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बुराई पर अच्छाई की जीत की कहानी

Burai Par Acchai Ki Jeet Short Story

बुराई पर अच्छाई की जीत कहानी

बुराई चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो जाये, लेकिन उसे अच्छाई के आगे हमेसा झुकना ही पड़ता है, तो इसी सोच पर आधारित इस पोस्ट में बुराई पर अच्छाई की जीत की हिन्दी कहानी बताने जा रहे है, जो की हमे इस कहानी से बहुत ही अच्छी शिक्षा मिलती है. तो चलिए इस हिन्दी कहानी बुराई पर अच्छाई की जीत Short Story को पढ़ते है.

बुराई पर अच्छाई की जीत

एक जंगल में एक भेड़िया रहता था वह बहुत ही धूर्त और चालाक स्वाभाव का था जंगल के सारे जानवर उसके व्यवहार को जानते थे कोई भी जानवर उससे दोस्ती नही करना चाहता था लेकिन जब जंगल में कोई भी नया जानवर रहने आता था तो तो वह दुष्ट भेड़िया अपनी मीठी मीठी बातो से बहका कर दोस्ती कर लेता था बाद में उन जानवरों के बच्चो को अपना भोजन बनाता था,

जिसके कारण सभी जानवर उसके दुष्ट व्यवहार को जान गये थे और कोई भी जब नया जानवर जंगल में आता था तो सभी पहले ही उसके बारे में बता देते थे जिसके कारण अब सभी जानवर उस दुष्ट भेड़िये के चगुल से बच जाते थे.

burai par acchai ki jeetसमय बीतता गया अब अब उस भेडियो को भोजन मिलना बंद हो गया जिसके कारण वह दिन प्रतिदिन दुबला होता जा रहा था इसी बीच एक दिन एक हिरन का परिवार अपने छोटे छोटे चार बच्चो के साथ उस जंगल में रहने को आये तो उस चालाक भेड़िये की नजर उस हिरन के बच्चो पर पड़ी तो उसकी आखे चमक गयी और उसे हिरन के बच्चो के रूप में अपना भोजन दिखाई देने लगा.

अब उस भेड़िये के एक पेड़ के नीचे अपने आखे बंद कर ध्यान लगा कर बैठ गया और उस हिरन के परिवार का इन्तजार करने लगा जब हिरन अपने बच्चो के साथ उसके पास आते दिखाई दिया तो वह भगवान का नाम जोर जोर से लेने लगा जिसकी आवाज़ सुनकर उस हिरन के सारे बच्चे वही रुक कर देखने लगे तो हिरन ने उस भेड़िये से मदद लेनी चाही,

लेकिन हिरन भेडियो के व्यव्हार को भली बहती जानते थे भेड़िया चाहे कितनी ही भक्ति क्यू न कर ले लेकिन वह जानवरों का शिकार करना नही भूल सकते फिर भी हिरन भी काफी अक्लमंद थे और उन्हें जंगल के जानवर उस भेड़िये के बारे में हिरन को पहले ही बता चुके थे जिसके चलते हिरन का परिवार उस भेड़िये को सबक सिखाना चाहते थे.

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इसलिए हिरन ने उस धूर्त भेडियो को पुकारा, बार बार पुकारने पर भेड़िये ने अपना ध्यान तोड़कर अपनी आखे खोली तो उसे हिरन का पूरा परिवार अपने आखो के सामने दिखाई दिया तो वह मन ही मन बहुत खुश हुआ क्यूकी उसे तो अब विश्वास हो गया था की उसके भोजन खुद चलकर उसके पास आये है

तब हिरन ने उस भेड़िये से कहा की आप बहुत धार्मिक लगते हो तो भेड़िये ने कहा की अब मेरी उमर हो गयी है इसलिए मै अब भगवान में अपना ध्यान लगाता हु जिससे की जिन्दगी में किये सारे पाप धुल जाए लेकिन आप लोग कौन हो लगता है इस जंगल में नए हो तो तब हिरन ने अपने बारे में बता दिया और बोला की हम यह रहने आये है.

और इसके बाद हिरन ने भेड़िये से रहने के लिए अच्छे जगह के बारे में पूछा तो भेड़िये ने तुरंत अपने गुफा के पास ले गया और बोला की आप लोग चाहो तो यह रह सकते हो तो हिरन का परिवार उस गुफा में रहने को राजी हो गये है.

इसके बाद तो भेड़िया मौके की तलाश में रहने लगा की कब हिरन अपने बच्चो से दूर हो और फिर वह हिरन के बच्चो को अपना भोजन बनाये, लेकिन हिरन अपने बच्चो को पहले से ही सचेत कर रखा था.

एक दिन की बात है दोपहर में हिरन घास चरते चरते बहुत दूर निकल गया तो मौके का फायदा उठाते हुए भेड़िये ने हिरन के बच्चो के उपर हमला कर दिया तो हिरन के बच्चे बड़ी चालाकी से उसके चंगुल से भाग निकले और वे जंगल में भागने लगे तो भेड़िया ने उनका पीछा किया तो वे भागते भागते एक गहरे खायी की तरफ भागे वे इतने तेजी से छलांग मार रहे थे की भेडिये को भागते हुए वह गहरी खायी नही दिखाई दिया और उसी खायी में बहुत तेजी से गिरा.

खाई इतनी गहरी थी थी की कोई भी अंदर नही जा सकता था इसके बाद जंगल के सारे जानवर वहा इक्कट्ठा हो गये और सब भेड़िये की हालत पर हस रहे थे इतने में हिरन का परिवार भी वहा आ पंहुचा और सारी बातो का पता चला,

लेकिन भेडियो को अब अपनी गलती का अहसास हो रहा था उसने सबसे विनती की की उसे बचा ले लेकिन कोई भी जानवर उन्हें बचाने को राजी नही हुआ तो हिरन ने उस भेड़िये से कहा की लोग तुम्हे सिर्फ एक ही शर्त पर बचा सकते है जब तुम अपनी दुष्टता छोड़ दोंगे और यहाँ से निकलने के बाद इस जंगल से चले जाओगे तो भेड़िया उनकी बातो को मानने को तैयार हो गया तो हिरन के कहने पर हाथियों ने अपनी सूड की सहायता से पेड़ की टहनी तोड़कर खाई में डालने लगे जिससे टहनी के सहारे भेड़िया ऊपर आ गया.

और फिर सबसे माफ़ी मांगकर टर्न जंगल छोड़कर वह हमेसा के लिए लिए चला गया अब पूरे जंगल में शांति का माहौल था सभी हसी ख़ुशी एक एक साथ फिर से रहने लगे.

सीख –

तो देखा आपने दुष्ट प्रवित्ति के लोग चाहे कितने भी अच्छे और भोले बन जाए लेकिन उनके उपर विश्वास करना बहुत ही मुश्किल होता है क्यू की दुष्ट व्यक्ति चाहकर भी अपनी दुष्टता नही त्यागता है जैसा की कहा भी गया है जैसे सज्जन लोग अपनी अच्छाई नही छोड़ते है चाहे वे कितने भी दुष्ट के संगत में आ जाए ठीक उसी प्रकार दुष्ट भी अपनी दुष्टता नही त्यागते जैसा की कबीर जी भी ने कहा है –

“संत न छोड़े संतई, चाहे कोटिक मिले असंत |

चन्दन विष व्यापे नहीं, लिपटे रहत भुजंग ||”

इसलिए हमे जब भी किसी भी व्यक्ति पर विश्वास करे तो सबसे पहले उसके आचरण के बारे में जान लेना बहुत ही आवश्यक होता है वरना कभी कभी यही विश्वास हमारे धोखे का कारण भी बन सकता है इसलिए दोस्तों हमे ये याद रखना चाहिए की बुराई पर हमेशा अच्छाई की ही जीत होती है.

तो आप सबको ये कहानी कैसा लगा Please कमेंट बॉक्स में जरुर बताये और इस कहानी को शेयर भी जरुर करे.

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