दिमाग की शक्ति कैसे बढ़ाये, मानसिक शक्ति और एकाग्रता बढ़ाने के 7 उपाय

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Dimag ki Shakti ko Kaise Badhaye Mind Power Increase Tips in Hindi

दिमाग कैसे बढ़ाये मानसिक शक्ति कैसे बढ़ाये

आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने शारीरिक स्वास्थ्य पर तो ध्यान देते हैं किन्तु जब मानसिक स्वास्थ्य की बात होती है तो अंजान से बने रहते हैं। हमारी जिंदगी के सभी काम हमारे मन के द्वारा ही संचालित होते हैं और यह मन ही है जो हमारे शरीर को भी नियंत्रित करता है। ऐसे में यदि मन स्वस्थ्य नहीं होगा तो हमारे कार्य करने की क्षमता भी प्रभावित होगी।

मन के एकाग्र होने से हमारी मानसिक शक्तियों को विकसित होने का मौका मिलता है। पतंजलि के योग, वेदान्त और आयुर्वेद में मन की शक्तियों और उन्हे विकसित करने के विषय में विस्तृत जानकारी मिलती है। आधुनिक विज्ञान भी मन की गहराइयों को समझने की कोशिश कर रहा है और अब यह मानने लगा है कि ध्यान और अन्य उपाय मन को स्वस्थ्य रखने में बहुत ही कारगर हैं।  मन को नियंत्रित करने, एकाग्रता बढ़ाने और मानसिक शक्ति को विकसित करने के ऐसे ही 7 प्रमाणित उपाय यहाँ दिये गए हैं जिनके पालन से कोई भी व्यक्ति अपने मन की सोई हुई शक्तियों को जगा सकता है और पहले की अपेक्षा अपने अंदर परिवर्तन अनुभव कर सकता है।

दिमाग की शक्ति कैसे बढ़ाये

Dimag ki Shakti ko Kaise Badhaye

  1. दिनचर्या का नियमित होना | Be Regular Routine

अपने मन की एकाग्रता को बढ़ाने के लिए यह आवश्यक है कि पहले तो हम अपने पास जो मानसिक क्षमता है उसे क्षीण होने या बर्बाद होने से रोकें। इसके लिए पहला कदम है एक नियमित दिनचर्या का होना। जिस मनुष्य के सोने, जागने, भोजन करने और व्यायाम करने का समय निर्धारित नहीं है वह भूल जाए कि कभी वह अपनी मानसिक शक्तियों को जगा पाएगा। दिनचर्या के नियमित होने के साथ यह जानना भी बहुत जरूरी है कि किसी भी कार्य को करने का सही समय क्या है। उदाहरण के लिए सूर्योदय और सूर्यास्त के समय भोजन नहीं करना चाहिए और हमेशा सूर्योदय से पहले ही उठ जाना चाहिए। दिनचर्या को नियमित करने की एक लंबी लिस्ट है।   

  1. नियमित ध्यान लगाना | Regular meditation

भगवान बुद्ध से लेकर श्री रामकृष्ण परमहंस तक और श्रीमद भगवद्गीता से लेकर पतंजलि के योग सूत्रों तक सभी ने मन की शक्ति जाग्रत करने और एकाग्रता बढ़ाने के लिए ध्यान को ही सर्वश्रेष्ठ उपाय बताया है। ध्यान लगाने की विधि सरल है किन्तु इससे होने वाले फायदे अलौकिक हैं। पतंजलि योगसूत्र में है भी-

“ध्यानहेयास्तद्वृत्तयः”

(By meditation, their modifications to be avoided)

  1. ब्रह्मचर्य का पालन | Follow celibacy

ब्रह्मचर्य के पालन से शरीर में तेज़ उत्पन्न होता है जिससे मन में मेधा शक्ति का विकास होता है। यही मेधा शक्ति है जो मनुष्य में स्मरण शक्ति को विकसित करती है। स्वामी विवेकानंद ने ब्रह्मचर्य के पालन से ही ऐसी एकाग्रता प्राप्त की थी कि वे एक बार जो भी पढ़ लेते थे वह उन्हे हमेशा के लिए याद हो जाता था। ध्यान केवल उन्ही लोगों का प्रबल और उच्च-स्तर का  होता है जो ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं। बिना ब्रह्मचर्य का पालन किए हुए ध्यान लगाना केवल अपना समय बर्बाद करना है।

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  1. हिंसा, ईर्ष्या, लालच, दंभ और चोरी जैसी भावनाओं का त्याग करना

Renounce feelings of violence, jealousy, greed, snobbery and theft

यदि आप के अंदर कोई भी दुर्भावना है तो उसका तुरंत त्याग कर दें। दुर्गुणों और दुर्भावना के रहते कोई भी व्यक्ति अपने मन को शुद्ध नहीं कर सकता है। दुर्भावना के रहने से चित्त में वृत्तियाँ उठती रहती हैं और नकारात्मक शक्ति बढ़ती है जो मन को शांत नहीं होने देती है। व्यर्थ की कपोल-कल्पना और भविष्य की चिंता में अपने मन को उलझाए ना रखें।   

  1. शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए व्यायाम करना

Exercise to keep the body healthy

यह कहावत सही है कि एक स्वस्थ्य मन एक स्वस्थ्य शरीर में ही वास करता है। नियमित रूप से योग और चाहें तो  अन्य कोई व्यायाम करें। व्यायाम के बाद रात में भरपूर नींद भी लें। छात्र हैं तो खेल-कूद में भी भाग लें।

  1. सही और पर्याप्त मात्र में पोशक तत्वों को आहार में शामिल करना

Including the right and sufficient amount of nutrients in the diet

आपके भोजन में वो सभी पौष्टिक तत्व होने चाहिए जिनकी आवश्यकता हमारे शरीर के साथ मन को भी होती है। ब्राह्मी, बादाम, अखरोट, ताजे फल, तुलसी के पत्ते और शंखपुष्पी इत्यादि को भोजन में किसी न किसी रूप में शामिल करना चाहिए। ये मन के लिए बहुत पौष्टिक माने जाते हैं। गरिष्ठ और फास्ट-फूड शरीर के लिए हानिकारक हैं।

  1. महान व्यक्तियों का अनुसरण करना और रचनात्मक कार्यों में लगना

Following great people and engaging in creative work

मन जब रचनात्मक कार्य में लगा होता है तो उसे कुछ सीखने को मिलता है। हम जैसा सोचते हैं वैसे ही बन जाते हैं। इसलिए हमेशा महान व्यक्तियों के बारे में ही चिंतन करना चाहिए। इसका एक फायदा यह भी है कि यह हमें दुर्भावनाओं से दूर रहने में मदद करेगा। मन, वाणी और कर्म से एक सज्जन व्यक्ति बने रहना और दूसरों को दुख नहीं देना यह ऐसी चीजें हैं जो मन को सकारात्मक शक्ति से भर देती हैं।

मानसिक स्वास्थ्य के महत्व के प्रति विश्व स्वास्थ्य संगठन ( World Health Organisation) भी सचेत कर चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन हर साल 10 अक्तूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाता है। हालांकि अच्छी खबर यह है कि पिछले कुछ वर्षों से सभी देशों की सरकारों और निजी कंपनियों ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिये हैं। चाहे हम विद्यार्थी हों या कोई भी काम करने वाले हों, मन के एकाग्र होने से हमारी कार्यक्षमता में बढ़ोत्तरी होती है। योगियों और तपस्वियों के लिए तो मन को नियंत्रित करना ध्यान-साधना का पहला कदम है। 

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