{Latest 2020} दिवाली पर निबंध Diwali Essay in Hindi

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दिवाली जो की हमारे भारत देश में मनाया जाने वाला सबसे बडा़ त्यौहार है। यह त्योहार भगवान श्रीराम के 14 वर्षो के वनवास के पश्चात अयोध्या मे वापस लौटने की खुशी मे पूरे अयोध्या मे घर घर, गली मुहल्ले, हर जगह दीये जलाए गए थे, जिससे पूरा अयोध्या स्वर्ग के समान जगमगाने लगा था, इस तरह हर साल दीये इस शुभ दिन दीये जलाया जाने लगा, जिसे हम सभी दिवाली के त्योहार के रूप मे मनाते है।

दिवाली को पूरे भारत में खूब धूमधाम से मनाया जाता है, यहा तक कि दिवाली सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि भारत के बाहर रहने वाले विदेशो मे भी भारतीय और अन्य धर्म के लोग भी बहुत धूम धाम से मनाते हैं,

आज हम आपको अपने इस आर्टिकल में बताने वाले कि दिवाली 2020 पर हिन्दी निबंध, Diwali Essay in Hindi, Happy Diwali in Hindi, Diwali 2020, Deepawali Essay, दीपावली का अर्थ क्या है, दिवाली पर निबंध, दिवाली का त्यौहार कैसा होता है, दिवाली का महत्व क्या है, दीपावली क्यों मनाते है, दीपावली मनाने का कारण क्या है, आदि के बारे मे विस्तार से जानेगे, जिसे आप इस दिवाली के अवसर पर इस दिवाली के हिन्दी निबंध को लिख सकते है, और लोगो के साथ शेयर कर सकते है।

वैसे तो दिवाली के इस शुभ अवसर के लिए स्कूल के हर कक्षा के छात्र, कॉलेजों के छात्र दिवाली पर निबंध खोजते हैं, और दिवाली पर निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 के छत्रों को लिखने को दिया जाता है, स्कूलो में, कॉलेजों में और अन्य जगह भी दिवाली त्यौहार पर दिवाली पर निबंध लिखने को लेकर कॉम्पटीशन भी होता है,

और जिसमें बहुत सारे लोग दीपावली का निबंध हिंदी (Diwali Essay in Hindi) में खोजते हैं। तो इस दिवाली पर निबंध, शॉर्ट निबंध, दिवाली पर निबंध 200 Words, 300 Words 400 Words, 500 Words, Short Diwali Essay, Long Deepavali Essay, दिवाली पर निबंध 10 लाइनें की निबंध, दिवाली एस्से जानकारी प्राप्त करने के लिए आप इस आर्टिकल को पूरा पढ़ सकते हैं,

दिवाली पर निबंध

Diwali Essay in Hindi

Diwali Essay in Hindi image photo picture wallpaperदिवाली का त्यौहार हर किसी के लिए खुशियां लेकर आता है, फिर चाहे वो बड़ा हो या बच्चा। हर कोई इस त्यौहार को बड़ी ही धूम धाम से मनाता है। साथ ही स्कूलों, कॉलेजों, दफ्तरों आदि में भी दीवाली का त्यौहार बहुत ही उल्लास के साथ मनाया है, दीपावली का ये त्यौहार साल में एक बार आता है जो कि अक्टूबर या नवम्बर की माह में होता है, दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है,

दीवाली के कुछ हफ्ते पहले से ही लोग आते ही लोग अपने घर की साफ-सफाई भी करते है। फिर दिवाली के दिन नए कपड़े पहनते है, मिठाई खाते हैं, दीप जलाते है, पटाखे जलाते हैं, लक्ष्मी-गणेश भगवान की पूजा करते हैं, और एक दूसरे को दिवाली की मिठाई बांटते है, और एक दूसरे को दिवाली की शुभकामना देते है, और मिलजुलकर इस तरह दिवाली का त्योहार मनाते है।

तो ऐसे मे दीवाली के त्यौहार के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए आप नीचे दिए गए दिवाली निबंध को पढ़ सकते हैं,

दीपावली पर निबंध 200 शब्दों

Essay on Diwali in Hindi Language with 200 Words

वैसे तो हिन्दू धर्म मे अनेक त्योहार मनाए जाते है, त्योहारों में दीपावली का त्यौहार सबसे ज्यादा आकर्षित त्यौहार है। दीपावली का त्यौहार हिन्दू धर्म के लोगों के लिए बहुत ही बड़ा त्यौहार है। ठंड की शुरुआत में ही दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है.

दीपावली हिन्दी महीने के कार्तिक मास अमावस्या को मनाया जाता है जो अँग्रेजी कैलेंडर के अनुसार अक्टूबर या नवंबर महीने में पड़ता है, इस साल 2020 मे दिवाली 14 नवंबर शनिवार के दिन पड़ रहा है, जो की दीपावली का त्यौहार भगवान श्री राम जी के चौदह वर्ष वनवास काटने के बाद अपने घर अयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाता है.

दीपावली के दिन अयोध्या के लोगो ने घी के दीपक जलाये थे, और पूरी अयोध्या को दीपो से सजाया गया था, जिसके कारण आज भी अयोध्या में दीपावली का त्यौहार घी के दिये जला कर सम्पूर्ण अयोध्या को रोशनी से प्रकाशित किया जाता है, इस तरह दिवाली के दिन अयोध्या की सुंदरता देखने बनती है और इस तरह आज भी अयोध्या में दीपावली सबसे ज्यादा खुशियो के साथ मनाया जाता है.

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दीपावली की खुशी में घी, सरसों का तेल आदि से घरों में दिये जलाते है और घरों की शोभा बढ़ाते हैं साथ में घरों को विभिन्न चीजों आदि से सजाते हैं. और आजकल तो बिजली के रंगीन बल्ब, झालर, तरह तरह के रंगबिरंगी लड़िया से घर की दीवारों पर लगाए जाते है, हर तरफ प्रकाश से पूरा घर गाँव, मुहल्ले, शहर सभी भर जाते है।

और धीरे धीरे अब तो लोग दीपावली के दिन पटाखों का इस्तेमाल भी करने लगे है, दीपावली का अर्थ होता है दीपों की आवली अर्थात दीपों की पंक्तियां और ढेर सारी दीपों की पंक्तियों को दीपावली कहा जाता है.

समय के बदलाव के अनुसार लोग अपने घरों में बिजली की रोशनी वाली लड़ियाँ लगाने लगे हैं लेकिन जो सजावट मिट्टी के दिये से होती है वो की अन्य से नहीं मिल सकती है. और आजकल तो इन दीयो की जगह कृतिम लाइट, बिजली के बल्ब ने जगह ले लिया है।

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ऐसा भी कहा जाता है कि दीपावली के दिन साफ सफाई रखने से लक्ष्मी का वास होता है। इसीलिए दीपावली के दिन धन की देवी लक्ष्मी माँ और गणेश जी की पूजा होती है. और माँ लक्ष्मी जी के आशीर्वाद से घर मे सुख शांति और वैभव प्राप्त होते है, इसलिए दिवाली के दिन माँ लक्ष्मी और गणेश जी विशेष अर्चना किया जाता है।

दीपावली का निबंध (Diwali Essay 400-500 Words)

दिवाली के इस विशेष त्योहार के लिए हिंदू धर्म के लोग बहुत उत्सुकता से इंतजार करते हैं, दीपावली का बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए हर किसी का सबसे महत्वपूर्ण और पसंदीदा त्यौहार है, दीवाली भारत का सबसे महत्वपूर्ण और मशहूर और प्रसिद्ध त्यौहार है, जो की पूरे देश में साथ-साथ हर साल मनाया जाता है,

लंका मे असुरो के राजा रावण को पराजित करने के बाद, 14 साल के वनवास के लंबे समय के बाद भगवान राम अपने राज्य अयोध्या में लौटे थे, ठीक उसी रात को पूरे अयोध्या मे अपने भगवान श्रीराम जी के आगमन की खुशी मे दिये जलाए गए थे, लोग आज भी इस दिन को बहुत उत्साहजनक तरीके से मनाते हैं। जिसे हम सभी दिवाली के त्योहार के नाम से जानते है।

भगवान राम के लौटने वाले दिन, अयोध्या के लोगों ने अपने घरों और मार्गों को बड़े उत्साह के साथ अपने भगवान का स्वागत करने के लिए प्रकाशित किया था। यह एक पवित्र हिंदू त्यौहार है जो की बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, और इसी दिन सिखों द्वारा भी मुगल सम्राट जहांगीर द्वारा ग्वालियर जेल से अपने 6 वें गुरु, श्री हरगोबिंद जी की रिहाई मनाने के लिए मनाया जाता है।

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लोग अपने घरों को साफ करते हैं और त्योहार के कुछ दिन पहले रोशनी से सजाते हैं। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार दिवाली के दिन सूर्यास्त के बाद लोग देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं, वे अधिक आशीर्वाद, स्वास्थ्य, धन और उज्जवल भविष्य पाने के लिए भगवान और देवी से प्रार्थना करते हैं। दिवाली के त्योहार की ऐसी मान्यता है की इस दिन माँ लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करने से प्रसन्न होते है, और उनका आशीर्वाद मिलता है, जिससे घर मे सुख समृद्धि और शांति के साथ धा वैभव का आशीर्वाद मिलता है।

इस दिन बाजारों को एक दुल्हन की तरह रोशनी से सजाया जाता है ताकि वह इससे एक अद्भुत त्यौहार दिख सके। इस दिन बाजार पूरी तरह से भीड़-भाड़ से भरा होता है, दिवाली के दिन विशेष रूप से मिठाई की दुकानें सजाई जाती है, और साथ ही बच्चों को बाजार से नए कपड़े, पटाखे, मिठाई, उपहार, मोमबत्तियां और खिलौने मिलते हैं।

दिवाली का त्योहार कुल 5 दिनो के लिए मनाया जाता है, जो की दिवाली के दो दिन फले से दिवाली के दो दिन बाद तक रहता है, जिसे हर दिन अलग अलग नामो से दिवाली के इस त्योहार को मनाया जाता है, दिवाली त्यौहार के इन सभी पांच दिनों में खाद्य पदार्थों और मिठाई के स्वादिष्ट व्यंजन बनाते हैं, लोग इस दिन पासा, कार्ड गेम और कई अन्य प्रकार के खेल खेलते हैं। वे अच्छी गतिविधियों के करीब आते हैं और बुरी आदतों को दूर करते हैं।

दिवाली के पहले दिन धनतेरस या धन्त्ररावदाशी के रूप में जाना जाता है जिसे देवी लक्ष्मी की पूजा करके मनाया जाता है। लोग देवी को खुश करने के लिए आरती, भक्ति गीत और मंत्र गाते हैं, दूसरे दिन नरका चतुर्दशी या छोटी दिवाली के रूप में जाना जाता है जिसे भगवान कृष्ण की पूजा करके मनाया जाता है क्योंकि उन्होंने राक्षस राजा नारकसुर को मार डाला था.

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तीसरे दिन मुख्य दिवाली के रूप में जाना जाता है दिवाली की शाम को चरो तरफ दिये जलाए जाते है, और फिर शाम को रिश्तेदारों, दोस्तों, पड़ोसियों और जलती हुई फायर क्रैकर्स के बीच मिठाई और उपहार वितरित करते हुए देवी लक्ष्मी की पूजा करके मनाया जाता है,

दिवाली के चौथे दिन भगवान कृष्ण की पूजा करके गोवर्धन पूजा के रूप में जाना जाता है, जो लोग अपने दरवाजे पर पूजा करके गोबर के गोवर्धन बनाते हैं।

और पांचवें दिन यम द्वितिया या भाई दूज के रूप में जाना जाता है जिसे भाइयों और बहनों द्वारा मनाया जाता है। बहनों ने अपने भाइयों को भैयादूज के त्यौहार का जश्न मनाने के लिए आमंत्रित करती हैं।

दिवाली पर निबंध

Diwali Essay in Hindi 2020 Long Essay on Diwali in Hindi Languages

दिवाली भारत के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है, जो की यह त्यौहार पूरे भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, यहां हम दिवाली पर विस्तृत निबंध लेकर आए हैं जिनसे आपको यह पता चलेगा की हम सभी दिवाली क्यों मनाते हैं? और साथ दीपावली (का अर्थ) मनाने का कारण, दिवाली का महत्व? आदि इन सभी बातों का विस्तार से पता चल सकेगा, और साथ साथ स्कूल, कॉलेजों के छात्र भी यहां से अपनी आवश्यकता के अनुसार दीपावली पर हिन्दी निबंध Happy Diwali Essay in Hindi 2020 लिख सकते हैं.

प्राय स्कूल और कॉलेजों के छात्र दिवाली पर निबंध खोजते हैं क्योंकि दिवाली के त्यौहार पर दिवाली पर निबंध लेखन प्रतियोगिता होती है इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाला हर छात्र अच्छा निबंध लिखने की कोशिश करता है, ऐसे मे यदि आपको भी इस दिवाली निबंध लिखना है तो इस आर्टिकल में दिए गए दिवाली पर हिंदी निबंध आपके लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। तो चलिये इस दिवाली पर हिन्दी निबंध | Diwali Essay in Hindi को विस्तार से जानते है।

दिपावली का विस्तृत निबंध

Long Essay on Diwali 2020 in Hindi Languages

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दिपावली का त्यौहार भारत में और अन्य कई देशों में बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है। दीपावली को दीप का त्यौहार भी कहा जाता है। दिवाली का त्यौहार भारत के प्रमुख त्यौहारों में से एक है। जिसे भारत में बहुत ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान श्री राम ने रावण को पराजित करके और अपना 14 साल का वनवास काटकर अयोध्या लौटे थे। श्री राम भगवान की आने की खुशी वहां के सभी लोगों ने दिये जलाए थे।

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तब से लेकर अब तक हर वर्ष इस दिन को दीवाली के त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। लोग आज भी इस दिन को उतने की खुशी से मनाते हैं। ये त्यौहार बच्चा, बूढें, बड़े हर कोई बहुत ही अच्छे से मनाता है। यहां तक कि स्कूल, कॉलेज और दफ्तरों में भी दीवाली को त्यौहार को बहुत धूम धाम से मनाया जाता है। इन दिन लोग एक दूसरे को दीवाली की बधाई देते हैं और बहुत से उपहार भी तोहफे के रूप में देते हैं।

दिवाली का त्यौहार हर साल अक्टूबर या नवम्बर माह में मनाया जाता है। दीवाली आने से कुछ दिन पहले ही लोग इस त्यौहार को मनाने की तैयारी में लग जाते हैं। दीवाली के दिन लोग अपनी दुकानें, अपना घर, स्कूल, दफ्तर आदि को दुल्हन की तरह सजाते हैं। सभी लोग नए कपड़े खरीदते हैं, इस दिन घर और दुकानों की भी अच्छे से सफाई की जाती है।

दीवाली की रात पूरा भारत जगमगाता है। रंग बिरंगी लाइटें, दिए, मोमबत्ती आदि से पूरे भारत को सजाया जाता है। दीवाली की शाम भगवान लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा की जाती है। पूजा करने के बाद सभी लोग अपने पड़ोसियों और अपने रिश्तेदारों को प्रसाद, मिठाई, गिफ्ट आदि देते हैं। इस दिन लोग पटाखे, बम, फुलजड़ी आदि भी जलाते हैं। दीवाली के त्यौहार को बुरे पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी माना जाता है। भारत की नहीं बल्कि और भी कई देशों में दीवाली का त्यौहार बहुत की धूम धाम से मनाया जाता है।

दिवाली की प्रचलित कथा

The most popular story of Diwali in Hindi

दिवाली मनाए जाने वाले कारणों में सबसे प्रचलित कहानी त्रेता युग में प्रभु राम के रावण का वध कर चौदह वर्ष पश्चात माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटने के उपलक्ष्य में पूरी अयोध्या नगरी को फूलों और दीपों से सजाया गया। तब से हर साल कार्तिक अमावस्या को दिवाली मनाया जाने लगा।

दिवाली कब मनाई जाती है

When is Diwali celebrated information in Hindi

उत्तरी गोलार्द्ध में शरद ऋतु के कार्तिक माह की पूर्णिमा को यह दिपोत्सव धूम-धाम से मनाया जाता है। अँग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह त्योहार अक्टूबर या नवम्बर माह में मनाया जाता है। और 2020 मे दिवाली का त्योहार 14 नवंबर शनिवार के दिन पड़ रहा है।

दीवाली का महत्व

Importance of Diwali in Hindi

दिवाली की तैयारी के वजह से घर तथा घर के आस-पास के स्थानों की विशेष सफाई संभव हो पाती है। साथ ही दिवाली का त्योहार हमें हमारे परंपरा से जोड़ता है, हमारे आराध्य के पराक्रम का बोध कराता है। इस बात का भी ज्ञान कराता है कि, अंत में विजय सदैव सच और अच्छाई की होती है। जिस कारण दिवाली के त्योहार को बुराई पर अच्छाई की जीत का त्योहार भी कहा जाता है।

दीवाली की विशेष तैयारी और सजावट

Special preparation and decoration for Diwali in Hindi

दिवाली की तैयारी घरों में हफ्तों पहले से शुरु कर दी जाती है। घर, मकानों को पेंट किया जाता है, घर मे पड़ी सभी बेकार की वस्तुओं को फेक दिया जाता है, और घर के कोने-कोने की सफाई की जाती है, इस तरह दिवाली के लिए घर को एकदम नया दुल्हन की तरह सजाया जाता है, जो दिवाली का यह त्योहार स्वच्छता का त्योहार है।

Diwali Decoration कैसे करे | दीपावली में सजावट कैसे करे

दिवाली कैसे मनाते हैं

How to celebrate Diwali in Hindi

दिवाली पर सभी अपने घरों को विभिन्न साज-सज्जा की सामग्री से सजाते हैं, लोग अपने-अपने घरों को अनेक दीपकों की सहायता से रौशन करते हैं, लक्ष्मी पूजन करते हैं और पटाखे, फुलझड़ी जलाते हैं। महिलाओं द्वारा घर के आंगन में रंगोली बनायी जाती है, दिवाली के शाम में लोग एक-दूसरे के घर सूखे मेवे और मिठाइयां लेकर उनसे मिलने जाते हैं. और एक दूसरे को लोग दिवाली बधाई और शुभकामना देते है।

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दीवाली पर लक्ष्मी पूजन करने की परंपरा एवं पूजा का महत्व

The importance of worshiping tradition and worship of Lakshmi on Diwali

Deepawali imgaes photo wallpaper downloadदिवाली के संध्या में अपने घर के पूर्व दिशा में धन की देवी माँ लक्ष्मी तथा भगवान गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर विधिवत पूजा, अर्चना, पाठ करने से सभी परेशानियां दूर होती हैं। व्यक्ति को धन और यश की प्रात्ति होती है, इस तरह दिवाली के दिन माँ लक्ष्मी तथा भगवान गणेश जी की विशेष पूजा अर्चना किया जाता है। और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।

दिवाली 5 दिनो का त्योहार – Diwali 5 days festival in Hindi

दीपावली से जुड़े अन्य पांच पर्व इसे पर्वों की श्रृंखला का रूप देता है। इसकी शुरुआत कार्तिक त्रियोदश के धनतेरस से होती है। उसके अगले दिन नरक चतुर्दशी अर्थात छोटी दिपावली तत्पश्चात लक्ष्मी पूजन (दीपावली), दिपावली की दूसरी सुबह गोवर्धन पूजा और अंत में यम द्वितीय या भाई दूज मनाते हैं।

छोटी दीपावली – Chhoti Diwali in Hindi

दीपावली के एक दिन पूर्व छोटी दीपावली मनाते है। इस दिन आयु के देवता यमराज की पूजा की जाती है। एक दिपक जला कर उसे घर से दूर कहीं रख दिया जाता है। छोटी दिपावली को नरक चतुर्दशी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है इस दिन यमराज की पूजा करने पर अकाल मृत्यु भी टल जाता है।

Chhoti Diwali Status | Happy Chhoti Deepavali 2020 Best Status

धनतेरस का महत्व – Importance of Dhanteras in Hindi

समुद्र मंथन के समय कार्तिक मास के त्रियोदश तिथी को भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इस वजह से कार्तिक के तेरहवें दिन धनतेरस की परंपरा निभाई जाती है। इस दिवस पर लोग बहुत अधिक खरीदारी करते हैं। नयी गाड़ी, विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक मशीन, सोना, चांदी, बरतन, कपड़े, आदि। इस दिवस पर समान खरीद कर उसकी पूजा करना शुभ माना जाता है।

दीपावली के समय पर बाजार दुल्हन के तरह सजा मिलता है। सड़के रंग-बिरंगी छोटी-छोटी बल्ब वाले लाइट से रौशन होता है। दुकानों में विभिन्न प्रकार के पटाखे, मिठाई, बरतन आदि बिक रहें होते हैं। आभूषण व इलेक्ट्रॉनिक्स के दुकानों पर विशेष भीड़ देखी जाती है।

भारत के विभिन्न स्थान पर दिवाली मनाने की वजह

Reason for celebrating Diwali at different places in India details in Hindi

भारत के विभिन्न राज्यों में दिवाली मनाने की अलग-अगल वजह है। उन में से कुछ प्रमुख निम्नवत् हैं-

भारत के पूर्वी भाग में स्थित उड़ीसा, बंगाल इस दिन माता शक्ति को, महाकाली का रूप धारण करने के वजह से मनाते हैं। और लक्ष्मी के स्थान पर काली की उपासना करते हैं।

भारत के उत्तरी भाग में स्थित पंजाब के लिए दिवाली बहुत महत्व रखता है क्योंकि 1577 में इसी दिवस पर अमृतसर में स्वर्ण मंदिर की नींव रखी गई थी। और इसी दिन पर सिक्खों के गुरु हरगोबिंद सिंह को जेल से रिहा किया गया था।

भारत के दक्षिण भाग में स्थित राज्य जैसे तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, आदि दिवाली पर, द्वापर में कृष्ण द्वारा नरकासुर के वध के खुशी में कृष्ण की पूजा करके मनाते हैं।

विदेश में दिवाली का स्वरूप

नेपाल – भारत के अलांवा भारत के पड़ोसी देश नेपाल में दिपावली का त्योहार धूम-धाम से मनाया जाता है। इस दिवस पर नेपाली कुत्तों को सम्मानित करते हुए उनकी पूजा करते हैं। इसके अलांवा वह संध्याकाल में दीपक जलाते हैं तथा एक-दूसरे से मिलने उनके घर जाते हैं।

मलेशिया – मलेशिया में हिंदुओं की संख्या ज्यादा होने के वजह से इस दिन पर सरकारी अवकाश दिया जाता है। लोग अपने घरों में पार्टी आयोजित करते हैं। जिसमें अन्य हिंदू व मलेशियाई नागरिक सम्मिलित होते हैं।

श्रीलंका – इस द्वीप में रह रहे लोग दिवाली के सुबह उठ कर तेल से स्नान करते हैं और पूजा के लिए मंदिर जाते हैं। इसके अतिरिक्त यहां दिवाली के मौके पर खेल, आतिशबाजी, गायन, नृत्य, भोज आदि आयोजित किया जाता है।

इन सब के अतिरिक्त अमेरिका, न्यूजीलैंड, मॉरिशस, सिंगापुर, रीयूनियन, फिजी में बसे हिंदुओं द्वारा यह पर्व मनाया जाता है।

दीवाली पर ध्यान रखने योग्य बातें

Things to keep in mind on Diwali

विशेषकर लोग दीपावली पर पटाखे जलाते हैं, यह पटाखे अत्यधिक खतरनाक होते हैं। मस्ती में होने के वजह से अनचाही दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है। अतः त्योहार के धूम-धाम में व्यक्ति को सुरक्षा का भी पूर्ण खयाल रखना चाहिए।

दीवाली पर अभद्र व्यवहार न करें

कई लोगों का मानना है, दिपावली के अवसर पर जुआ खेलने से घर में धन की बाढ़ आ जाती है। इस कारणवश अनेक लोग इस अवसर पर जुआ खेलते हैं। यह उचित व्यवहार नहीं है।

दीवाली पर अत्यधिक पटाखो का जलाया जाना

पटाखों के आवाज से अनेक बेजुबान जानवर बहुत अधिक डरते हैं। इसके अलांवा बड़े-बुजुर्ग और गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज़ भी इन ध्वनि से परेशानियों का सामना करते हैं। इसके साथ ही दिवाली के दूसरे दिन प्रदुषण में वृद्धि हो जाती है।

दीवाली पर निबंध 800 शब्द

Essay Diwali Essay in Hindi For Class 8, 9, 10, 11 & 12

दीवाली का त्यौहार केवल भारत में ही नहीं विदेशों में भी मनाया जाता है भारत एक ऐसा देश है जहाँ सबसे ज्यादा त्यौहार मनाये जाते है, यहाँ विभिन्न धर्मों के लोग अपने-अपने उत्सव और पर्व को अपनी परंपरा और संस्कृति के अनुसार मनाते है|

हिन्दू धर्म के लिये दीपावली का त्यौहार सबसे महत्वपूर्ण, पारंपरिक और सांस्कृतिक त्यौहार है जिसको सभी लोग अपने परिवार, मित्र और पड़ोसियों के साथ पूरे उत्साह से मनाते है| दीपावली को दीपों का, रोशनी का, त्यौहार भी कहा जाता है.

दीपावली का त्यौहार कब आता है

When does the festival of Deepawali come in Hindi

दीपवाली का त्यौहार प्रत्येक वर्ष अक्टूबर या नवंबर के महीने में आता है| दीपावली का त्यौहार कार्तिक मास में मनाया जाता है| दीवाली के पीछे भी कहानियाँ जिसके बारे में हमें अपने बच्चों को जरूर बताना चाहिये।

दीवाली मनाने का बड़ा कारण भगवान श्री राम जी का अपने राज्य अयोध्या लौटना भी है, जब उन्होंने लंका के असुर राजा रावण को मारा था| इसके इतिहास को हर साल बुराई पर अच्छाई के प्रतीक के रुप में याद किया जाता है.

राम जी अपनी पत्नी सीता और छोटे भाई लक्ष्मण के साथ 14 साल का वनवास काट कर अयोध्या लौटे थे| अयोध्यावासियों ने श्री राम का घी के दिये जला कर जोरदार स्वागत किया था।

अयोध्यावासियों की प्यार की सीमा अपार थी जिसके कारण उन्होने भगवान श्री राम के लिए घी के दिये जलाए थे.

अयोध्यावासियों ने अपने घर और पूरे राज्य को रोशनी से जगमग कर दिया था और तभी से श्री राम जी के लिए राजा राम के स्वागत के लिए आतिशबाजी की भी शुरुआत हुई| तभी से प्रत्येक वर्ष दीपावली के दिन आतिशबाज़ी की जाती है.

बच्चो के लिए दिवाली पर निबंध | Diwali Nibandh | Essay on Deepawali in Hindi

दीवाली का अर्थ – Meaning of Diwali in Hindi

दीपावली संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है “दीप” अर्थात “दीपक” और “आवली” अर्थात “लाइन” या “श्रृंखला” जिसका मतलब हुआ “दीपकों की श्रृंखला”|

इसे दीपोत्सव भी कहते हैं लेकिन आधुनिकता की दौड़ में दीपावली के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण दीपक और लक्ष्मी गणेश की मूर्तियाँ खरीदना है क्योंकि इस दिन उनकी पूजा करना बहुत ही शुभ होता है|

भारतवर्ष में जितने भी पर्व हैं, उनमें दीपावली सर्वाधिक लोकप्रिय और जन-जन के मन में हर्ष-उल्लास पैदा करने वाला पर्व है|

वैदिक प्रार्थना है- “तमसो मा ज्योतिर्गमय:” अर्थात अंधकार से प्रकाश में ले जाने वाला पर्व है- ‘दीपावली’।

दीपक को स्कन्द पुराण में सूर्य के हिस्सों का प्रतिनिधित्व करने वाला माना गया है| देश के कुछ हिस्सों में हिन्दू दीवाली को यम और नचिकेता की कथा के साथ भी जोड़ते हैं।

7वीं शताब्दी के संस्कृत नाटक नागनंद में राजा हर्ष ने इसे दीपप्रतिपादुत्सव: कहा है जिसमें दिये जलाये जाते थे और नव दुल्हन और दूल्हे को तोहफे दिए जाते थे|

फारसी यात्री और इतिहासकार अल बरूनी ने 11 वीं सदी के संस्मरण में, दीवाली को कार्तिक महीने में नये चंद्रमा के दिन पर हिंदुओं द्वारा मनाया जाने वाला त्योहार कहा है.

दीवाली वाले दिन अयोध्या के राजा राम लंका के अत्याचारी राजा रावण का वध करके अयोध्या लौटे थे। उस दिन अमावस्या थी इसलिए उनके राज्यवालों ने पूरे राज्य को दीपक से जलाया था|

इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी राजा नरकासुर का वध किया था| पौराणिक कथा के अनुसार विष्णु ने नरसिंह रुप धारणकर हिरण्यकश्यप का वध किया था|

दीपावली का जैन धर्म में अलग ही महत्व है उनकी नजर में दीपावली का त्यौहार त्याग और संयम का त्यौहार है|

कार्तिक कृष्ण अमावस्या को 24वें तीर्थकार भगवान महावीर ने निर्वाण पद (मोक्ष, सिद्धावस्था) को प्राप्त किया था| जैन समाज भगवान की निर्वाण पद प्राप्ति की खुशी में बहुत समय से दीपावली का त्यौहार मानते है|

निर्वाण का पद ग्रहण करना बहुत ही महत्व रखता है क्योंकि हर कोई इस पद को नहीं ग्रहण कर सकता.

निर्वाण पद की प्राप्ति आसक्ति से नहीं विरक्ति से मिलती है, भोग से नहीं त्याग से मिलती है, वासना से नहीं साधना से मिलती है, बाहरी लिप्तता से नहीं अहिंसा से मिलती है, संयम और कठोर ताप से मिलता है|

दीपावली के पहले लोग दुकानों व घरों दफ्तरों आदि की साफ- सफाई करते हैं, रंग रोगन कराते हैं| लोग माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश जी की पूजा करते है|

दीपावली के दिन सभी लोग शाम को पूजा आरती करते हैं और विधिपूर्वक लक्ष्मी माँ और गणेश जी की पूजा की जाती है|

घरों को दीयों से सजाया जाता है, सुंदर रंगोलियाँ बनाई जाती है और पूजा करने के बाद रात्रि में पटाखे भी जलाए जाते है और खुशी से एक दूसरे को दीपावली की शुभकामनाएँ दी जाती है|

दीपावली को बुराई पर अच्छाई, अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और निराशा पर आशा की विजय से जोड़कर देखते हैं। इसलिए इस दिन केवल घरों को ही दियों से रौशन ना करें बल्कि अपने अंदर के अंधकार को भी मिटाने का कष्ट करे|

दीपावली के दिन ये बात हमें याद रखनी चाहिए की मिट्टी के दीपक गढ़ने वाले कुम्हार अपने घरों को रोशन करने से वंचित हैं और अपनी पुस्तैनी कला एवं व्यवसाय से जैसे विमुख हो रहे हैं|

कुम्हारों के लिए दीपावली मात्र एक पर्व न होकर जीवन यापन का बड़ा जरिया है। इसलिए हमें मिट्टी से बने मटके दिये बर्तन आदि इस्तेमाल करने चाहिए जिनसे कोई प्रदूषण भी नहीं होता है ओर हमारी सेहत को भी कोई असर नहीं पड़ता है.

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