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प्रार्थना की शक्ति एक दिलचस्प कहानी

Story of Power of Prayer in Hindi

प्रार्थना की शक्ति एक सीख देती कहानी

यदि आप ईश्वर में विश्वास रखते है तो आपके सच्चे मन से की गयी प्रार्थना ईश्वर जरुर सुनते है प्रार्थना एक ऐसी शक्ति है जिसके द्वारा कोई भी जीव ईश्वर से अपने मन की बातो को पंहुचा सकता है और जिनको ईश्वर पर विश्वास होता है वे बड़े से बड़े मुश्किलों का सामना डटकर युही कर जाते है इसी सोच पर आधारित हम आपको आज एक कहानी बताने जा रहे है जिनसे हमे एक अच्छी सीख भी मिलती है तो चलिए जानते है सच्ची प्रार्थना की शक्ति की ये कहानी..

सच्ची प्रार्थना की शक्ति एक कहानी

Story of Power of Prayer in Hindi

story

एक गाव के थोड़ी दूर एक तालाब था तालाब बहुत ही गहरा था जो की हमेसा पानी से भरा रहता था जिसके चलते उस तालाब में रंगबिरंग मछलिया और अनेक जीव रहते थे मछलिया देखने में बहुत सुंदर लगती थी जिसके चलते गाव वाले उन मछलियों को कभी नही मारते थे और गाव के लोग उन मछलियों को आटे की गोलिया भी खिलाते थे जिस कारण से उस तालाब की मछलिया, मेढक जैसे जीव बड़े शांति से अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे.

एक बार की बात है भयंकर सूखे के कारण बारिश नही हुई जिसके कारण तालाब का पानी तेजी से सूखने लगा था जिस कारण से उस तालाब के आसपास रहने वाले जन्तु वहा से दूर जाने लगे थे जिसके कारण मछलिया अब चिंतित होने लगी थी दिन प्रतिदिन पानी तेजी से सूखता ही जा रहा था और कड़ी धुप के कारण बचा पानी भी गर्म होने लगा था जिस कारण से उस तालाब के मेढक और मछलिया बहुत ही व्याकुल हो गये.

सूखे के कारण अब अब तालाब के आस पास एकदम वीरान सा हो गया सभी पक्षी दूर चले जा रहे थे और धीरे धीरे सारे मेढक भी वहा से जाने लगे लेकिन बेचारी मछलिया वह पानी के बिना कही तैर ही नही सकती तो दूर जाने का कोई सवाल ही नही था अब वह बेचारी मछलिया करे तो क्या करे उन्हें कुछ समझ में नही आ रहा था.

लेकिन तालाब में एक ऐसा मेढक भी था जो वह कही नही गया जिसे देखकर मछलियों ने कहा “अरे भाई आप तो यहा से जा सकते है और अपनी जान भी ऐसे बचा सकते है” इसपर मेढक ने कहा “मुझे ये अपनी जन्मभूमि बहुत ही प्यारी है इसे छोडकर मै कही नही जा सकता हु, मैंने इसी तालाब में जन्म लिया है और इसी में पलकर बड़ा हुआ हु हर सुखदुख में आप लोगो ने मेरा साथ दिया है तो भला इस दुःख की घड़ी में आप लोगो की छोडकर कैसे जा सकता हु”

इसपर मछलियों ने कहा की “हम तो मजबूर है हम सब आपकी तरह फुदक फुदक कही जा भी नही सकते है और ना ही पक्षियों की तरह उडकर अपना जान बचा सकते है लेकिन तुम तो कही भी जा सकते हो और अपनी जान भी बचा सकते है”

इसपर मेढक ने कहा की “भला मै तुम लोगो का साथ छोडकर कैसे जा सकता हु, सब दिन बराबर नही होते है हर दुःख के दिन के बाद सुख के दिन जरुर आते है इसलिए हमे ईश्वर पर विश्वास करना चाहिए ईश्वर दयालु है जो सबकी सुनता है और सबपर दया भी करता है और यदि सभी मिलकर ईश्वर से प्रार्थना करे तो ईश्वर हम सबकी फरियाद जरुर सुनेगा, इसलिए आज शाम को हम सभी मिलकर ईश्वर से प्रार्थना करते है ईश्वर हमारी भी सुनेगा”.

और मेढक के कहे अनुसार सभी मछलिया शाम को ईश्वर की प्रार्थना करते है और सबके मन में यह अटूट विश्वास था की ईश्वर उनकी जरुर सुनेगा.

और यह सब घटना उसी गाव के लडके ने देखा तो तो वह सारी बात अपने गाव वालो को बताया की कैसे इस धरती के छोटे से छोटे जीव भी ईश्वर में अटूट विश्वास रखते है और हर जीव को अपने मातृभूमि से प्यार होता है जबकि हम सभी अपने छोटे से छोटे स्वार्थ के लिए एक दुसरे से लड़ते रहते है.

इसलिए हमे भी उन मछलियों की तरह ईश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए, इसके बाद गाँव के सभी लोगो ने मिलकर सच्चे मन से ईश्वर से प्रार्थना किया और फिर ईश्वर की दया से रातहोते होते आकाश बादल से घिर आये और फिर बहुत जोरो से खूब बारिश हुआ और वह तालाब सहित चारो तरफ पानी ही पानी भर गया जिसके बाद एक बार फिर से चारो तरफ खुशहाली आ गयी.

कहानी से शिक्षा

जैसा की कहा भी गया है:-

“जननी-जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी”

अर्थात जननी यानी माता और जन्मभूमि का स्थान स्वर्ग से महान और श्रेष्ठ होता है यानी मातृभूमि से बढ़कर कोई कही और स्वर्ग नही है इसलिए हमे अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए जान देनी पड़े तो कभी भी पीछे नही हटना चाहिए और सुख और दुःख के दिन हर किसी के जीवन में आते है लेकिन कभी भी दुखो से घबराकर हमे अपना धैर्य नही खोना चाहिए और ईश्वर में अटूट विश्वास रखते हुए सभी परिस्थितियों का डटकर मुकाबला करना चाहिए और जो लोग दुःख में अपना धीरज नही खोते है वही लोग दुखो का सामना भी कर पाते है.

तो आप सबको यह सीख देती कहानी सच्ची प्रार्थना की शक्ति कैसा लगा प्लीज हमे जरुर बताये.

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