कुम्हार के पात्र Short Moral Story in Hindi

0

Short Hindi Stories

अच्छे गुणों की तारीफ एक शिक्षाप्रद कहानी | गुणों की परख एक शिक्षाप्रद कहानी

एक कुम्हार दिन भर मेहनत करके दूर दूर से अच्छे मिट्टी इकठ्ठा करता था फिर उन मिट्टियों से अच्छे अच्छे मिट्टियों के बर्तन बनाता था जिनमे घड़े और हुक्के भी हुआ करते थे कुम्हार के घड़े काफी सुंदर और टिकाऊ होते थे और उसमे रखे पानी भी काफी शीतल होती थी जिसके कारण लोग पानी पीकर संतुष्ट रहते थे जिसके कारण कुम्हार के घडो की बिक्री खूब होती थी इसके विपरीत कुम्हार के तम्बाकू पीने वाले हुक्के को बहुत ही कम ही लोग खरीदते थे

short hindi stories

जिसके कारण कुम्हार के हुक्के घडो की इतनी तारीफ सुनकर मन ही मन घड़ो से जलते थे और एक दिन हुक्के ने उन घड़ो से पूछ ही लिया की भाई तुम भी मिट्टी के बने हो तुम्हे भी अग्नि में पकाया जाता है और जितना बनाने में तुम्हे मेहनत लगता है उतना हमे बनाने में भी मेहनत लगता है फिर भी तुम घड़ो की इतनी तारीफ क्यू लोग करते है

तो यह बात सुनकर घड़े मन ही मन मुस्कुराये और हुक्को से बोले देखो भाई हम सब एक ही मिट्टी से बने है और हम सबको एक ही इन्सान ने बनाया है और हमारी परवरिश भी लगभग एक जैसी होती है फिर भी हम घड़ो को लोग इसलिए लोग ज्यादा तारीफ करते है क्यूकी हमारे अंदर और तुम्हारे अंदर के गुण एकदम अलग अलग है जहा एक तरफ अपने अंदर पानी रखने से शीतल हो जाते है और लोगो को शीतल जल मिलने से लोग सुख का अनुभव करते है जबकि तुम्हारे अंदर आग और धुए का भंडार रहता है जो की कही न कही लोगो को अंदर से जलाता है और जो लोग समझदार होते है वो खुद को बर्बाद करने वाली चीज कभी नही खरीदते है

इसलिए हम घड़ो की तारीफ हमारी बनावट नही बल्कि हमारे अंदर मौजूद गुणों के कारण होती है यह बात सुनकर उन हुक्को को अपने अंदर छिपे हुए गुणों का पता चल गया और फिर उसके बाद से उन घड़ो से जलना बंद कर दिया

प्रेरणादायक शिक्षा | Moral Teach

यह एक छोटी सी कहानी हमे यही सिखालती है की हम सभी इंसानों की बनावट और कायाकल्प एक ही मिट्टी से हुई है जिसको एक ही ईश्वर ने सबको बनाया है लेकिन हम सभी के अंदर अलग अलग गुण मौजूद है जो यही गुण हमे महान बनाती है अर्थात जो इन्सान जितना लोगो को अधिक शीतलता और दुसरो के सुख के काम आता है सब लोग ऐसे ही इंसानों की तारीफ करते है इस कहानी का मूलमंत्र यही है इन्सान अपने रूप और बनावट से तारीफ के काबिल नही होता है वरन इन्सान के अंदर मौजूद अच्छे गुण ही उसे लोगो के तारीफ के काबिल बनाती है

जैसा की कहा भी गया है

गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढि गढि काढैं खोट।
अंतर हाथ सहार दै, बाहर बाहै चोट।।

कुछ और प्रेरित करने वाली इन हिंदी कहानियो को भी पढ़े:-

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here