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शेर और बंदर की कहानी | Sher Aur Bandar Ki Kahani

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वो कहते है, जो जैसा करता है, ठीक उसके भी वैसा ही होता है, इसलिए लोगो के साथ कभी बुराई नही बल्कि हमेसा भलाई करना चाहिए, तो चलिये इस सोंच पर आधारित इस पोस्ट मे कहानी – शेर और बंदर की कहानी | Sher Aur Bandar Ki Hindi Kahani बताने जा रहे है, जिसे पढ़कर बहुत ही अच्छी सीख मिलती है,

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शेर और बंदर की कहानी

Sher Aur Bandar Ki Kahani

Sher Aur Bandar Ki Kahaniएक बार की बात है, किसी जंगल में एक एक शेर रहता था। वह बहुत ही चालाक था। शेर को हर एक जानवर से दोस्ती करके उसका फ़ायदा उठाने में खूब मज़ा आता था। शेर सबसे अपना काम करवाने के बाद दूसरों को ज़रूरत पड़ने पर पीठ दिखा देता था।

शेर की यह बात पूरे जंगल में हर किसी को को पता चल चुका था कि शेर सबसे दोस्ती करके अपना मतलब निकालता है और फिर दूसरों की मदद नहीं करता। अब सभी लोग उस शेर से दूरी बनाकर रहने लगे।

ऐसे मे वह जंगल मे अकेला पड़ गया और फिर वह जंगल में दोस्तों की तलाश में घूमते-घूमते बहुत समय बीत गया, लेकिन उस शेर से दोस्ती करने को कोई नहीं मिला।

ऐसे समय बीतता जा रहा था की एक दिन जब वह शेर अपनी गुफ़ा में जा रहा था, तो उसने देखा कि एक बूढ़ा बंदर भी उसकी गुफ़ा के पास एक पेड़ के नीचे गुफा मे पर अपना घर बनाकर रह रहा था। उसके मन में हुआ कि इस बार बंदर से भी दोस्ती करके इसका फ़ायदा उठाने में बड़ा मज़ा आएगा।

फिर रोज़ शेर यही सोचता था कि किसी तरह उस बंदर से बात हो जाए, दो-तीन दिन बीत गए, लेकिन उसे बंदर से बात करने का कोई बहाना नहीं मिला। एक दिन उसने देखा कि बंदर तो बूढ़ा है। उसके मन में हुआ कि यह बूढ़ा बंदर मेरे क्या काम आएगा। इससे दोस्ती करने का कोई फ़ायदा नहीं है।

फिर एक दिन शेर ने बंदर को चिड़िया से बात करते हुए सुना। चिड़िया बंदर से पूछ रही थी, “आप इतने बूढ़े हो गए हो तो अपने लिए खाना कैसे जुटाते हो?”

बंदर ने चिड़िया को बताया, “पहले तो मैं दूर दूर तक जाकर पेड़ो से फलो को तोड़कर खा लेता था, लेकिन अब मैं ऐसा नहीं कर पाता। इसका मतलब यह नहीं है कि मैं भूखा रहता हूँ। मैं अब इस पास के पेड़ से थोड़ा बहुत शहद खाता हूँ। उसका स्वाद बहुत अच्छा है। इसके लिए कभी कभी मुझे अंदर घने जंगल में जाना भी पड़ता है है और मधुमक्खियों से शहद लेकर आना पड़ता है।”

यह सारी बातें सुनने के बाद शेर के मन में हुआ कि मैंने भी कभी शहद नहीं चखा है। अब इस बंदर से दोस्ती करके मैं शहद का स्वाद चख सकता हूँ।

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इसी सोच के साथ शेर ने उस बंदर से बात करने की एक योजना बनाई। फिर वह शेर अपनी योजना पर अमल करते हुए शेर बंदर के पास गया और कहने लगा, “आपने मुझे पहचाना, मै आपका दोस्त? जब आप जवान थे, तो जब मुझे कोई शिकार नहीं मिला था, तो आपने मुझे बहुत जोरों से भूख लगने पर कुछ मछलियाँ तालाब से निकाल कर खिलाई थीं। आपने मेरी इस तरह बहुत बार मदद की है। जब भी ऐसी कोई मुसीबत आती थी तो हर बार आप ही मेरा मदद करते थे,”

बंदर काफी बूढ़ा हो चुका था, जिस कारण से उसे कुछ भी याद नहीं आ रहा था। उसने सोचा कि हो सकता है की इतने सालों पुरानी बात है, हो सकता है कि कभी इसकी मैंने मदद की हो। बंदर सोच ही रहा था कि तब तक शेर ने कहा, “अच्छा, मैं चलता हूँ। कभी कोई ज़रूरत हो, तो मुझे याद करना।” इतना कहकर शेर अपनी गुफ़ा की ओर चला गया।

बंदर भी अपने घर चला गया, लेकिन उसके दिमाग में शेर की बातें घूम रही थीं। उसने सोचा, चलो! कोई तो है, जिससे बातें कर सकता हूँ।

अगले दिन शेर ने बंदर से बातचीत शुरू करी। इसी तरह शेर धीरे-धीरे बंदर से दोस्ती करने लगा। एक दिन शेर ने बंदर को अपने घर खाने पर बुलाया।

इधर, बंदर खाने का निमंत्रण मिलने से बड़ा खुश था। उधर, शेर ने सोच लिया था कि किसी तरह से वो बंदर को रात को खाना खाने नहीं देगा। इससे उसकी मेरे सामने बेइज्जती होगी, उसके मन में यह प्लान था कि मैं अपना खाना किसी को क्यों खाने दूँ। मैं एक ही थाली में खाना लगाऊँगा और उसे जल्दी ख़त्म कर दूंगा।

रात के समय जब बंदर आया, तो शेर ने ऐसा ही किया। वो एक थाली में खाना लेकर आया। दोनों साथ में खाने के लिए बैठे। बंदर बूढ़ा था, तो वो आराम से खाना शुरू करने लगा। तभी शेर ने तेज़ी से खाना शुरू किया और कुछ ही समय में खाना ख़त्म कर दिया। बंदर बहुत निराश हुआ। शेर ने कहा, “दोस्त, मैं ऐसे ही खाना खाता हूँ।”

दुखी मन से बंदर वापस अपने घर आ गया। अगले दिन चिड़िया ने बंदर से पूछा, “क्या हुआ, तुम इतने दुखी क्यों हो?”

बंदर ने रात को शेर के घर में हुई सारी बातें बता दीं। चिड़िया ने हँसते हुए पूछा, “तुम्हें नहीं पता शेर कैसा है? वो हमेशा सबसे दोस्ती करता है और फिर उनका फ़ायदा उठाकर चला जाता है। वो कभी किसी की मदद नहीं करता। अब तुम्हें किसी तरकीब से उसे सबक सिखाना चाहिए।” इतना कहकर चिड़िया वहाँ से उड़ गई।

बूढ़े बंदर ने भी ठान ली कि वो अब शेर को सबक ज़रूर सिखाएगा। इसी सोच के साथ बंदर एक बार फिर शेर की गुफ़ा में गया। उसने बिल्कुल सामान्य तरीके से उससे बात की। उसने शेर को लगने ही नहीं दिया कि उसे रात की बात का बुरा लगा है।

दोनों बातें करने लगे। बातों-ही-बातों में शेर ने बंदर से पूछा, “दोस्त तुम अपना रोज़ का खाना कहा से लाते हो?”

बंदर ने शेर को शहद के बारे में बता दिया। शेर ने शहद का नाम सुनते ही कहा, “दोस्त, तुमने तो आजतक मुझे शहद भी नही खिलाया”

यह बात सुनते ही बंदर के मन में हुआ कि अब शेर को सबक सिखाने का मौका मिल गया है। उसने कहा, “तुम्हें शहद खाना है? बस इतनी सी बात। दोस्त होने के नाते तो मै तुम्हें शहद तो खिला ही सकता हु, तुम आज रात को मेरे घर खाने पर आ जाना। मैं तुम्हें शहद खिला दूँगा।”

शेर बड़ा खुश हुआ। वो रात होने का बेताबी से इंतज़ार करने लगा। रात होते ही शेर तेज़ी से बंदर की गुफ़ा की तरफ बढ़ा।

शेर के आते ही बंदर ने उसका स्वागत किया और बैठने के लिए कहा। उसके बाद बंदर ने अपने घर का दरवाज़ा बंद कर दिया।

शेर ने पूछा, “तुम दरवाज़ा क्यों बंद कर रहे हो?”

बंदर ने कहा, “अगर शहद की ख़ुशबू किसी और ने सूंघ ली, तो वो यहाँ आ जाएगा, इसलिए दरवाज़ा बंद करना ज़रूरी है।”

अब बंदर ने मधुमक्खी का एक छत्ता लाकर शेर के सामने रख दिया और कहा, “इसी के अंदर शहद है।”

जैसे ही उस भूखे शेर ने उसके अंदर मुँह डाला, तो उसे मधुमक्खियों ने काटना शुरू कर दिया। उसके पूरे चेहरे पर सूजन हो गई। मधुमक्खियों के काटने से पूरा शरीर फूल गया, शेर जिस ओर भी भागता, मधुमक्खियाँ उसका उधर पीछा करतीं।

आखिर में शेर ने बंदर से पूछा, “तुमने मुझे बताया क्यों नहीं कि शहद कैसे खाना है?”

बंदर ने तमतमाते हुए जवाब दिया, “मैं शहद ऐसे ही खाता हूँ।”

शेर समझ गया कि बंदर ने उससे बदला लिया है, किसी तरह से वह अपनी जान बचाकर वहा से भागकर अपनी जान बचाई।

कहानी से सीख

इस कहानी शेर और बंदर की कहानी – Sher Aur Bandar Ki Kahani से हमे यह सीख मिलती है कि अगर किसी के साथ बुरा व्यवहार करेगे, तो निश्चित ही हमारे साथ भी बुरा होंगा, इसलिए लोगो के साथ हमेसा मदद के काम आना चाहिए। क्यूकी जो जैसा करता है, उसे वैसा ही कर्मो का फल भी मिलता है

तो आपको यह कहानी जो होता है शेर और बंदर की कहानी – Sher Aur Bandar Ki Kahani कैसा लगा, कमेंट बॉक्स मे जरूर बताए और इस कहानी को भी शेयर जरूर करे।

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