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मुसीबत का सामना कैसे करें एक प्रेरणा देने वाली कहानी – Musibat Ka Samna Kaise Kare Hindi Kahani

Musibat Ka Samna Kaise Kare Hindi Kahani

मुसीबत का सामना कैसे करे हिन्दी कहानी

हर कोई अपने जीवन में कभी न कभी किसी ना किसी प्रकार के मुसीबत का सामना जरुर करता है, मुसीबत का ऐसा वक्त होता है, जो इन्सान को सबक सीखा जाता है, तो चलिए आज हम यहा एक ऐसी हिन्दी कहानी मुसीबत का सामना, को बताने जा रहे है, जिस कहानी के जरिये हम सभी प्रेरणा ले सकते है.

मुसीबत का सामना कैसे करे कहानी

Musibat Ka Samna Kaise Kare Hindi Kahani

सोहन और मोहन के बीच गहरी दोस्ती थी दोनों एक साथ पढ़ते थे और दोनों का घर भी एक ही गाव में आसपास था तो दोनों एक दुसरे के साथ खूब खेलते और मस्ती करते थे,

सोहन जो की काफी शांत स्वाभाव का जबकि मोहन थोडा शरारती था लेकीन सोहन मोहन को हमेशा समझता रहता था की वह शैतानी नही किया करे नही तो कभी खुद को मुसीबत में डाल सकता है लेकिन मोहन को शैतानी करने में खूब मजा आता था इसलिए वह सोहन की बातो को अनसुना कर दिया करता था,

बरसात के दिन थे और अब स्कूल भी चालू हो गया था उनका स्कूल नदी के रास्ते से होकर थोडा दूर जाना पड़ता था तो सोहन और मोहन हमेसा साथ ही स्कूल जाते थे,

musibat ka samnaएक दिन की बात है जब शाम को स्कूल की छुट्टी हुई तो सभी बच्चे घर जाने लगे तो मोहन जब नदी के पास पंहुचा तो उसे शरारत सूझी और वह नदी के एकदम पास चला गया उस समय बरसात की वजह से नदी की पानी पूरा भरा हुआ था तो फिसलन की वजह से मोहन अचानक नदी में फिसल गया और वह नदी के बहाव में बहने लगा.

यह सब देखकर सभी बच्चे डर गये और जोर जोर बचाओ बचाओ चिल्लाने लगे लेकिन वहां बच्चो के अलावा कोई नही था जो मोहन को नदी में डूबने से बचा पाता.

लेकिन उसका दोस्त सोहन ने अपने दिमाग से काम लेते हुए तुरंत पास पड़े हुए सूखे बासों को नदी में फेकने लगा जिससे एक साथ कई बास नदी में तैरने लगे तो उसने एक बास को मजबूती से पकड कर मोहन की तरफ किया तो मोहन नदी की बहाव में किसी तरह बास को पकड़ लिया फिर क्या था सोहन ने अपनी पूरी ताकत लगाकर खीचने लगा और धीरे धीरे मोहन उस बास के सहारे नदी से बाहर की तरफ आ गया और इस तरह सोहन ने मोहन की जान बचा लिया.

इतने और बच्चो ने गाव वालो को भी बुला लिया था सबने सोहन की बहादुरी का खूब तारीफ किये और फिर मोहन को आगे ऐसा न करने को समझाकर घर भेज दिया इसके बाद से मोहन ने अब शरारत करना छोड़ दिया और फिर सोहन सोहन एक हसी खुशी रहने लगे.

कहानी से शिक्षा :-

इस छोटी सी कहानी से हमे यही पता चलता है की हमारे जिन्दगी में अनेको ऐसे पल आते है जिसमे हम सभी कोई न कोई ऐसा शरारत कर देते है जिससे या तो हम खुद मुसीबत में फस जाते है या और लोगो की इससे चलते परेशानी उठानी पड़ती है इसलिए हमे अपने चलते कभी भी किसी को परेशानी में नही डालना चाहिए और न ही ऐसे शरारते करनी चाहिए जिससे की हमे खुद कोई समस्या में फस जाए.

और हर किसी के अपनी जिन्दगी में ऐसे अनेको मोड़ आते है जब उसके हिम्मत की परीक्षा होती है और अक्सर इन स्थितियों में हम सभी अपनी हिम्मत हार जाते है और फिर उस स्थिति में हम कोई भी ठोश निर्णय भी नही ले पाते है क्यू की अचानक आये इस मुसीबत में हमारा दिमाग काम करना बंद कर देता है.

लेकीन जो इन्सान हिम्मती होते है उनके उपर चाहे कितनी भी बड़ी मुसीबत क्यू न आ जाये लेकीन वे अपना हिम्मत नही हारते है और इन स्थितियों का सामना बड़े धैर्य और बहादुरी के साथ करते है.

तो इसलिए हमें भी चाहे कितनी बड़ी मुसीबत में क्यू न हो हमे अपना धैर्य नही खोना चाहिए और अपने दिमाग से काम लेना और फिर क्यू अगर हम धैर्य से काम ले तो बिगड़े काम भी बन सकते है.

शिक्षा – मुसीबत में कभी भी हिम्मत नही हारना चाहिए और परिस्थितियों का डटकर सामना करना चाहिए             

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