श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण के कहे गये 50 अनमोल वचन


Shri Madbhagvad Geeta Me Shree Krishna Ke Anmol Vachan

श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश और अनमोल वचन

यदि आपको जीवन के सार को समझना है तो आप श्रीमद्भगवद्गीता को पढ़ सकते है श्रीमद्भगवद्गीता एक ऐसा ग्रन्थ है जिसमे जीवन के शुरुआत से लेकर अंत समय तक का रहस्य समझाया गया है जिसमे सम्पूर्ण जगत को एक मोहमाया माना गया है जिसमे अगर इन्सान एकबार फंस जाता है तो इस संसार चक्र से निकलना बहुत ही मुश्किल हो जाता है

इसी मोहमाया में फसकर जब महाभारत युद्ध के शुरू होने के दौरान अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण के सामने अपने हथियार रख दिए और अपने परिजनों से ही युद्ध लड़ने से मना कर दिया तो इसपर भगवान Shree Krishna ने अर्जुन को इस संसार की मोहमाया को समझाते हुए उपदेश दिया जिसे सुनकर अर्जुन की सारी मोहमाया दूर हो गया और फिर अर्जुन युद्ध लड़ने के लिए तैयार हुए

तो भगवान श्रीकृष्ण ने जो अर्जुन को उपदेश दिया उसे ही श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेश कहे गये जो की यह अनमोल वचन भगवान Shri Krishna के मुख से निकला था जो की पूरे संसार के लिए जीवन जीने का मार्ग दिखाते है

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Krishna Anmol Vachanतो चलिए आज हम सभी Shri Madbhagvad Gita में कहे गये भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश और अनमोल वचन | Anmol Vachan को जानते है

श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण के 50 उपदेश, अनमोल विचार और अनमोल वचन

Shri Madbhagvad Geeta Me Shree Krishna Ke 50 Anmol Vichar, Updesh & Anmol Vachan

Anmol Vachan:-1

क्यों व्यर्थ चिंता करते हो, किससे डरते हो

कौन तुम्हे मार सकता है आत्मा न पैदा होती है ना ही मरती है

यह सिर्फ शरीर का त्याग करती है

Anmol Vachan:-2

आत्मा न जन्म लेती है ना ही मरती है ना ही इसे जलाया जा सकता है

ना ही इसे जल से गिला किया जा सकता है आत्मा तो अमर अविनाशी है

Anmol Vachan:-3

मनुष्य या कोई भी जीव अपने भाग्य का निर्माता खुद होता है जो जैसा कर्म करता है उसका वैसा ही भाग्य बन जाता है

Anmol Vachan:-4

मै किसी भी जीव के भाग्य का निर्माण नही करता, और ना ही किसी को कोई फल देता है सभी अपने कर्मो को ही भोगते है

Anmol Vachan:-5

जिस प्रकार कपड़े फटने या पुराने होने पर लोग उसका त्याग कर देते है और नये वस्त्र धारण करते है ठीक उसी प्रकार आत्मा भी पुराने शरीर को छोडकर नये शरीर धारण करती है यही प्रकृति का जीवन चक्र है जो लगातार चलता रहता है

Anmol Vachan:-6

क्रोध करने से भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है फिर भ्रम से बुद्धि कार्य करना बंद कर देता है और जब बुद्धि कार्य करना बंद करती है तो तर्क शक्ति नष्ट हो जाती है और जब तर्क शक्ति नष्ट होता है तब उस व्यक्ति का पतन निश्चित है

Anmol Vachan:-7

ईश्वर इस ब्रह्माण्ड के सम्पूर्ण कण में व्याप्त है और सबसे परे भी है

Anmol Vachan:-8

जिन व्यक्ति को इस संसार रूपी मोहमाया का ज्ञान नही होता वे लोग इस जन्म और मृत्यु के चक्र में फसे रहते है

Anmol Vachan:-9

इस संसार में कुछ भी स्थिर नही है परिवर्तन ही संसार का नियम है

Anmol Vachan:-10

यदि जिस किसी ने भी जन्म लिया है उसका मृत्यु निश्चित है इसे टाला नही जा सकता है और जिसकी मृत्यु हुआ है उसका जन्म लेना भी निश्चित है

Anmol Vachan:-11

इस संसार में ऐसा कुछ भी नही है जो मेंरे बिना अपने अस्तित्व में रह सके

Anmol Vachan:-12

मन ही इन्सान या किसी जीव का शत्रु या मित्र होता है

Anmol Vachan:-13

यदि आप अपने मन को नियंत्रित नही करते तो वही मन आपका शत्रु मन बन जाता है और जो लोग अपने मन पर काबू पा लेते है उनके लिए इस दुनिया में कुछ भी असम्भव (Impossible) नही है

Anmol Vachan:-14

आप जैसा बनते हो वह आपके विश्वास के कारण ही होता है जो लोग जैसा विश्वास करते है ठीक वैसे ही बनते है विश्वास ही वह शक्ति है जो किसी मनुष्य के आत्मा को शक्ति और बल प्रदान करता है

Anmol Vachan:-15

निष्क्रिय होने के बजाय कार्य करना कही अधिक बेहतर है

Anmol Vachan:-16

इस दुनिया में नर्क जाने के 3 रास्ते है – 1– वासना, 2– लालच, 3- क्रोध

Anmol Vachan:-17

तुम क्या लेकर आये थे जो साथ लेकर जाओगे, जो लिया यही से लिया और जो दिया यही से दिया, खाली हाथ आये है और खाली हाथ ही जाना है

Anmol Vachan:-18

जो ज्ञानी होते है वे कर्म और ज्ञान को एक रूप में देखते है सच्चे अर्थो में वही सही देख पाते है

Anmol Vachan:-19

तुमने क्या खो दिया जो रोते हो,तुम क्या लाये थे जो तुमने खो दिया

तुमने क्या पैदा किया जो की नाश हो गया

तुम न तो कुछ लेकर आये थे ना ही कुछ लेकर जाओगे

जो लिया यही से लिया जो कुछ भी दिया यही से दिया

और जो लिया इसी ईश्वर से लिया और जो दिया इसी ईश्वर को ही दिया

Anmol Vachan:-20

सभी खाली हाथ हाथ आते है और खाली हाथ ही चले जाना है

क्यों व्यर्थ चिंता करते हो जो आज तुम्हारा है कल किसी और का था

और फिर कल किसी और का होगा

क्यों इसे अपना समझकर मगन हो रहे हो यही तुम्हारे दुखो का मूल कारण है

Anmol Vachan:-21

मनुष्य को सुख- दुःख, लाभ-हानि, हार- जीत के बजाय अपने सामर्थ्य के अनुसार कर्म करते रहना चाहिए ऐसे निष्भाव कर्म करने से पाप नही लगता

Anmol Vachan:-22

जो सम्मानित व्यक्ति होते है उनके लिए अपमान मृत्यु से कही बढकर होते है

Anmol Vachan:-23

सभी जीव जीवन के पहले और मृत्यु के बाद अदृश्य हो जाते है सिर्फ जन्म और मृत्यु के बीच ही दिखाई देते है तो इसमें आश्चर्य की क्या बात है

Anmol Vachan:-24

परिवर्तन ही इस संसार का नियम है

जिसे तुम मृत्यु समझकर व्यर्थ दुखी हो रहे हो

वास्तविक में वही तो जीवन है

जिसमे एक क्षण में तुम करोड़ो के मालिक बन जाते हो

और दुसरे ही क्षण में दरिद्र निर्धन बन जाते हो

Anmol Vachan:-25

जो हो गया वह भी अच्छा ही हुआ

जो हो रहा है वह भी अच्छा ही हो रहा है

और जो होगा वह भी अच्छा ही होगा

इसके चलते तुम भूत का पश्चाताप ना करो

भविष्य की चिंता ना करो

और वर्तमान तो चल रहा है

Anmol Vachan:-26

आत्मा कभी नही मरती है और न ही जन्म लेती है

यह सिर्फ पुराने शरीर को छोडकर नये शरीर धारण करती है

Anmol Vachan:-27

आत्मा अजर अमर है जो लोग इसे मरने या मारने वाला मानते है

असल में वे लोग नामसझ है आत्मा न तो मरती है और ना ही किसी के द्वारा मारा जा सकती है

Anmol Vachan:-28

कर्म ही पूजा है इसलिए फल की चिंता छोडकर कर्म करते रहना चाहिए

Anmol Vachan:-29

जो व्यक्ति संदेह से घिरे होते है उन्हें कभी भी ख़ुशी नही मिल सकती है

Anmol Vachan:-30

मन वास्तव में बहुत ही चंचल होता है जिसपर नियंत्रित करना कठिन होता है लेकिन निरंतर अभ्यास से मन को नियंत्रित किया जा सकता है

Anmol Vachan:-31

जिस व्यक्ति का जैसा स्वाभाव होता है ठीक वैसा ही उसका विश्वास भी होता है

Anmol Vachan:-32

जो जन्म लिया है उसका मृत्यु अटल है इसपर शोक करना व्यर्थ है

Anmol Vachan:-33

जो लोग मुझसे (ईश्वर) से जुड़ते है उन्हें सच्चा ज्ञान देता हु

Anmol Vachan:-34

जो लोग बुद्धिमान होते है उन्हें सिर्फ अपने ईश्वर पर भरोषा होता है

Anmol Vachan:-35

हर व्यक्ति को उसके कर्मो के अनुसार ही फल मिलते है

Anmol Vachan:-36

हे अर्जुन, हमने तुमने न जाने कितने जन्म लिए है तुम्हे याद नही है लेकिन मुझे सब याद है

Anmol Vachan:-37

फल की चिंता छोडकर कर्म पर भरोसा करना चाहिए जो जैसा कर्म करेगा उसे वैसा ही फल भी मिलेगा

Anmol Vachan:-38

मन ही किसी को अपना शत्रु या मित्र बनाता है

Anmol Vachan:-39

जो भी कर्म करते हो उसे भगवान को समर्पित करते हुए आगे बढना चाहिए

जो लोग ऐसा करते है उनका जीवन सदा सुखमय होता है

Anmol Vachan:-40

जिस दिन से अपने कार्य में आनन्द प्राप्त करने लगते हो तब पूर्णता को प्राप्त कर लेते हो

Anmol Vachan:-41

मै (ईश्वर) सभी प्राणियों के हृदय में निवास करता हु

Anmol Vachan:-42

जिन्हें इस मोहमाया रुपी का ज्ञान हो चुका होता है उन्हें पत्थर, सोना सब कचरे के समान ही लगते है

Anmol Vachan:-43

यह शरीर न तो तुम्हारा है और ना ही तुम इस शरीर के हो

यह तो पंच तत्वों – अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी और आकाश से मिलकर बना है

जो एक दिन मृत्यु के पश्चात इसी में मिल जायेगा

परन्तु यह आत्मा अजर अमर है फिर तुम क्या हो जो खुद के लिए इतना घमंड करते हो

Anmol Vachan:-44

जो कर्म अप्राकृतिक होते है वे बहुत ही तनाव उत्प्प्न करते है

Anmol Vachan:-45

जो लोग भाग्यशाली होते है उन्हें ही धर्म युद्ध को लड़ने को मिलता है जो की सीधे स्वर्ग का द्वार खोल देते है

Anmol Vachan:-46

बुद्धिमान व्यक्ति को समाज कल्याण के लिए बिना किसी आसक्ति के कार्य करते रहना चाहिए

Anmol Vachan:-47

बुद्धिमान व्यक्ति जीवन या मृत्यु की स्थिति में शोक नही करते, और लोग उस चीज के लिए शोक करते है जो शोक के लायक ही नही है

Anmol Vachan:-48

जो लोग बुरे होते है और कर्म नीच होते है वे लोग मुझे (भगवान) पाने की कोशिश ही नही करते

Anmol Vachan:-49

जो हर क्षण मुझे याद करता है वही लोग मेरे को प्राप्त करते है

Anmol Vachan:-50

इस जीवन में खोने जैसा कुछ है ही नही, जिसके लिए लोग दुखी होते होते है

तो आप सबको यह पोस्ट श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश, अनमोल विचार और अनमोल वचन | Shri Madbhagvad Geeta Me Shree Krishna Ke Anmol Vichar, Updesh & Anmol कैसा लगा कमेंट में जरुर बताये और इस पोस्ट को शेयर भी जरुर करे

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