वसंत पंचमी सरस्वती पूजा पर निबन्ध Vasant Panchami Saraswati Puja Essay

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Vasant Panchami Puja Sarasvati Puja Essay in Hindi | Essay on Saraswati Puja in Hindi

सरस्वती पूजा वसंत पंचमी पर निबन्ध

वैसे तो भारत देश में अनेको धर्म के अनेक त्यौहार मनाये जाते है उनमे से हिन्दू धर्म में वसंत पंचमी यानी माँ सरस्वती पूजा का भी विशेष महत्व है हिन्दू धर्म में माँ सरस्वती को विद्या की देवी कहा जाता है तो स्वाभाविक है की इस सभी पढने वाले विद्यार्थी माँ सरस्वती की पूजा अर्चना करते है और माँ सरस्वती की पूजा बसंत ऋतू के पाचवे दिन यानी पंचमी को पढता है तो इसे वसंत पंचमी पूजा | Vasant Panchami Puja भी कहा जाता है

तो आईये जानते है माँ सरस्वती की पूजा के दिन यानी वसंत पंचमी पूजा के बारे में विशेष जानकारी और इसके महत्व के बारे में.

वसंत पंचमी सरस्वती पूजा पर निबन्ध

Essay on Vasant Panchami Puja Sarasvati Puja in Hindi

Saraswati Puja

वसंत पंचमी हिन्दू धर्म का एक प्रमुख त्यौहार | Festival है इस दिन विद्या की आराध्य देवी माँ सरस्वती की पूजा | Maa Sarawati Ki Puja की जाती है पूरे विश्व में भारत ही एक ऐसा देश है जहा पर 6 ऋतुये पाई जाती है जिन्हें हम बसंत ऋतु , ग्रीष्म ऋतु, वर्षा ऋतु , शरद ऋतु, हेमन्त ऋतु और शिशिर ऋतु अर्थात पतझड़ के नाम से जानते है जिनमे बसंत ऋतु का मौसम काफी सुहावना माना जाता है और बसंत ऋतु को ऋतुओ का राजा यानी ऋतुराज भी कहा जाता है क्यूकी इस मौसम में पूरी धरती हरियाली से भर जाती है और भारत जैसे देश कृषी प्रधान देश होने के कारण इस मौसम में खेती गेहू और सरसों की खेती की जाती है गेहू के खेत जो की पूरी धरी को मानो हरे रंग की साड़ी से ढक लेती है तो तो पीले सरसों के खेत तो मानो धरती की सुन्दरता में सोने जैसे चार चाँद लगा देते है और इन सब हरियाली को देखकर हर किसी का मन मोहक हो जाता है

हिन्दू धर्म के अनुसार यह माघ महीनें में जब बसंत ऋतु का आगमन होता है तो माघ महीने के 5वे दिन यानी पंचमी को बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है इस दिन स्कूल कॉलेज में माँ सरस्वती पूजन के रूप में मनाया जाता है इस दिन सभी विद्यार्थी विद्या की देवी माँ सरस्वती की पूजा की जाती है

बसंत पंचमी की कथा | Vasant Panchmi Ki Kahani

वसंत पंचमी क्यों मनाया जाता है | Vasant Panchami Saraswati Puja kyo Manaya Jata Hai

हिन्दू धर्म मान्यतो के अनुसार जब ब्रह्मा जी सृष्टी यानि इस संसार की रचना तो कर दिए थे लेकिन उन्हें इस संसार में कुछ कमी दिखाई पद रही थी पूरे संसार में हर तरफ एक मौन छाया हुआ था कही कोई भी ध्वनी का नामोनिशान नही था पूरा जगत शांतचित था फिर इस कमी को दूर करने के लिए ब्रह्माजी ने विष्णु भगवन के आज्ञा के पश्चात अपने जल कमंडल से धरती पर जल छिड़का जिससे एक अद्भत शक्ति वाली चतुर्भुज हाथ वाले नारी का अवतार हुआ जिनके हाथ में वीणा और वरदान देने के मुद्रा में थी और उनके अन्य हाथो में पुस्तक और माला थी,

और ब्रह्मा जी कहने पर जैसे ही उस शक्ति ने वीणा बजायी पूरे जगत में ध्वनि का प्रसार हो गया और समस्त जीवजगत को एक वाणी प्राप्त हो गयी नदिया जल पक्षी सबसे में एक वाणी उत्पन्न हो गया तब ब्रह्माजी ने वीणा की देवी को सरस्वती के नाम से पुकारा जो की ज्ञान और संगीत की भी देवी कहलाती है जिसके कारण माँ सरस्वती के इस दिन उत्पत्ति होने के कारण बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती की विशेष पूजा अर्चना की जाती है यानी बसंत पंचमी को माँ सरस्वती का जन्मदिवस भी कहा जाता है इस कारण बसंत पंचमी का त्यौहार माँ सरस्वती के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है

बसंत पंचमी सरस्वती पूजा का महत्व

Vasant Panchami Saraswati Puja Ka Mahatva

Vasant Panchami

वसंत ऋतू आते ही पूरी धरती हरियाली से खिल उठती है इन्सान के साथ साथ पूरी धरती भी हरियाली से प्रफुल्लित दिखाई देती है चारो तरफ पक्षियों के मधुर आवाज़ सुनाई देती है क्यूकी इस ऋतू के शुरुआत के साथ ठंडी भी धीरे धीरे कम होने लगती है और सूर्य का उदय भी धीरे धीरे पूरी तरह से होने लगता है जिसके कारण सूर्य की रौशनी से हरे हरे खेतो में पीले पीले सरसों मानो सोने जैसे प्रतीत होते है जो की धरती को मानो सोने से ढक दिया गया है जिसकी छटा देखने लायक होती है और जिसे देखते हर किसी का मन प्रफुल्लित हो उठता है इस कारण यह मौसम लोगो को काफी सुख और आनंद देने वाला प्रतीत होता है

और हिन्दू धर्म मानने वाले बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती के जन्मदिवस को पूरी धूमधाम से  मनाते है इस दिन जगह जगह माँ सरस्वती की प्रतिमा स्थापित किया जाता है और सुबह सुबह विधिवत माँ सरस्वती की पूजा अर्चना करते है और सभी पढने लिखने वाले विद्यार्थी माँ सरस्वती से विद्यारुपी वरदान की कामना करते है और हमारे देश में तो इस पर्व के बाद ही पूरे साल की पढाई की परीक्षा भी शुरू होती है इसलिए सभी विद्यार्थी अपने अपने परीक्षा में सफल हो ऐसी कामना करके माँ सरस्वती की पूजा वन्दन करते है

वसंत ऋतू में ही फाल्गुन महीने में रंगों के त्यौहार होली मनाया जाता है और होली के एक दिन पहले होलिका जलाई जाती है होलिका जलाने के लिए बसंत पंचमी के दिन लोग जगह जगह खाली स्थानों पर पूजा पाठ करके होलिका का स्थापना करते है और बसंत पंचमी से ही फिर रंगों का त्यौहार होली की भी शुरुआत हो जाती है

बसंत पंचमी सरस्वती पूजा कैसे करे

Vasant Panchmi Saraswati Puja Kaise Kare

बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती की पूजा की जाती है तो इस दिन हमे सुबह नहाधोकर सच्चे मन से माँ सरस्वती की पूजा अर्चना करनी चाहिए और यदि कही भी माँ सरस्वती की प्रतिमा स्थापित हो उस पूजा में जरुर भाग लेना चाहिए और सचे मन से पूजा में ध्यान लगाना चाहिए क्यूकी माँ सरस्वती को विद्या की देवी कहा जाता है जिसपर भी माँ सरस्वती की कृपा होती है वह व्यक्ति निश्चित ही विद्यावान होता है,

ऐसी हिन्दू धर्म के मान्यताओ के अनुसार माँ सरस्वती को संगीत की देवी भी कहा जाता है और जो लोग अच्छा गाते है उन्हें अक्सर लोग कहते है उस व्यक्ति के कन्ठ पर माँ सरस्वती स्वय विराजती है जो लोग एक दुसरे से मीठा बोलते है उनकी वाणी में भी माँ सरस्वती का वास होता है, इसलिए हमे अपने लोगो के प्रति सारे गिले शिकवे भुलाकर प्रेमपूर्वक रहते हुए एक दुसरे का सम्मान करना सीखना चाहिए और कभी भी भूलवश भी गलत वाणी का प्रयोग नही करना चाहिए

तो आप सभी को बसंत पंचमी सरस्वती पूजा पर दी गयी विशेष | Vasant Panchami Saraswati Puja Essay जानकारी कैसा लगा कृपया कमेंट माध्यम से हमे जरुर बताये

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