महर्षि वाल्मीकि जी के 35 अनमोल विचार Valmiki Quotes Hindi


Valmiki Anmol Vichar Quotes in Hindi

रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि जी के अनमोल विचार

सदियों से ही भारत भूमि को देव भूमि कहा जाता है यहा समय समय पर अनेक महापुरुषों, संतो ने जन्म लिया है और अपने कार्यो से पूरे विश्व को जीवन जीने की सच्ची राह दिखाई है इन्ही कड़ियों में महान ग्रन्थ रामायण के रचयिता आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी | Maharshi Valmiki का भी नाम आता है जिन्होंने अपने तप और ज्ञान के बल पर भगवान श्रीरामचन्द्र जी के जीवन पर आधारित महान ग्रन्थ “रामायण” की रचना की, जिसमे कही गयी बाते हर मनुष्य को जीवन की सच्ची राह पर चलने का मार्ग दिखाते है

तो चलिए आज हम इस वाल्मीकि जयंती | Valmiki Jayanti पर महर्षि वाल्मीकि जी के अनमोल विचारो | Valmiki Anmol Vichar को जानते है

महर्षि वाल्मीकि जी के जीवन की राह को बदलने वाले 35 सच्चे अनमोल वचन और अनमोल विचार  

Maharshi Valmiki Top 35 Anmol Vichar Quotes in Hindi

Anmol Vachan:-1

सत्य ही सबका मूल है और सत्य से बढकर कुछ भी नही है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-2

माता पिता की सेवा और उनकी आज्ञा पालन जैसा धर्म कोई नही है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-3

जन्म देने वाली माँ और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढकर होता है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-4

सहयोग करने वाले और सबसे मिलकर रहने वाले की सदैव जीत होती है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-5

यदि आप का संकल्प दृढ़ है तो कोई भी काम आसान बना सकते है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-6

हमेसा सुख ही मिले ऐसा कदापि सम्भव नही है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-7

जो लोग गलत रास्ते पर चलते है उन्हें कभी भी सच्चा ज्ञान नही प्राप्त होता है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-8

यदि आपका चरित्र उत्तम नही है तो आप कभी भी महान नही बन सकते है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-9

दुःख और संकट की घड़ी हमेसा बिना बताये और बिना बुलाये ही आते है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-10

क्रोध से व्यक्ति के गुणों का नाश हो जाता है इसलिए हमेसा क्रोध करने से बचना चाहिए

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-11

माता पिता की सेवा करना सदैव कल्याणकारी होता है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-12

दुखी लोग कौन सा पाप नही करते है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-13

संसार में ऐसे बहुत कम लोग होते है जो भले ही कठोर हो लेकिन हित की बात कहते है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-14

इस दुनिया में दुर्लभ नाम की कोई चीज नही है लेकिन अगर उत्साह का साथ न छोड़ा जाय

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-15

घमंड और अहंकार मनुष्य का सबसे बड़े दुश्मन है जो सोने के हार को भी मिट्टी का बना देते है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

वाल्मीकि जयंती पर वाल्मीकि जी अनमोल विचार

Valmiki Jayanti Par Valmiki Ji Ke Vichar

Anmol Vachan:-16

मनुष्य के अंदर अगर इच्छा शक्ति हो तो वह बड़े से बड़ा काम भी आसानी से कर सकते है इच्छाशक्ति से ही रंक भी राजा बन जाता है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-17

किसी वादे को तोड़ने से किये गये सारे अच्छे कर्म भी नष्ट हो जाते है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-18

किसी व्यक्ति से ज्यादा मोह रखना भी दुःख का कारण बन सकता है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-19

संघर्ष से ही आप महान बन सकते है यदि जीवन में आगे बढना है तो तो संघर्ष करना भी जरुरी है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-20

हम गर्व, अहंकार और कुटिलता का परित्याग कर देना चाहिए और और दुसरे लोग कितनी भी आलोचना करे उसकी चिंता नही करनी चाहिए

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-21

माया के दो भेद है विद्या और अविद्या

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-22

उत्साह से बढकर कोई दूसरा बल नही है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-23

प्रियजनों सेमोहवश अत्यधिक प्रेम से यश भी चला जा सकता है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-24

जिस प्रकार दृष्टि सदैव शरीर के हित में लगी रहती है ठीक वैसे ही एक राजा को भी अपने सत्य और राष्ट्र धर्म पर चलते हुए प्रजा हित में लगा रहना चाहिए

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-25

अच्छे स्वाभाव वाले लोग अपने घर के सोने गहनों और मित्र में कोई फर्क नही समझते है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-26

जैसा राजा का आचरण होता है ठीक वैसा ही प्रजा भी आचरण करती है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-27

जो व्यक्ति अपने पक्ष को छोडकर दुसरो के पक्ष में मिल जाता है फिर उस पक्ष के नष्ट होने अपर वः खुद ही नष्ट हो जाता है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-28

जो व्यक्ति वीर और बलवान होते है वे जलहीन बादलों के समान खाली गर्जना नही करते है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-29

संत पुरुष हमेसा लोगो को दुःख से बचाने के लिए कष्ट सहते है जबकि दुष्ट प्रवित्ति के लोग दुसरो को हमेसा दुःख में डालने के लिए ही जीते है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-30

नीच व्यक्ति की नम्रता भी अत्यंत दुखदायी होती है जैसे अंकुश, धनुष, सांप और बिल्ली हमेसा झुककर ही वार करते है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-31

सेवा के लिए उपयोग किया बल हमेसा टिकेगा और अमर होगा

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-32

मन कभी भी इच्छित वस्तु प्राप्त होने के बाद भी संतुष्ट नही होता जैसी किसी फूटे हुए बर्तन में चाहे कितना भी पानी भर दिया जाय लेकिन वह कभी नही भरता

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-33

किसी के प्रति दूषित भावना रखने से अपने मन खुद मैले हो जाते है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-34

आप साहसी, कायर या बलवान हो या आपके अंदर दुर्गुण भावना है यह आपके चरित्र से ही पता चल जाता है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

Anmol Vachan:-35

राजा को हमेसा उच्च चरित्र और आदर्शवादी होना चाहिए तभी वह प्रजापालक कहलाता है

महर्षि वाल्मीकि | Maharshi Valmiki

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