नाना नानी की नई नई 3 मजेदार कहानी Nani Ki Kahani

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Nana Nani Ki Kahani – बचपन में जैसे ही गर्मियों की छुट्टी शुरू हो जाती है अक्सर बच्चे गर्मी की छुट्टी बिताने अपने नाना नानी के घर जाते है जहा पर उन्हें अपने ननिहाल में खूब धमा चौकड़ी करते है और फिर दिन भर मस्ती करने के बाद रात में अपने नानी से नई नई कहानिया सुनने को मिलती है जो काफी मजेदार और सीख देने वाली होती है इसलिए बचपन में सुनी गयी Nani Ki Kahani अक्सर हमे याद रहती है,

तो चलिए आज हम यहा पर नई नई Nani Ki Kahani शेयर कर रहे है जिन्हें पढ़कर आप अपने बचपन के दिनों को याद कर सकते है और इन नानी की कहानियो से सीख भी ले सकते है

नानी की नई नई मजेदार कहानिया Nani Ki Kahani

Nani Ki Kahaniतो चलिए नानी की इन मजेदार कहानियो को जानते है जिनसे हम अच्छी शिक्षा भी ले सकते है, जिनसे हमे अच्छाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी मिलती है.

घमंड का अंत – नानी की कहानी | Nani Ki Kahani

एक जंगल में एक विशाल पर्वत था । एक दिन उस विशाल पर्वत ने जानवरों को देखा, जंगल को देखा और फिर खुद को देखा । उसे अपने आकार पर बहुत घमंड हुआ उसने कहा मैं सबसे शक्तिशाली हूं, मैं ही तुम्हारा ईश्वर हूँ । पर्वत की यह बातें सुनकर सभी जानवरों को बहुत गुस्सा आया ।

घोड़े ने आगे बढ़कर कहा – ओ घमंडी पर्वत अपने आप पर इतना घमंड मत कर, एक क्षण में तुम्हें दौड़ कर पार कर सकता हूं, पर पर्वत पर थोड़ी ऊपर चढने के घोड़ा लड़घड़ा कर गिर गया ।

पर्वत दिल खोलकर हंसा, इसी तरह हाथी, ऊँट ,जिराफ सभी ने कोशिश की पर वे पहाड़ का कुछ बिगाड़ नहीं पाए अब सभी जानवरों को अपना दोस्त चूहा याद आया ।

चूहा पर्वत के पास आया और उसने पर्वत को चुनौती दी, पर्वत ने चूहे का खूब मजाक उड़ाया । चूहे ने मुस्कुराते हुवे पर्वत में छेद बनाना प्रारंभ किया । अन्य चूहों ने भी पर्वत में छेद करना चालू कर दिया । पर्वत घबरा गया उसने सभी जानवरों से माफी मांगी । इस तरह पर्वत के घमंड को एक छोटे से चूहे ने तोड़ दिया ।

कहानी से शिक्षा :- जीवन में हमे कभी भी घमंड नही करना चाहिए, क्युकी जो घमंड करते है एकदिन निश्चित ही उनके घमंड का अंत भी होता है, इसलिए हमे लोगो के साथ घमंड के बजाय विनम्र का स्वाभाव रखना चाहिए.

बन्दर की कहानी – नानी की कहानी | Nani Ki Kahani

एक समय की बात है एक शरीफ आदमी था । उसके पास एक बंदर था, वह बंदर के जरिए अपनी आजीविका कमाता था । बंदर कई तरह के करतब लोगों को दिखाता था । लोग उस पर पैसे फेंकते थे , जिसे बंदर इकट्ठा करके अपने मालिक को दे देता था । एक दिन मालिक बंदर को चिड़ियाघर लेकर गया, बंदर ने वहां पिंजरे में एक और बंदर देखा । लोग उसे देख – देख कर खुश हो रहे थे तथा उसे खाने को फल बिस्किट इत्यादि दे रहे थे । बंदर ने सोचा कि पिंजरे में रहकर भी यह बंदर कितना भाग्यवान है, बिना किसी परिश्रम के ही इसे खाना-पीना मिल जाता है ।

उस रात वह बंदर भी भाग कर चिड़ियाघर में रहने पहुंच गया, उसे मुफ्त का खाना और आराम बहुत अच्छा लगा । पर कुछ दिनों में ही बंदर का मन भर गया । उसे अपनी स्वतंत्रता की याद आने लगी, अपनी आजादी वापस चाहता था । वह फिर चिड़ियाघर से भाग कर अपने मालिक के पास पहुंच गया । उसे मालूम हो गया की रोटी कमाना कठिन होता है, किंतु आश्रित होकर पिंजरे में कैद रहना उससे भी कठिन है ।

कहानी से शिक्षा :- इस कहानी से हमे यही शिक्षा मिलती है की जब स्थिति में होते है वह स्थिति उतनी अच्छी नही लगती है जबकि दुसरो का जीवन और अधिक अच्छा लगता है, लेकिन वास्तव में वैसा नही होता है सभी लोग अपने जीवन में कुछ न कुछ परेशानिया झेलते रहते है इसलिए हमे दुसरो के देखने के बजाय अपने सुख में संतोष करना चाहिए.

कौआ और लोमड़ी – नानी की कहानी | Nani Ki Kahani

एक लोमड़ी थी दिन भर वह भोजन की तलास में भटक रही थी लेकिन उसे जंगल में खाने को कही भी कुछ न मिला, फिर वह लोमड़ी थक हारकर एक पेड़ के नीचे बैठ गयी, इतने में उस पेड़ में एक कौआ उड़ते हुए आकर बैठ गया जिसके चोच में रोटी का टुकड़ा था, जिसे देखकर लोमड़ी में मुह में पानी आ गया, फिर वह उस रोटी के टुकड़े को पाने के लिए तरकीब सोचने लगी,

फिर कुछ देर सोचने के बाद वह कौए से बोली “ अरे कौआ भाई आप तो बहुत ही अच्छा गाता है आपके गानों को सुनना हमे बहुत ही अच्छा लगता है हमे भी अपना गाना तो सुनाओ”

इतनि तारीफ सुनकर कौआ बहुत ही प्रसन्न हो गया और फिर कांव कांव करने लगा, जिससे उसके चोंच की रोटी नीचे गिर गयी, और लोमड़ी तुरन्त उस रोटी के टुकड़े को लेकर अपनी भूख मिटाने वहा से भाग गयी, इस तरह कौआ देखता ही रह गया.

कहानी से शिक्षा :- इस कहानी से हमे यही शिक्षा मिलती है कभी भी हमे दुसरो की बातो में नही आना चाहिए,  जो भी करना चाहिए अपने दिमाग से सोच समझकर ही कोई कदम उठाना चाहिए.

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