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हिरन के हीन की भावना की कहानी

जैसा की हम सभी जानते है, की ईश्वर ने हर किसी को अपने आप मे खास बनाया हुआ है, लेकिन कभी कभी हम खुद को दूसरों से तुलना करते हुए अपने आप को कम आकने लगते है, और इस तरह खुद से हीन की भावना के शिकार हो जाते है, तो हमे ऐसा करने से बचना चाहिए, तो चलिये इस पोस्ट मे इसी सोंच पर आधारित कहानी हिरन के हीन की भावना की कहानी – Hiran Ke Hin Ki Bhawna Kahani बताने जा रहे है, जिस कहानी हिरन के हीन की भावना की कहानी – Hin Ki Bhawna Hindi Kahani को पढ़कर आपको काफी कुछ सीखने को मिलेगा, और एक अच्छी सीख मिलेगी,

हिरन के हीन की भावना की कहानी

Hiran Ke Hin Ki Bhawna Hindi Kahani

जैसा की हम सभी जानते है, की ईश्वर ने हर किसी को अपने आप मे खास बनाया हुआ है, लेकिन कभी कभी हम खुद को दूसरों से तुलना करते हुए अपने आप को कम आकने लगते है, और इस तरह खुद से हीन की भावना के शिकार हो जाते है, तो हमे ऐसा करने से बचना चाहिए, तो चलिये इस पोस्ट मे इसी सोंच पर आधारित कहानी हिरन के हीन की भावना की कहानी – Hiran Ke Hin Ki Bhawna Kahani बताने जा रहे है, जिस कहानी हिरन के हीन की भावना की कहानी - Hin Ki Bhawna Hindi Kahani को पढ़कर आपको काफी कुछ सीखने को मिलेगा, और एक अच्छी सीख मिलेगी, हिरन के हीन की भावना की कहानी Hin Ki Bhawna Hindi Kahani एक बार की बात है। एक जंगल में एक बारहसिंगा रहता था। वह दिखने मे बहुत ही सुंदर था, जिस कारण से उस बारहसिंगा को अपने खूबसूरत सींगों पर बहुत ही गर्व था। और वह जब भी वह तालाब में पानी पीते हुए अपनी परछाई देखता तो सोचता, “मेरे सींग कितने खूबसूरत हैं, लेकिन मेरी टांगें कितनी पतली और भद्दी हैं, वह सोचता कि “काश उसकी टांगे भी उसकी सींग की तरह खूबसूरत होती तो वह और भी ज्यादा खुबसुरत दिखता, इस प्रकार वह अपनी टांगो के बारे मे सोच सोचकर बहुत हीन भावना से गिरा रहता था। एक दिन की बात है, उस जंगल में कुछ शिकारी शिकार पर आए, फिर उन शिकारियो ने उन्होंने जब खूबसरत सींगों वाले बारहसिंघा को देखा तो वे उसका शिकार करने के लिए उसके पीछे दौड़े, फिर इतने मे बारहसिंगा बहुत तेजी से दौड़ा और शिकारियों से काफी दूर निकल गया। वह हिरन भागने मे इतना मस्त था की उसे सामने ध्यान न दिया फिर वह भागते हुए वह पेड़ो के नीचे से गुजर रहा था, तभी अचानक बारहसिंघा के सींग एक पेड़ की शाखा में अटक गए। बारहसिंगा अपने सींग छुड़ाने की भरपूर कोशिश कर रहा था, लेकिन सींग नहीं निकल पा रहे थे। इधर शिकारी लगातार निकट आते जा रहे थे। खूब कोशिश करने के बाद बड़ी मुश्किल से उसने अपने सींग छुड़ाए और वहाँ से जान बचाकर सुरक्षित स्थान पहुंचा, अब बारहसिंगा सोचने लगा, “मैं भी कितना बड़ा मूर्ख हूँ। जिन सींगों की खूबसूरती पर मैं इतना इतराता था, आज उन्ही की वजह से मैं भारी संकट में फँस गया था और जिन टांगों को मैं भद्दी कहकर कोसा करता था, आज उन्हीं टांगों ने मेरी जान बचाई है।” इस तरह अब बारहसिंगा अब खुद को हीन की भावना से दूर हो चुका था। कहानी से शिक्षा इस दुनिया मे कोई भी इंसान या प्राणी अपने आप मे खास है, ईश्वर ने सभी को अपने आप मे परफेक्ट बनाया हुआ है, लेकिन यदि हम यदि दूसरे से तुलना करने लगते है, तो हर किसी को अपने आप मे कुछ ना कुछ कमी जरूर दिखने लगती है, लेकिन हम सभी को खुद का दूसरे से तुलना करके खुद को हीन की भावना का शिकार नहीं होने देना चाहिए, हमे यह विश्वास रखना चाहिए की हम जैसे भी हैं, सर्वश्रेष्ठ है, खुद से प्यार करें, तो फिर दूसरी से तुलना करने के बजाय खुद पर विश्वास करने की भावना आपकी मजबूती बन जाएगी, और अपने आप को हमेसा दूसरों से बेहतर साबित कर सकते है। तो आपको यह कहानी हिरन के हीन की भावना की कहानी – Hiran Ke Hin Ki Bhawna Hindi Kahani कैसा लगा, कमेंट बॉक्स मे जरूर बताए और इस कहानी को भी शेयर जरूर करे। इन पोस्ट को भी पढे - एक बार की बात है। एक जंगल में एक बारहसिंगा रहता था। वह दिखने मे बहुत ही सुंदर था, जिस कारण से उस बारहसिंगा को अपने खूबसूरत सींगों पर बहुत ही गर्व था। और वह जब भी वह तालाब में पानी पीते हुए अपनी परछाई देखता तो सोचता, “मेरे सींग कितने खूबसूरत हैं, लेकिन मेरी टांगें कितनी पतली और भद्दी हैं,

वह सोचता कि “काश उसकी टांगे भी उसकी सींग की तरह खूबसूरत होती तो वह और भी ज्यादा खुबसुरत दिखता, इस प्रकार वह अपनी टांगो के बारे मे सोच सोचकर बहुत हीन भावना से गिरा रहता था।

एक दिन की बात है, उस जंगल में कुछ शिकारी शिकार पर आए, फिर उन शिकारियो ने उन्होंने जब खूबसरत सींगों वाले बारहसिंघा को देखा तो वे उसका शिकार करने के लिए उसके पीछे दौड़े, फिर इतने मे बारहसिंगा बहुत तेजी से दौड़ा और शिकारियों से काफी दूर निकल गया।

वह हिरन भागने मे इतना मस्त था की उसे सामने ध्यान न दिया फिर वह भागते हुए वह पेड़ो के नीचे से गुजर रहा था, तभी अचानक बारहसिंघा के सींग एक पेड़ की शाखा में अटक गए। बारहसिंगा अपने सींग छुड़ाने की भरपूर कोशिश कर रहा था, लेकिन सींग नहीं निकल पा रहे थे। इधर शिकारी लगातार निकट आते जा रहे थे।

खूब कोशिश करने के बाद बड़ी मुश्किल से उसने अपने सींग छुड़ाए और वहाँ से जान बचाकर सुरक्षित स्थान पहुंचा,

अब बारहसिंगा सोचने लगा, “मैं भी कितना बड़ा मूर्ख हूँ। जिन सींगों की खूबसूरती पर मैं इतना इतराता था, आज उन्ही की वजह से मैं भारी संकट में फँस गया था और जिन टांगों को मैं भद्दी कहकर कोसा करता था, आज उन्हीं टांगों ने मेरी जान बचाई है।” इस तरह अब बारहसिंगा अब खुद को हीन की भावना से दूर हो चुका था।

कहानी से शिक्षा

इस दुनिया मे कोई भी इंसान या प्राणी अपने आप मे खास है, ईश्वर ने सभी को अपने आप मे परफेक्ट बनाया हुआ है, लेकिन यदि हम यदि दूसरे से तुलना करने लगते है, तो हर किसी को अपने आप मे कुछ ना कुछ कमी जरूर दिखने लगती है, लेकिन हम सभी को खुद का दूसरे से तुलना करके खुद को हीन की भावना का शिकार नहीं होने देना चाहिए,

हमे यह विश्वास रखना चाहिए की हम जैसे भी हैं, सर्वश्रेष्ठ है, खुद से प्यार करें, तो फिर दूसरी से तुलना करने के बजाय खुद पर विश्वास करने की भावना आपकी मजबूती बन जाएगी, और अपने आप को हमेसा दूसरों से बेहतर साबित कर सकते है।

तो आपको यह कहानी हिरन के हीन की भावना की कहानी – Hiran Ke Hin Ki Bhawna Hindi Kahani कैसा लगा, कमेंट बॉक्स मे जरूर बताए और इस कहानी को भी शेयर जरूर करे।

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