दिल को छू जाने वाली एक माँ के ममता की कहानी | माँ kahaani

1

Mother Love Heart Touching Hindi Kahani

माँ का दिल और ममता की कहानी

रमेश अब बड़ा हो गया था पढ़लिखकर अब उसकी एक अच्छी सी नौकरी एक शहर में भी लग गयी थी कुछ दिनों के बाद उसके माँ बाप के उसकी शादी एक सुंदर और सुशिल लड़की से करा दिया जो की वह भी नौकरी करती थी अब रमेश और पत्नी दोनों जॉब करते हुए एक साथ ही शहर में बस गये थे कुछ दिनों के पश्चात रमेश के पिता जी भी अब इस दुनिया को छोडकर चले गये जिसके बाद उसकी माँ एकदम सी अकेले सी हो गयी थी जिसके बाद कुछ दिनों के बाद रमेश अपनी माँ को अपने साथ रहने के लिए शहर ले आया

माँ kahaani

जिसके बाद शहर में आकर रमेश की माँ खुद को एकदम अकेले पाती थी इस तरह उन्हें भी अच्छा नही लगता था लेकिन एक माँ अपने बेटे की हमेसा ख़ुशी ही चाहती है सो धीरे धीरे वह शहर में रहना भी सीख गयी थी लेकिन रमेश और और उसकी पत्नी हमेसा अपनी माँ को समझाते रहते थे की ऐसा मत करो, ये मत करो, मतलब की वे अपने आगे माँ को गाँव की एक तरह से गवार ही समझते थे लेकिन माँ की दिल तो हमेसा से अपने बच्चो के लिए बड़ा ही होता है सो वे सभी बाते चुपचाप सुनकर हां में हा मिलाकर रह जाती थी

एक दिन की बात है सुबह रमेश की पत्नी को ऑफिस जल्दी जाना था सो वह सबकुछ जल्दी से तैयार करके रमेश का खाना पैक करके ऑफिस चली गयी

फिर इसके बाद रमेश भी जल्दी जल्दी तैयार होकर ऑफिस निकल गया था फिर कुछ समय बाद रमेश की माँ ने देखा की उसका बेटा तो खाने का लंच बॉक्स तो घर पर ही भूल गया है तो माँ ने बिना देर करते हुए फटाफट ऑफिस पहुच गयी और पास में एक कुर्सी पर बैठ गयी क्युकी कम्पनी में बाहर के व्यक्तियों को अंदर जाने के लिए मना था

सो फिर बेटे को दिक्कत ना हो इसलिए फोन न करके मैसेज किया लेकिन रमेश अपने काम में बीजी था सो माँ के मैसेज पर ज्यादा ध्यान ना दिया, लेकीनं उसकी माँ बाहर कबसे उसका इंतजार कर रही थी, इस तरह कई घंटे बीत गया और इस बीच कई मैसेज भी किया लेकिन रमेश का कोई उत्तर नही आ रहा था, इस तरह रमेश की माँ को चिंता होने लगी थी

लेकिन रमेश अपनी माँ के कई मैसेज आने के बाद वह अंदर ही अंदर खूब गुस्सा होने लगा था आज तो उसने तय कर लिया था की आज घर जाकर माँ को खूब अच्छे तरह से समझा देगा की यह उसका गाँव नही है जो कुछ भी मनमानी करती रहेगी और इस तरह शाम हो गया अब रमेश घर जाने के लिए कम्पनी के बाहर निकला तो देखा तो उसकी माँ तो यही खड़ी है जिसे देखकर उसका गुस्सा अब सातवे आसमान पर था और बिना कुछ पूछे ही अपनी माँ को डाट फटकारने लगा की पहले तप घर में खाली बैठे बैठे मैसेज से परेशान करती रहती है और अब तो उसके कम्पनी में भी आ गयी है आखिर उनका यह गाँव नही है जो मनमानी करती रहेगी

यह सुनकर रमेश की माँ ने खाने का टिफिन रमेश की ओर आगे बढ़ा दिया, जिसे देखकर रमेश को अब समझते हुए देर ना लगी की वह अपना खाना भूल गया था जिसे माँ ने उसे देने के लिए यहा आई थी

इसके बाद रमेश की माँ बोली “बेटा भले ही तुम बड़े हो गये हो, बड़े शहर में रहने लगे हो, ब्ल्हे ही अच्छे बुरे की ज्यादा समझ आ गयी हो, लेकिन मेरे लिए आज भी मेरे कलेजे का टुकड़ा ही हो जिसे मैंने बचपन से लेकर आजतक पालते हुए आ रही हो,”

रमेश को अब आँखे खुल चुकी थी की आखिर उसकी माँ उसकी परवाह करते हुए खाना लेकर आई थी जिसे वह बिना सोचे समझे अपनी माँ को ही डांटे जा रहा था, अब वह अपने किये हुए पर बहुत पछतावा हो रहा था जिसे देखकर माँ ने उसे एकबार फिर से अपने गले लगा लिया, और इस तरह रमेश अब आगे से खुद को माँ के लिए बदल लिया था, अब उनकी पहले से ज्यादा अच्छे से देखभाल करने लगा था जिसके बाद माँ को अब शहर भी अच्छा लगने लगा था क्युकी अब उसका बेटा फिर से उसे मिल गया था

कहानी से शिक्षा :-

इस कहानी से यही शिक्षा मिलती है की एकतरफ जहा हम पढ़ लिखकर खुद को ज्यादा ही समझदार समझने लगते थे जिससे जाने अनजाने में माता पिता के बातो को गलत साबित करने में लग जाते है लेकीन हम सभी यह भूल जाते है जिस माँ बाप ने अपने बच्चो को खुशियों के लिए अपनी खुशियों तक का त्याग कर दिए हो वो भला माँ बाप अपने बच्चो का कैसे बुरा कर सकते है

हर माँ बाप की यही इच्छा होती है की उनके सन्तान उनकी बुढ़ापे की लाठी बने लेकिन विकास की अंधी दौड़ में हम सभी अपनी मूलो को भूलते जा रहे है जो की बहुत ही सोचनीय है अगर हमारे माँ बाप हमे पाल सकते है तो हम उन्हें बुढ़ापे में उन्हें क्यों ही पाल सकते है यही तो हर माँ बाप की इच्छा होती है तो आप सभी अपने माँ बाप के उम्मीदों पर जरुर खरे उतरे .

तो आप सबको यह पोस्ट माँ की ममता की कहानी कैसा लगा कमेंट में जरुर बताये और इसे शेयर भी जरुर करे

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here