जादुई पेंसिल की कहानी Jadui Pencil Ki Kahani

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Jadui Pencil Ki Kahani – बचपन में हम अपने दादी नानी से ढेरो कहानिया सुनने को मिलता था जो की बहुत ही मनोरंजक और अच्छी सीख देने वाली कहानिया होती थी, जिसे सुनकर हम सभी प्रभावित होते थे और प्रतिदिन नये नये कहानियो को सुनने को लेकर इंतजार रहता था तो आज हम आपके लिए एक ऐसी ही Kahani लेकर आया जो की हम सभी को एक अच्छी सीख मिलती है तो चलिए इस जादुई पेंसिल की कहानी को बताते है

जादुई पेंसिल की कहानी | Jadui Pencil Ki Kahani

Jadui Kahani – एक बार की बात है एक गांव में एक बहुत ही गरीब लड़का रहता था उसका नाम रवि था वह बहुत ही गरीब परिवार से जिसके माता पिता बड़ी मुश्किल से अपना जीवन गुजर बसर करते थे, इस तरह वह बस किसी तरह से लोगों से मांग कर या मेहनत करके खाना खा लेता था और लोग उसकी गरीबी को देखकर उसे कुछ पैसे या खाना दे दिया करते थे पर रवि बहुत ही ज्यादा मेहनती था और अक्सर लोगो की मदद भी करता था अंधे और असहाय व्यक्तियों को सड़क पार करा दिया करता था तो प्यासे को पानी पिला दिया करता था जिस कारण से उसके आस पास के लोग उससे काफी प्रभावित भी होते थे,

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वह हर रोज मेहनत करता था  वैसे तो उसके पास कोई भी काम नहीं था पर वह लोगों के पास जाकर काम मांगता था और जो भी काम उसे दिया जाता था वे उस काम को अच्छे से किया करता था और रवि को कुछ पैसे मिल जाया करते थे और जिससे वह अपनी पढ़ाई को कर लिया कर लिया करता था,

जादुई पेंसिल की कहानी | Jadui Pencil Ki Kahani

Jadui Pencil Ki Kahani

एक दिन की बात है रवि के घर के पास से के महात्मा गुजरे जिनके आँखों में तेज था उनको बहुत तेज प्यास लगी थी और फिर रवि के घर के पास आकर रवि आकर मागते है जिसके बाद रवि आदत के अनुसार वह घर में से तुंरत पानी लेकर आया और महात्मा जी को पानी पिने के लिए दे दिया, इस प्रकार महात्मा जी प्यास बुझ चुकी थी वह रवि के स्वाभाव से बहुत ही खुश हुए और फिर उन्होंने अपने पोटली में एक पेन्सिल निकालकर रवि को दिए और बोले की रवि यह आम और साधारण पेन्सिल नही है इस पेन्सिल से जो भी कुछ बनाओगे वह असली बन जायेगा.

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इस प्रकार रवि वह पेन्सिल पाकर बहुत ही खुश हुआ और अब वह इस पेंसिल की सहायता से अपनी गरीबी दूर कर सकता था, इसके बाद उसे बहुत तेज भूख लगी थी तो उसने तुरंत उस पेन्सिल से भोजन का चित्र बनाता था, जिसके बाद वह चित्र सच में भोजन बन गया था, अब रवि को महात्मा जी बातो पर पूरा यकीन हो गया था,

धीरे धीरे इस तरह रवि अपने जरूरत की चीजो को बनाता रहा और फिर फिर ह गरीब से अमीर बन गया और फिर उस पेन्सिल से लोगो की जरूरत की चीजे बनाकर मदद भी करने लगा था,

जिसके बाद यह बात पूरे गांव में फैल जाती है और इस तरह बात वहा के राजा को पता चल जाती है जिसकी वजह से रवि को राजा के दरबार में बुलाया जाता है और कहा जाता है कि आपको राजा के लिए वहां पर हीरे और मोती बनाने हैं,

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रवि जैसे ही राजा के दरबार में जाता है राजा रवि से ढेरों सारे हीरे और मोती बनाने के लिए कहता है पर रवि मोती और हीरे बनाने से मना कर देता है और कहता है इस जादुई पेंसिल का इस्तेमाल मैं सिर्फ गरीब लोगों कि मदद करने के लिए करता हूं और मैं आपके लिए हीरे और मोती नहीं बनाऊंगा

यह सुनते ही राजा को क्रोध आ जाता है और वह सूरज को काल कोठरी में डलवा देता है जहां पर बहुत ज्यादा अँधेरा होता है पर रवि बिल्कुल भी नहीं डरता क्योंकि उसके पास जादुई पेंसिल उसके साथ में थी और वह वहां पर सबसे पहले रोशनी का इंतजाम करता है उसके बाद वह काल कोठरी में रास्ता बना कर भाग निकलता है.

इस तरह से रवि कालकोठरी से निकलने के बाद बहुत से गरीब लोगों की मदद करता है और उनके लिए जरूरत का सामान बनाकर उन्हें हमेशा देता रहता है.

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इस तरह से सभी गरीब लोग अपने पैरों पर खड़े हो जाते हैं और अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर देते हैं जिससे अब उन्हें कभी भी किसी के सामने हाथ फेलाने की जरूरत नहीं पड़ती. और इस तरह रवि धीरे धीरे उस राजा से भी अमीर बन गया और लोगो की मदद करने के कारण लोगो ने उसे अपना राजा बना लिया और एकदिन रवि उस राज्य का राजा बन जाता है और इस तरह रवि के नेकी के चलते वह अब गरीब से बहुत अमीर राजा बन गया था,

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कहानी से शिक्षा :- इस कहानी से हमे यही शिक्षा मिलती है की अगर लोगो की बिना परवाह किये बिना मदद करते थे और एकदिन हमारे साथ भी जरुर अच्छा होता है इसलिए हमे हमेसा नेकी और मदद की राह पर चलना चाहिए.

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