अध्यापक की सच्ची भावनात्मक कहानी | Teacher Emotion Kahani

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Teacher Ke Truth Emotion Ki Hindi Kahani |  Teacher ki kahani

टीचर | अध्यापक | गुरु | शिक्षक के सच्चे प्रेम भावना की कहानी | टीचर की कहानी

एक बार की बात है एक स्कूल के Teacher अपने विद्यार्थियों के साथ पिकनिक पर गये थे तो रास्ते में सबको प्यास लगी तो रास्ते में एक कुए को देखकर उस जगह बस को रोक दिया गया फिर एक टीचर ने अपने एक विद्यार्थी से उस कुए से पानी लाने को कहा तो वह विद्यार्थी पास के एक कुए के पास गया और वहा रस्सी के सहारे कुए से पानी निकाला

teacher ki kahaniऔर तेज प्यास लगने के कारण उसे उस कुए का पानी बहुत ही शीतल और स्वादिष्ट लगा जिसे पीकर उस विद्यार्थी ने अपना प्यास बुझाया और बड़े सी प्यार से सबके लिए पानी लेकर गया और अपने टीचर से कहा “सर यह बहुत ही स्वादिष्ट और शीतल जल है इसे मैंने बहुत ही प्यार से आप सबके लिए लाया हु इसे पीकर अपनी प्यास बुझाये”

जिसके बाद उस अध्यापक ने भी पानी पिया और फिर पानी की खूब प्रंशसा किया तथा साथ में उस विद्यार्थी की सच्चे सेवा भाव की भी प्रंशसा किया जिससे वह विद्यार्थी मन से बहुत ही प्रफुल्लित हुआ

इसके बाद उस पानी को दुसरे विद्यार्थी ने पिया और पानी पीते हुए पानी को कड़वा कहकर मुह से उड़ेल दिया और बोला “सर पानी तो बहुत ही कड़वा लग रहा है और आपने तो इस खराब कहने के बजाय की भी प्रंशसा कर दिए और साथ में हमारा साथी की भी बेकार में प्रंशसा कर रहे है आखिर आपको ऐसा इस पानी के स्वाद में क्या दिखा जो ऐसा किये”

उस विद्यार्थी की बात सुनकर वह Teacher बोले “देखो भले ही जल में कोई मिठास नही है तो क्या हुआ लेकिन जिस प्यार से मेरे प्रिय विद्यार्थी ने हमारे लिए पानी लाया, पानी लाने में तो हमारे प्रति उसके मन में मिठास तो था न, तो भला जो आपको स्नेह करता हो आप उसकी बुराई कैसे कर सकते है हो सकता है अत्यधिक प्यास के कारण कड़वा जल भी अमृत के समान लगा हो तो शायद हम लाने वाले का जो इतने प्यार से हम सभी के बारे में सोचे उसका दिल नही तोड़ना चाहिए और हमेसा विपरीत परिस्थितियों में भी सदा अनुकूल रहना चाहिए जिससे हम सभी के साथ मधुर सम्बन्ध के साथ हमेसा रह सकते है”

अपने टीचर की बात सुनकर उस विद्यार्थी को अब समझ आ गया था की भले ही परिस्थितिया चाहे कितनी विपरीत ही क्यों न हो लेकिन कभी भी अपनों का मनोबल नही गिराना चाहिए

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तो देखा आपने यदि इसी प्रकार हम सभी अपने व्यवहारिक जीवन में भी सबके साथ अनुकूल परिस्थितिया बनाकर चलते है तो निश्चित ही हम सभी के मधुर सम्बन्ध के साथ अच्छे से रह सकते है

जीवन के ऐसी तमाम परिस्थितिया आती भी है जहा हम चीजो के बजाय प्रेम और भाव के भूखे होते है और और ऐसा प्रेम भाव आपको वही लोग दे सकते है जो आपको सच्चे मन से अपना मानते है यानि प्रेमभाव में कभी वस्तुओ की कीमत की मोल नही देखा जाता है वहा तो सिर्फ आपके प्रति लोग कैसा भाव रखते है उसी की कीमत अनमोल होती है जिसे किसी भी कीमत से नही चुकाया जा सकता है.

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जैसा की आप सभी सुदामा कृष्ण की दोस्ती की कहानी तो जानते ही है सुदामा के पास अपने मित्र को भेट देने के लिए चावल के सिर्फ 2 ही दाने थे लेकिन भगवान कृष्ण चावल के भूखे नही थे उन्हें तो अपने मित्र सुदामा के इस प्रेम भाव के भूखे थे जो की उनके पास जो भी था अपने सच्चे मन के भाव से कृष्ण को भेट देने के लिए लाये थे यानी अगर सच्चे अर्थो में देखा जाय तो अक्सर लोग प्रेम के बजाय वस्तुओ के कीमत से किसी के प्रति का भावो का मोल देखते है.

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लेकिन अक्सर लोग भूल जाते है की भला वह चाहे वह कितनी छोटी ही चीज क्यू न हो लेकिन उसे कितने प्रेम भाव से आपको देने के लिए लाये होंगे इसलिए जो लोग इन छोटी छोटी चीजो में खुशिया तलाशते है असल में वही लोग जीवन के सच्चे सुख का आनन्द ले पाते है इसलिए हमे हमेसा दुसरो के प्रेम भाव की कद्र करना सीखना चाहिए तभी हम सभी इस जीवन का सच्चा सुख का आनन्द उठा सकते है

तो आप सबको यह कहानी Teacher की सच्ची भावनात्मक कहानी कैसा लगा कमेंट में जरुर बताये और इसे दुसरो के साथ शेयर भी जरुर करे.

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