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संगत का असर एक छोटी सी कहानी – Sangat Ka Asar Laghu Katha

Sangat Ka Asar Laghu Katha

संगत का असर एक छोटी कहानी

कहा जाता है न की जो जैसे लोगो के साथ रहता है वैसा ही उसके विचार होते है और वैसी ही सोच भी हो जाती है और जो कुछ भी उसके अंदर वैसी ही आदते विकसित होती है वो सब संगति का असर ही होता है जैसा की आप जानते है की यदि आप अच्छे लोगो के साथ रहते है तो आपको कुछ अच्छा ही सीखने को मिलता है और बुरे सोच वाले लोगो के साथ रहते है तो निश्चित ही आपकी सोच और आदते भी वैसे ही बन जाती है, तो आईये इसी संगति के असर पर आधारित एक छोटी सी कहानी Sangat Ka Asar Ek Hindi Kahani | Sangati Ka Prabhav Story In Hindi को जानते है.

संगति का असर एक कहानी

Effect of Company Short Story in Hindi

Short Story in Hindi

एक शहर में बहुत अमीर रहता है उसके पास इतना धन था की उसे किसी प्रकार की चिंता नही थी लेकिन उसका एकलौता लड़का अपने पिता के धन पर खूब ऐश करता था जिसके कारण उसके बहुत सारे ऐसे दोस्त बन गये थे जिनकी बुरी आदतों से उस अमीर का लड़का भी घिर गया था उसके अंदर भी तमाम ऐसी बुरी आदतों का विकास हो गया था जिससे उसका अमीर पिता बहुत चिंतित रहने लगा था.

Sangati Ka Prabhav Story In Hindi

अब वह अमीर आदमी अपने बेटे की आदतों को सुधारने के लिए हमेसा चिंतित रहने लगा था उसने हर प्रकार से समझाने की कोशिश किया पर उसका बेटा अपने पिता की बातो को ध्यान ही नही देता था.

तो ऐसे में परेशान होकर उसके पिता ने उसे एक सबक के जरिये संगति के असर के फायदे और नुकसान के बारे में सिखाना चाहा इसके लिए वह अमीर आदमी अपने बेटे के साथ बाजार गया और वहा से कुछ सेव ख़रीदे और उन्ही सेव के साथ एक सड़ा हुआ सेव खरीद लिया फिर अपे बेटे के साथ घर लौटने के बाद सभी सेव को अलमारी में रखने को कहा पिता की आज्ञा पाकर बेटे ने सभी सेव को एक साथ अलमारी में रख दिया.

संगति का प्रभाव पर कहानी

फिर कुछ दिन बाद पिता ने अपने बेटे से अलमारी में से सभी सेव लाने को कहा फिर पिता की आज्ञा पाकर वह बेटा अलमारी में से सेव लेने गया और जैसे ही अलमारी खोला, तो देखा की सभी सेव सड़ चुके थे जिसे देखकर वह बहुत ही हैरान हुआ और सेव के सड़े होने की बात अपने पिता को बताया.

अपने बेटे की बात सुनकर पिता बोला तो देखा बेटा हमने उस दिन बाजार में अच्छे सेव के साथ एक सड़ा हुआ भी सेव ख़रीदा था जो की अच्छे सेव के साथ रखने पर सड़े सेव के संगत से सभी अच्छे सेव भी ख़राब हो चुके है.

यही बात तुम्हारे साथ भी फिट बैठती है यदि तुम बुरे दोस्तों की संगति में रहते हो तो तुम्हारी सोच और आदते भी वैसे ही हो जायेगी फिर चाहकर भी तुम अच्छे इन्सान नही बन सकते हो.

पिता की बात सुनकर अब उसको समझ में आ गया था की कुसंगति के प्रभाव से अच्छा आदमी भी बुरा और सत्संगति की प्रभाव से बुरा इन्सान भी अच्छा बन सकता है और फिर उसने अपने पिता से अपने किये हुए गलती पर माफ़ी मांगकर आगे से गलत लोगो की संगति छोड़ने का वचन दिया.

कहानी से शिक्षा

वो कहा गया है न जैसी संगत वैसी ही रंगत यानी आप जैसे लोगो के साथ रहेगे वैसा ही बनेगे तो आपको भी अच्छा बनना है तो अच्छे लोगो के साथ अपनी संगति बनाये क्युकी अच्छे लोगो की सलाह आपको अच्छा ही बनाती है.

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