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घमंडी बाज़ और चूहे की कहानी: जानिए कैसे एक छोटे से चूहे ने बड़े घमंडी बाज़ को हराया

Ghamandi Baaz Aur Chuhe Ki Kahani

घमंडी बाज़ और चूहे की कहानी

वो कहते है न हमे कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए, क्यूकी घमंड मे अच्छे और बुरे मे फर्क भी नजर नहीं आता है, क्यूकी जानते है, अंत मे घमंडी का सिर हमेसा सिर नीचे होता है, तो चलिये पोस्ट मे प्रेरणा देने वाली घमंडी बाज़ और चूहे की कहानी – Ghamandi Baaz Aur Chuhe Ki Hindi Kahani को जानते है, जिनसे हमे बड़ी सीख मिलती है,

घमंडी बाज़ और चूहे की हिन्दी कहानी

Ghamandi Baaz Aur Chuhe Ki Kahani

Ghamandi Baaz Aur Chuhe Ki Kahani एक बार की बात हैं एक बाज अपनी पत्नी के साथ जंगल के पास वाले पहाड़ों के चट्टानों पर बने गुफा मे रहता था तभी एक दिन बाज अपनी पत्नी से बोला क्यों न जंगल के बीच ही घोंसला बनाकर रहा जाये जंगल में रहेंगें तो शिकार के लिए ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ेगी क्योंकि जंगल में तो कई छोटे मोटे जानवर शिकार के लिए मिल ही जायेंगे। बाज की यह बात सुनकर उसकी पत्नी जंगल मे रहने को तैयार हो गयी फिर इसके बाद बाज के इस जोड़े नें जंगल के एक सबसे ऊँचे पेड़ पर अपना घोंसला तैयार करना शुरू कर दिया।

धीरे धीरे कुछ दिनो के रहने के बाद अब मौसम भी बदल चुका था तभी एक दिन बाज की पत्नी नें घोंसलें में अंडे दिए, जिससे बाजो का ये जोड़ा बहुत ही खुश था कि कुछ ही दिनों में उनके छोटे छोटे चूजे होंगें और वो उनके साथ एक साथ आसमान में उड़ेंगे। अब बाज अपनी पत्नी को अंडों के पास छोड़कर अकेले ही शिकार के लिए निकल जाता था और उसकी पत्नी घोंसलें में रहकर अंडों की देखभाल करती थीं,

एक दिन की बात है, जैसे ही वह बाज शिकार के लिए निकला तो उसनें अपनें घोंसलें वालें पेड़ के ठीक नीचें ही एक चूहें को देखा। फिर उसी समय बाज नें एक ही झटके में उस चूहें को अपने पंजो में दबोज लिया तभी चूहा अपनीं मौत को सामने देख कर घबरा गया और बोला बाज “भाई आप तो पक्षियों के राजा हैं मुझ पर दया करों, मेरे जैसे छोटे चूहें को खा कर आप की भूख शांत नहीं होगी अगर आप मेरी जान को छोड़ दो तो मैं आपको एक ऐसी बात बता सकता हूँ जो आपके और आपके परिवार के बहुत काम आएगी”

चूहें की ये बात सुनकर बाज रुक गया और हसते हुए बोला कि “ठीक है बताओ तुम क्या कहना चाहतें हों”

तब चूहें नें बोलना शुरू किया बाज “भाई मैं जानता हूँ कि आप इस पेड़ के ऊपर घोंसला बनाकर अपनें परिवार के साथ बहुत खुशी से रहतें हों और मैं भी इस पेड़ के नीचे बिल बनाकर रहता हूँ। तो बात यह हैं कि इस पेड़ की जड़े बिल्कुल खोखली हो चुकीं हैं और इन जड़ो की पकड़ जमीन पर बहुत कमजोर हो गयी है इसलिए यह पेड़ किसी भी समय गिर सकता हैं तो बाज भाई आप इस पेड़ को छोड़कर अपनें परिवार के साथ कहीं और घोंसला बना लीजिए वरना ये पेड़ कभी भी गिर गया तो इससे आपके परिवार को बहुत ही भारी नुकसान हो सकता हैं,”

तभी बाज नें गुस्से में कहा कि “तुम सिर्फ अपनी जान बचानें के लिए ऐसा कह रहे हों मैं पक्षियों का राजा भला तुम जैसे छोटे मोटे जानवर की बात पर विश्वास क्यों करूँ मैं इतना ताकतवर हूँ कि अगर मेरे परिवार पर कोई मुसीबत आ भी जाये तो मैं अकेला ही उसे संभाल लूँगा लेकिन हाँ तुम्हारी एक बात सही हैं कि तुम जैसे छोटे जानवर को खा कर मेरा जरा भी पेट नहीं भरेगा इसलिए मैं तुम्हें छोड़ रहा हूँ,”

चूहा जानता था कि ये पेड़ कभी भी गिर सकता हैं इसलिए वह ये चाहता था कि बाज अपना घोंसला छोड़ दे लेकिन बाज अपनें घमंड के कारण चूहें की बात को अनसुनी कर देता हैं लेकिन चूहें का मन ये सोच कर बहुत खुश था कि बाज नें उसे जिंदा छोड़ दिया था और उसे एक नई जिंदगी दी हैं। यह बाज का उस पर एक अहसान था,

तभी एक दिन की बात है जैसे ही बाज शिकार करनें के लिए घोंसलें से निकल पड़ा वैसे ही पीछे से एक बड़ा नेवला पेड़ पर चढ़ गया और वह नेवला बाज के घोंसलें तक पहुँच गया और अपने दाँतो से बाज की पत्नी को डराने लगा।

शायद उसकी इच्छा बाज के अंडों को खानें की थीं। बाज की पत्नी नें भी वापस उस नेवले पर हमला किया मगर बाज की पत्नी नेवले की इस हरकत से वह बहुत घबरा गयी तो जैसे ही बाज वापस अपने घोंसलें पर आया तब उसकी पत्नी नें उसे सारी बात बताई और कहा “मुझें डर हैं कि वह नेवला फिर से हमारे अंडों पर हमला करेगा इसलिए हमें जल्दी ही यह पेड़ छोड़ देना चाहिए क्योकि मैं अपनें बच्चों से बहुत प्यार करतीं हूँ।“

तभी बाज को भी लगा कि उसके अंडों को नेवला धोखे से खा सकता हैं इसलिए तुरंत बाज और उसकी पत्नी मिलकर दोनों नें ही उस पेड़ से कुछ ही दूर पर अपना घोंसला बनाना शुरू कर दिया और जैसे ही उन्होंने दूसरा घोंसला बना लिया वैसे ही अपनें अंडों को पंजे में दबाकर वह दूसरे घोंसलें में ले गए।

अब बाज और उसकी पत्नी दूसरें घोंसले में आराम से रहनें लगें। अभी उन्हें दूसरें घोंसलें में पहुँचे हुए एक दिन ही निकला था कि बरसात के मौसम के होने की वजह से शाम के समय तेज हवा चलने लगी। तभी उन्होनें देखा कि जिस पेड़ पर वह पहलें रहतें थें वह हवा की मार को नहीं झेल पाया और धड़ाम से जमीन पर बड़ी ही तेजी से गिर गया। वो पेड़ अपनीं जड़ो के साथ ही पूरी तरह उखड़ चुका था। तभी बाज को अचानक ही उस चूहें की कहीं बात याद आयी कि चूहें नें कहा था कि वह पेड़ जड़ो से बहुत कमजोर हैं और कभी भी गिर सकता हैं लेकिन अब तो वो बाज अपना घोंसला बदल चुका था इसलिए बाज और उसका पूरा परिवार सुरक्षित था।

तभी अगलें दिन सुबह वह चूहा बाज के नए घोंसलें के नीचें पहुँचा और उसनें बाज को आवाज लगाई और कहा “क्यों बाज भाई तुम्हारा पूरा परिवार अब सुरक्षित हैं न?”

 चूहें के साथ वह नेवला भी था। चूहें और नेवले को एक साथ देखकर वह बाज सोच में पड़ गया। तब चूहें नें बोलना शुरू किया “हैरान मत हो पक्षियों के राजा बाज भाई यह नेवला मेरा दोस्त हैं और इसनें मेरी दोस्ती की खातिर ही तुम्हारें घोंसलें पर हमला किया था और अपनी जान को जोखिम में भी डाला। यह सब मेरा प्लान था ताकि मैं तुम्हारी और तुम्हारें परिवार की जान बचा सकूँ। इसे मैंने ही भेजा था नेवले को तुम्हारें घोंसलें पर हमला करने के लिए और वह भी ठीक उसी समय जब तुम घोंसलें पर नहीं थें क्योंकि मैं जानता था कि उस समय तुम्हारी पत्नी अकेली होगी और वह नेवले से डर कर तुमसें घोंसला बदलनें को जरूर कहेगी और हमारा मकसद भी यही था कि तुम अपनें परिवार को कहीं और लेकर चले जाओ ताकि तुम्हारें बच्चें सुरक्षित रहें।”

तभी यह सब सुनकर बाज बड़ी ही शर्मिंदगी महसूस कर रहा था कि उसने चूहें कि बात नहीं मानी और इस तरह चूहे ने अपने जान बचाने के बदले उनकी भलाई कर चुका था, और अपने जान का अहसान उतार चुका था, इस तरह अब उस बाज का घमंड भी चूर चूर हो चुका था। तभी उसनें चूहें को धन्यवाद कहा।

कहानी से शिक्षा

आज की कहानी – घमंडी बाज़ और चूहे की कहानी Ghamandi Baaz Aur Chuhe Ki Hindi Kahani हमें यह सिखाती हैं कि हम चाहें कितनें भी काबिल कितने भी होशियार या कितनें भी ताकतवर ही क्यों न हों जाये लेकिन हमें कभी भी अपनें आप पर घमंड नहीं करना चाहिए और कभी भी किसी को छोटा या मामूली समझ कर उसे कमजोर भी नहीं समझना चाहिए।

तो आपको यह कहानी जो होता है घमंडी बाज़ और चूहे की कहानी Ghamandi Baaz Aur Chuhe Ki Hindi Kahani कैसा लगा, कमेंट बॉक्स मे जरूर बताए और इस कहानी को भी शेयर जरूर करे।

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