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मेहनत का फल हिन्दी कहानी | Mehnat Ka Phal Story in Hindi

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आत्मविश्वास से हमे आगे बढने की शक्ति मिलती है, जो लोग मेहनती होते है, वे लोग अपने मेहनत के बल पर सफलता प्राप्त कर लेते है, तो चलिए आज इस पोस्ट में आत्मविश्वास और मेहनत का फल हिन्दी कहानी Mehnat Ka Phal Moral Hindi Story बताने जा रहे है, जिनसे हमे मेहनत करने की प्रेरणा मिलती है.

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अतिआत्मविश्वास और मेहनत का फल हिन्दी कहानी

Aatmvishwas aur Mehnat ka Fal Hindi Moral Hindi Story

Mehnat Ka Phal Story in Hindiबहुत समय पहले की बात है किसी शहर में एक कुशल चित्रकार रहता था चित्रकार अच्छे अच्छे चित्रों को बनाने में निपुण था जिससे वह अपनी कला अपने पुत्र को भी सिखाया जिसके बाद दोनों चित्र बनाते और बाजारों में बेचते थे उस समय पिता को अपने 1 चित्र के बदले 2 रूपये मिलते थे जबकि बेटे के बनाये हुए 1 चित्र के बदले 1 रूपये मिलते थे.

जिसके बाद अक्सर बाजारों से वापस लौटने के बाद हर रोज पिता अपने पुत्र को अपने पास बैठाकर उसकी गलतियाँ बताते थे और उन्हें अपने मार्गदर्शन में ठीक करवाते थे और पुत्र पिता की आज्ञा मानकर अपने चित्रकारी के काम में लगातार सुधार करता रहा जिसके कारण अब धीरे धीरे बेटे की चित्रकारी में सुधार होने की वजह से उसके चित्र भी 2 रूपये में बिकने लगे जिससे अब पुत्र बहुत ही खुश था.

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इसके बाद भी पिता अपने पुत्र की लगातार चित्रकारी में निकलने वाले दोष और गलतियों को बताता रहा जिसके फलस्वरूप पुत्र के चित्रकारी में और निखार आता गया जिसके कारण अब उसके प्रत्येक चित्र के बदले 5 रूपये मिलने लगे जबकि उसके पिता के चित्र अब भी 2 रूपये में ही बिकते थे इसके बाद भी उसके पिता ने अपने पुत्र की गलतिया बताने और उन्हें सुधारने का काम बंद नही किया.

जिसके चलते एक दिन पुत्र ने झुंझलाकर अपने पिताजी से कहा, “आप हमेसा मेरी चित्रकारी में गलतियाँ ही निकालते रहते है अब तो मेरी कला भी आप से अच्छा हो गया है तभी तो मेरे बनाये चित्र 5 रूपये में जबकि आप के चित्र में अभी भी सिर्फ 2 रूपये में ही बिकते है”

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तो इस पर पिता ने अपने पुत्र को समझाते हुए कहा,

“बेटा ! जब मै तुम्हारी उम्र का था तो मुझे भी अपनी कला पर अतिआत्मविश्वास और अभिमान हो गया था जिसके चलते मुझे लगने लगा था की मेरी ही कला सर्वश्रेष्ठ है जिसके चलते मैंने अपनी गलतियों को सुधारने की बात भी सोचना छोड़ दिया था जिससे चलते मेरी कला की प्रगति भी रुक गयी और वह आज के ज़माने में 2 रूपये से ज्यादा में बिक नही सकी और मै नही चाहता की जो मुझे अपनी कला पर घमंड हुआ था वो तुम्हे भी हो इसलिए मै तुम्हारी गलतियों को लगातार सुधारने की बात करता हु जिसके चलते तुम्हारे कला में और निखार आ जाये”

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पुत्र को अपने पिता की बात अब समझ में आ गयी और फिर उस दिन के बाद से वह अधिक अपने काम में मेहनत करने लगा जिसके कारण दिन पर दिन उसके कला में और निखार आता गया और वह एक दिन सर्वश्रेष्ठ चित्रकार बना

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जैसा की हम सब जानते है की मेहनत का फल हमेसा मीठा ही होता है इसलिए हमे जब भी कुछ सिखने का मौका मिले तो हमे अपने ज्ञान का अभिमान नही करना चाहिए क्यूकी अक्सर लोगो को अपनी गलती कभी भी दिखाई नही देती है और लोग अक्सर खुद को अपने आप से ही सर्वश्रेष्ठ मान लेते है ऐसा करना कदापि एक भूल होती है इससे हमे बचना चाहिए.

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और जब हमे अपनी गलतियों का अहसास कराया जाय तो हमे विनम्रतापूर्वक उनसे सीख लेते हुए अपने सीखते रहना चाहिए क्यूकी निरंतर मेहनत ही सफलता की कुंजी है और जब हम अपने काम में मेहनत करेगे तो निश्चित ही इसका हमे हमेसा मीठा फल ही मिलेगा.

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