माँ के लिए 4 कविता Best Maa Kavita Mother Poem in Hindi

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Mother Poem in Hindi | Maa Hindi Kavita

माँ पर हिन्दी कविता

माँ को धरती से भी बड़ा माना गया है माँ ही है जो हमारे जीवन का आधार है माँ के ममता का कर्ज कभी नही चुकाया जा सकता है माँ तो ममतामयी माँ होती है जिसका प्यार पाने के लिए ईश्वर भी इन्सान के रूप में जन्म लेकर एक माँ के गोद में पलते बढ़ते है, तो चलिए इस Mother Day पर माँ के लिए Mother Poem, Maa Kavita यहा दे रहे है.

Mother Poem Maa Kavita

तो आज हम माँ के लिए लिखी गयी कविता आप सभी के बीच शेयर करते है जिन्हें आप भी अपने माँ के लिए इन कविता को शेयर कर सकते है.

माँ पर कविता :-1

Maa Kavita Mother Poem in Hindi

माँ के हाथ का खाना

माँके हाथ का बना सादा सरल ख़ाना

पर था उसमे प्यार और परवाह

भावनाएँ, अपनेपन का एहसास।

जीवंत लगाव का घुला मिला मीठा मीठा स्वाद

तन्यमयता से पकता धीरे धीरे

और उससे ज्यादा आत्मीयता का मिला अनुराग

मठरी और नमकीन या मीठे शक्करपारे

तो कभी पन्ना का खट्टा मीठा अंदाज़

मीठी चटनी या आम का अचार

कढ़ी चावल में कढती कढ़ी की सौंधी चटकार

हिंग और जीरे का छौंक और पुदीने की चटनी

रात को मलाई वाला दूध

तो कभी उसमे डली हल्दी से भागता बुखार

हर छोटी मोटी बीमारी, बहती नाक या बंद गला

बिना डिग्री के माँ थी सबसे बड़ी डॉक्टर होशियार

माँ पर कविता :-2

Maa Kavita Mother Poem in Hindi

माँ की ममता

माँ बनके जब माँ का किरदार जिया मैंने
बचपन से अब तक की,तकलीफ़ों को महसूस किया मैंने

माँ जो रात को उठ उठ कर हमहे देखतीं थीं
यानि माँ जानती थीं,कि मैं अँधेरे से डरती थी।

रंगत मेरी सुंदरता की परिभाषा में आड़े आती थी
क्या इसीलिए माँ, गले लगा कर हिम्मत बढ़ाती थी।

दिन भर बार बार समझाने पर भी न समझें कोई
पर माँ तो बिन कहे ही न जाने कैसे सब समझ जाती थीं।

निस्तेज़ आँखे, रुखे होंठ, व ढीली चाल
देखते ही माँ रसोई की तरफ़ खुद ब ख़ुद चली जाती थीं।

उलझे रिश्ते,थपेड़ों जैसे तंज और कड़वी बातों का कहर
माँ बिन सुने पीठ पर हल्की सी थपकी से सहलातीं थीं।

जबपास हो सब कुछ, हासिल हों दुनिया के ऐशो- आराम
कलफ़ लगी सूती साड़ी में लिपटीं
माँ की गरिमा कुछ अलग नज़र आती थीं।

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माँ पर कविता :-3

Maa Kavita Mother Poem in Hindi

माँ रूपी सांस और बहु का किस्सा

सास बहू में तन गई, हो गई आरमपार
एक का मुँह पूरब तरफ़, दूजी बैठी पश्चिम के उस पार
दुआ सलाम भी नहीं हुआ,मुँह पर फ़ैली ग़ुस्से की तकरार
माँ कहे बेटा मेरा,जननी हूँ मैं इसकी
बहू कहे, ये मेरा हुआ, भूल जाओ ये इसकी उसकी
सैंडविच बना बेटा, निकल गया कह ऑफ़िस का काम
महाभारत सुनी देखी थी,अब घर में हो गया कोहराम
दिनभर सोचा क्या करूँ,शाम तक जुगड़ लगाई ऐसी
दिनरात अब सास बहू, हो गई एकदम बिजी बिजी
हँसहँस कर लोटपोट हो कभी, तो कभी सुनाए लतीफ़े
स्मार्टफ़ोन ने किया स्मार्ट
बने कभी नयी रेसिपी,तो कभी किटी के क़िस्से
इतना सरल उपाय,पहले क्यूँ न समझ में आया
ऑफ़िस में था बॉस अभी,अब घर में असल बॉस बन पाया

माँ पर कविता :-4

Maa Kavita Mother Poem in Hindi

सर्वोत्तम गहना

फूलों की बरसात,शहद से शब्दों की बोछार
रोज़ सुबह की यही प्रार्थना, यहीं उपासना, सुनो संसार।

दुखः भूलाने की हँसी, आत्ममंथन है,स्वयं से प्रेम करना हैं
भीतर से उठी आनंद की हँसी,मानो गीतों का झरना हैं।

हँसे न हँसे,ये सोचना विचारना, अपंग व थोथा है
खुल के हँसना,यही स्वाभाविक सर्वश्रेष्ठ सुंदर सपना हैं।

आँसू बन जाए महँगे,सस्ता मुस्कान का होना अच्छा है
निशब्द संवाद से जब हो बात,वही सर्वोतम गहना सबसे अच्छा हैं।

कविता के लेखक :- अर्चना गुप्ता

हाय AchhiAdvice.Com के सभी पाठको को मेरा नमस्कार… मेरा नाम अर्चना गुप्ता है । मुझे कविताएँ लिखने का शौक़ है। मैं ग़ाज़ियाबाद से हूँ। शिक्षा संबंधित कार्य में हूँ। और AchhiAdvice.Com पर यह मेरा प्रथम प्रयास है। आशा है आपको व अन्य सभी को ये मेरी कविताये पसंद आएगी। अगर आपको हमारी कवित अच्छी लगी तो कमेंट में जरुर बताये और इन कविता को शेयर भी जरुर करे.. धन्यवाद.

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