अक्षय तृतीया पर्व पर निबंध | Akshaya Tritiya Essay in Hindi

Akshaya Tritiya Essay Katha significance in Hindi

अक्षय तृतीया त्यौहार पर निबंध, कथाये, पूजा विधि और इसका महत्व

अक्षय तृतीया जो की हिन्दू धर्म का महत्वपूर्ण पर्व है जो की प्रतिवर्ष बैसाख मास के शुक्ल पक्ष के तृतीया तिथि को मनाया जाता है, इस पर्व का बहुत ही अधिक महत्व है, इस पर्व की मान्यता है की इस दिन जो शुभ कार्य किये जाते है, उस कार्य का अक्षय फल मिलता है. और अक्षय का कभी खत्म न होने वाला हिन्दी अर्थ होता है, जिस कारण से तृतीय तिथि के दिन होने के कारण इस पर्व को अक्षय तृतीया कहा जाता है.

तो चलिए इस अक्षय तृतीया के पर्व पर निबन्ध, महत्व, कथाये और इस पर्व से जुडी महत्वपूर्ण बातो, Akshaya Tritiya Essay Katha significance को जानते है.

अक्षय तृतीया त्यौहार पर निबंध, कथाये और महत्व

Akshaya Tritiya Essay Katha Story Importance in Hindi

Akshaya Tritiyaहिन्दू धर्म के अनुसार अक्षय तृतीया त्यौहार का विशेष महत्व है, इस पर्व की इतनी महत्ता है की यह दिन हिन्दू धर्म मानने के लिए बहुत ही विशेष और पवित्र महत्व होता है. इसे “आखा तीज” या “आखाती तीज” के नाम से भी जाना जाता है.

अक्षय तृतीया जो की भगवान परशुराम के जन्मदिन के शुभ दिन है. परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार है. हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी अक्षय तृतीया के दिन से भगवान गणेश ने वेद व्यास के श्रुतलेख को महाकाव्य महाभारत लिखना शुरू कर दिया था.

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अक्षय’ शब्द का अर्थ अनंत और ‘तृतीया’ शब्द का अर्थ तीसरा होता है. जिस कारण से इस दिन को सौभाग्य और सफलता पाने का दिन माना जाता है.

इस दिन लोग अक्षय तृतीया का विशेष पूजा का आयोजन करते है. और इस दिन नए कार्य शुरू करने के लिए शुभ माना जाता है. और कुछ लोग इस दिन अक्षय तृतीया पर सोने खरीदने के लिए भी शुभ माना जाता है. जिस कारण से अक्षय तृतीया के दिन सोने की खरीदारी बढ़ जाती है, जो की समृद्धि का प्रतिक माना जाता है.

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अक्षय तृतीया कब मनाया जाता है

Akshaya Tritiya celebrate in Hindi | Akshaya Tritiya Kab Hai.

अक्षय तृतीया हिन्दु धर्म के मानने वालो का का एक प्रसिद्ध त्यौहार है. जिसे ‘आखातीज’ या या “आखाती तीज”के नाम से भी जाना जाता है. यह हिंदू कैलेंडर के अनुसार वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष के तीसरे दिन यानि तृतीया को पड़ता है. यह पूरे भारत भर में मनाया जाता है.

इस साल 2020 में 26 अप्रैल रविवार के दिन अक्षय तृतीया मनाया जायेगा.

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अक्षय तृतीया का इतिहास और कथाये

Akshaya Tritiya History Story Katha in Hindi

हिन्दू धर्म के पौराणिक कथाओ के अनुसार अक्षय तृतीया का विशेष महत्व है, जो इस प्रकार है.

1 – हिन्दू मान्यताओ के अनुसार इस दिन अन्न की देवी माँ अन्नपूर्णा का जन्म हुआ था

2 – अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु के छठवे अवतार भगवान परशुराम का जन्म दिवस माना जाता है जिस कारण से परशुराम जयंती के नाम से भी मनाया जाता है.

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3 – अक्षय तृतीया के पवित्र दिन से भगवान गणेश जी ने वेदव्यास द्वारा के महाकाव्य महाभारत लिखना शुरू कर दिया था.

4 – इसी दिन भगवान कृष्ण ने अपने ब्राह्मण मित्र सुदामा को दो मुट्टी चावल के बदले दो लोको की समस्त सुख सुविधा प्रदान किया था.

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5 महाभारत में इसी दिन भगवान कृष्ण ने पांड्वो को वन गमन के समय अक्षय पात्र दिया था, जिसकी यह विशेषता थी की इस अक्षय पात्र से अनगिनत लोगो को भोजन बिना समाप्त हुए करा सकती थी,

6 – इसी अक्षय तृतीया के भगीरथ की तपस्या से माँ गंगा, शिव जी जटाओ से होते हुए धरती पर आई थी.

7 – अन्य प्रान्तों में इस दिन का किसानो के लिए विशेष महत्व है, अधिकतर जगहों पर इस दिन पूजा पाठ करके पकी हुई फसलो की कटाई शुरू किया जाता है.

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अक्षय तृतीया की पूजा विधि

Akshaya Tritiya Pooja Vidhi in Hindi

अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि विधान से पूजा किया जाता है, इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी को चावल चढ़ाना, तुलसी के पत्तो में भोजन के भोग लगाना और विधिवत पूजा पाठ करने का विधान है, फिर इस दिन दान देने की भी परंपरा है जिससे सुख समृधि की कामना किया जाता है.

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अक्षय तृतीया के दिन महिलाए या पुरुष सभी इच्छानुसार व्रत रखते है, फिर घर की साफ़ सफाई के बाद स्नान कार्य करने के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के पूजन का आयोजन करते है, भगवान विष्णु के बने मूर्ति को को पंचामृत से स्नान कराया जाता है, फिर पुष्प चन्दन, धुप बत्ती आदि से पूजा किया जाता है, फिर भगवान को केले के पत्ते पर भोग लगाया जाता है, और लोगो में प्रसाद वितरित किया जाता है.

अक्षय तृतीया का महत्व

Akshaya Tritiya significance in Hindi

पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार अक्षय तृतीया का दिन विशेष महत्व रखता है, इस दिन जो भी पुण्य कर्म किये जाते हैं, उनका फल अक्षय होता है, यानि इस कर्म का फल जन्म- जन्मान्तर तक रहता है और ऐसा माना जाता है कि इस दिन किया गया दान, हवन, पूजन या साधना अक्षय (संपूर्ण) होता है। जिसका फल अनंत होता है, अक्षय तृतीया की तिथि बहुत शुभ मानी जाती है, इस तिथि को बिना पंचांग देखे कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य जैसे- विवाह, गृह प्रवेश, वस्त्र-आभूषण खरीदना, वाहन एवं घर आदि खरीदा जा सकता है.

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