवन भर बिना हथियार उठाये अंग्रेजो के नीति के खिलाफ आवाज़ उठाते रहे और इस प्रकार भारत को आज़ाद कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

महात्मा गाँधी जी के इन्ही महान कार्यो से इन्हें लोग राष्ट्रपिता मानते है और 2 अक्टूबर को भारत देश में बड़े धूम धाम से गाँधी जयंती मनाया जाता है और २०१४ से इनके जन्मदिन दिवस को स्वछता दिवस के रूप में भी घोषित किया गया है जिसके उद्देश्य साफ सफाई पर विशेष ध्यान और स्वच्छ भारत का निर्माण करना है.

महात्मा गाँधी के जीवनी पर निबंध

Mahatma Gandhi Short Biography In Hindi

महात्मा गाँधी के जीवनी संक्षेप मे 
महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर, गुजरात में हुआ था।
उनके पिता का नाम करमचंद गांधी था, जो एक राजा के दरबार में दीवान थे।
गांधीजी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था।
उन्होंने लंदन में वकालत की पढ़ाई की, लेकिन बाद में अधिकारिकता के विरोध में भारत वापस आ गए।
गांधीजी ने सत्याग्रह और अहिंसा की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो उन्हें “अहिंसा के महात्मा” के रूप में जाना जाता है।
उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए अहिंसा के सिद्धांत का अपनाया।
गांधीजी ने चंपारण, खेड़ा, और असहयोग आंदोलन जैसे अनेक आंदोलनों का नेतृत्व किया।
उन्होंने भारतीयों को विदेशी कपड़ों के उपयोग का विरोध किया और खादी का प्रचार किया।
गांधीजी ने विदेशी कंपनियों के विरोध में स्वदेशी आंदोलन का आह्वान किया।
उन्होंने दांडी मार्च और बंदी चोड़ आंदोलन की नेतृत्व किया, जिससे ब्रिटिश सत्ता को जोर का झटका मिला।
गांधीजी ने धर्मनिरपेक्षता और सभ्यता के लिए समर्थन किया।
उन्होंने अपने जीवन में संघर्षों और विरोधों का सामना किया, परंतु उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से मुख मोड़ा नहीं।
गांधीजी को “राष्ट्रपिता” के रूप में जाना जाता है, क्योंकि उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने विविध समाज सुधार कार्यक्रमों का प्रसार किया, जिसमें व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, और ग्रामीण विकास शामिल थे।
गांधीजी ने आंदोलनों के दौरान अपने प्रिय धर्म हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच सद्भावना और समानता का प्रचार किया।
उन्होंने गांधी अश्रमों की स्थापना की, जो नैतिकता, सादगी, और स्वदेशी जीवनशैली का पालन करते थे।
गांधीजी ने भारतीय समाज में नारी सशक्तिकरण के लिए कई पहल की, जैसे कि सती प्रथा के खिलाफ आंदोलन।
उन्होंने अपने जीवन में अपार तपस्या की और अहिंसा, सद्भावना, और समरसता की ओर लोगों को प्रेरित किया।
गांधीजी ने अपने विचारों को “सत्याग्रह” और “अहिंसा” के माध्यम से व्यक्त किया, जो उनका संघर्ष का मूल मंत्र था।
उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए एक महत्वपूर्ण नेतृत्व भूमिका निभाई और लोगों को सशक्त किया।
उन्होंने आध्यात्मिकता और धार्मिक सहिष्णुता का समर्थन किया और समाज में एकता और समरसता के लिए समर्थन किया।
गांधीजी ने विदेशी आदिवासियों, हरिजनों, और अन्य वंचित समुदायों के लिए आवास, शिक्षा, और आर्थिक सहायता का प्रस्ताव किया।
उन्होंने ग्रामीण और असहाय लोगों के लिए विकास कार्यक्रमों की प्रोत्साहना की।
उन्होंने खुद को सादगी, संयम, और स्वदेशी जीवनशैली का पालन किया।
गांधीजी ने अपनी धार्मिक और नैतिक संदेशों को स्वदेशी आंदोलन के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया।
गांधीजी ने विदेशी शासन के विरोध में अपने जीवन की आखिरी कड़ी तक संघर्ष जारी रखा।
गांधीजी को भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महान नेता के रूप में याद किया जाता है।
उन्होंने निर्मलता, सत्य, और विचारशीलता के माध्यम से अपने समाज को आत्मनिर्भर और स्वतंत्र बनाने का सपना देखा।
गांधीजी को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेता के रूप में जाना जाता है, जो अहिंसा और सत्य के माध्यम से अपने लक्ष्य को हासिल किया।
उनकी विचारधारा और सिद्धांतों का प्रभाव आज भी दुनिया भर के नेताओं और समाज सुधारकों पर दिखाई देता है।

तो आप सभी को गाँधी जी के जीवन कार्यो के बारे में कैसा लगा प्लीज कमेंट बॉक्स में जरुर बताये.

गाँधी जी के इन पोस्ट को भी पढ़े :- 

शेयर करे

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here