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सच्ची मित्रता की छोटी कहानी – Sacchi Mitrata Par Kahani

Sacchi Mitrata Par Kahani

सच्ची मित्रता पर छोटी कहानी

जीवन में सच्चे दोस्त का होना बहुत जरुरी है, और ऐसे में आप भी सच्चे दोस्त पाना चाहते है, तो सबसे पहले आपको एक खुद सच्चा दोस्त बनना पड़ेगा, तो चलिए कहानी के इस पोस्ट में सच्ची मित्रता पर कहानी बताने जा रहे है, की किस प्रकार एक सच्चे दोस्त होने से जीवन में आने वाली कई परेशानियों का मुकाबला किया जा सकता है. तो चलिए अब इस सच्ची मित्रता की कहानी – Sacchi Mitrata Par Kahani को जानते है.

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Sacchi Mitrata Par Kahaniराम और श्याम दोनो गहरे मित्र थे उनकी इस सच्ची दोस्ती के सभी कायल थे, बचपन से दोनों एक साथ पढ़े लिखे थे दोनों एक ही गाव में रहते थे Ram जिसके पिता व्यापारी थे उनके पास खूब पैसा था इसलिए राम धन दौलत से अमीर था जबकि श्याम जिसके parents एक गरीब किसान थे दिन रात श्याम के माता पिता अपने खेतो में मेहनत करते थे जिसके कारण उनका गुजारा हो पाता था वे किसी तरह भी अपने बेटे श्याम को पढ़ा लिखा रहे थे वे अपने मेहनत पर विश्वास करते थे,

श्याम का दोस्त राम भी बहुत ही मेहनती था उसे तनिक भी अपने पैसो का घमंड नही था जिसके चलते राम और श्याम की आपस में खूब बनती थी श्याम गरीब होने के बावजूद भी राम की हर तरह से help किया करता था और राम भी जरूरत पड़ने पर श्याम की मदद किया करता था,

एक बार की बात है राम और श्याम के स्कूल में exam चल रहा था उनका school जो की गाव से थोडा अधिक दूर पर था इसलिए राम और श्याम अपने अपने साइकिल से स्कूल जाते थे लेकिन exam के दिन राम थोडा जल्दी निकल गया तो उसकी बीच रास्ते में ही उसकी साइकिल ख़राब हो गयी राम ने बहुत कोशिश की उसका साइकिल ठीक हो जाये लेकिन तनाव की चिंता में उसका साइकिल ठीक नही हो पा रहा था और उसे स्कूल पहुचने में काफी देरी भी हो रही थी की इतने में उसका दोस्त श्याम भी अपने साइकिल से पीछे से आ गया और राम को देखकर तुरंत रुक गया.

और राम से सारा हाल पूछने लगा और जब श्याम को साइकिल ख़राब होने के बारे में पता चला तो श्याम ने तुरंत राम से कहा की यदि मेरे रहते मेरे मित्र को परेशानी हो तो फिर ये मित्रता किस काम की और इतना कहकर श्याम ने राम को अपने साइकिल ऐसे ही लेकर चलने को कहा और जब दोनों मित्र को कुछ आगे चलने पर नजदीक गाव में श्याम ने उसका साइकिल रखवा दिया और फिर दोनों एक ही साइकिल पर exam देंने गये इसके बाद तो राम ने श्याम से कहा की मित्र अगर तुम आज न होते तो मेरा exam छुट जाता इसके बाद राम ने निश्चय किया वह श्याम की दोस्ती को कभी नही भुलायेगा और वक़्त पड़ने पर श्याम के जरुर काम आयेगा, इस दिन के बाद से तो राम और श्याम की मित्रता और घहरी हो गयी,

समय बीतता गया राम और श्याम अब बड़े हो गये थे और राम अपने पिताजी के साथ शहर में अपने बिजनेस के सिलसिले में रहने लगा और उधर श्याम पैसो की कमी के कारण आगे की पढाई न कर सका और अपने पिताजी के साथ अपने खेतो में व्यस्त हो गया जिसके कारण दोनों मित्रो का मिलना बहुत कम हो गया लेकिन दोनों एक दुसरे को कभी नही भूले.

एक बार की बात है श्याम के पिताजी जो की अब काफी age के हो चुके थे और दिन पर दिन उनका health गिरता ही जा रहा था तो गाँव के डॉक्टर ने advice दिया की वह शहर में जाकर अपने पिताजी का इलाज कराये लेकिन श्याम जो की हमेसा आर्थिक तंगी से परेसान रहता अब पिताजी की बीमारी से उसे और चिंता होने लगी थी की वह इतने सारे पैसे कहा से लायेगा और शहर में कहा इलाज कराएगा.

लेकिन पिताज़ी के गिरते स्वास्थ्य को देखकर उसे अपने पिताजी को लेकर शहर में जाना ही पड़ेगा ऐसा सोचकर अपने कुछ relative से थोड़े पैसे मागकर अपने पिताजी को शहर ले गया और एक अच्छे अस्पताल में admit करा दिया तो डॉक्टर ने बताया की उसके पिताजी के इलाज में लगभग लाख रूपये खर्च होंगे.

इतना सुनने के बाद मानो श्याम को साप ही सूंघ गया हो वह यह सोचकर परेसान हो गया की अब वह लाख रूपये कहा से लायेगा अब तो श्याम को कोई भी उपाय नही सूझ रहा था की क्या करे वह डॉक्टर से यह बोलकर चला गया की उसके पिताजी का इलाज जारी रखे वह पैसो का इंतजाम करने जा रहा है

उधर श्याम पैसो के जुटाने के चक्कर में गाव वापस जाने लगा और इसी बीच राम को भी गाँव वालो से पता चला की श्याम अपने पिताजी के इलाज के लिए शहर में आया है तो वह श्याम से मिलने को बेचैन हो उठा और जल्द ही उस अस्पताल का पता करके राम वहां पहुच गया और राम ने तुरंत इलाज के सारे पैसे डॉक्टर को तुरंत चूका दिए और कुछ पैसे श्याम के पिताजी को भी दे दिए और कम समय होने के कारण राम वहां से चला गया और जल्द ही वापस आने को कहा ,

इसके बाद श्याम भी गाव से कुछ पैसो का इंतजाम करके वापस अपने पिताजी के पास आया तो देखा की पिताजी का इलाज चल रहा है और डॉक्टर के सारे पैसे पहले से जमा हो चुके है तो उसके पिताजी ने राम के बारे में सब बाते बताई तो इतना सब सुनने के बाद श्याम की आखे भर आई और इतने में राम भी वापस आ गया था और एक बार फिर राम और श्याम एक दुसरे से मिले तो श्याम ने राम से कहा मित्र अब तुम्हारे पैसे कैसे चूका पाउँगा तो राम बोला यदि मुझे इन पैसो की जरूरत होती तो हम क्यू दुसरो को देते और रही बात चुकाने की तो मित्र अगर आज मै इस अच्छी स्थिति में हु तो तुम्हारे कारण ही हु क्यू की अगर तूम उस दिन स्कूल के समय अगर नही किये होते या कोई भी नही help किया होता तो मै Negative thinking में चला जाता और शायद आज यहां न होता,

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और राम ने कहा की यदि हमे अपने मित्रता के बदले जो भलाई करते है उसके बदले हमे कुछ पाने की आस हो जाए तो वह भलाइ नही एक तरह से व्यापार हो जाता इसलिए मेरे मित्र जहा मित्रता में निस्वार्थ भावना होती है वही तो सच्ची मित्रता होती है.

और इस प्रकार राम और श्याम ने एक बार फिर अपने सच्ची दोस्ती को सही तरीके से निभा दिए.

तो देखा दोस्तों अगर हम किसी से Sachhi Dosti पाना चाहते है तो हमे अपने मन में कभी लालच या कुछ पाने की इच्छा नही रखनी चाहिए क्यू की अगर मित्रता में उच्च नीच, अमीरी गरीबी और लेनदेन आ जाए तो वह मित्रता ज्यादा दिन तक टिक नही पाती है . इसलिए दोस्तों हमे कभी भी अपने मित्रो के प्रति हमेसा वफादार होना चाहिए, यही एक सच्चे मित्र की पहचान है

तो आप सबको ये Hindi story कैसा लगा please comment box में जरुर बताये और इस कहानी को शेयर भी जरुर करे.

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