महिलाओं के संवैधानिक अधिकार Rights of Working Women in Hindi


Women Rights in Hindi

कामकाजी महिलाओ से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण अधिकार

महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा सड़क, संसद से लेकर सोशल मीडिया पर उतर आया है लेकिन इन सबके बावजूद महिला सुरक्षा से जुड़ी कई खबरें हर रोज सुर्खियां बनती है ऐसे में हर महिला को अपने अधिकारों के प्रति सचेत होने की जरूरत है यहां हम आपको बताने जा रहे हैं महिला सुरक्षा से जुड़ी हुऐ अधिकारों के बारे में जिन्हें वर्क प्लेस पर कामकाजी महिलाओं को जानना बेहद जरूरी है।

महिला सुरक्षा और अधिकारों की तमाम बातों के बीच ज्यादातर उत्पीड़न के मामलों में महिलाएं खामोश ही रहती हैं कई तरह के कानून और अधिकार होने के बावजूद महिलाओं को चुप्पी ही क्यों चुनना पड़ता है इसके कई कारण हो सकते हैं ऑफिस और किसी संस्था में काम करते हुए अगर कोई महिला उत्पीड़न का शिकार होती है तो वह अपनी नौकरी बचाने की जुगत में कई बार आवाज नहीं उठाती है,

उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने में महिलाये सिर्फ आप अपने ही मदद नहीं कर रही होती हैं साथ ही उन तमाम महिलाओं की भी मदद करती है जो उस कंपनी में वर्तमान में काम करती हैं इतना ही नहीं आगे आने वाले महिला कर्मचारियों के लिए भी आपकी आवाज बनने का काम करती कई बार अगर आप किसी ऐसे शख्स के बारे में शिकायत दर्ज कराती हैं तो इससे उस शख्स के द्वारा बदसलूकी करने की  हिम्मत टूटती है।

कई बार महिलाएं इसके खिलाफ अपनी आवाज को उठाना चाहती है परंतु उन्हें अपने अधिकारों के बारे में सही सही जानकारी नहीं होती है जिससे वह अपनी आवाज को बुलंद नहीं कर पाती हैं तो आज के इस पोस्ट में हम महिलाओं के उन्हीं अधिकारों के बारे में बात करेंगे

विशाखा गाइडलाइंस क्या है ??

राजस्थान के जयपुर के भटेरी गाव की एक महिला भवरी देवी ने बाल विरोधी अभियान में हिस्सा लेने के कारण बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी थी जिसके बाद भंवरी देवी केस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने  देश की हर संस्था को विशाखा गाइडलाइंस का पालन करने का आदेश दिया है साल 2012 में इस से जुड़ा कानून पास हुआ महिलाओं को वर्क प्लेस पर छेड़छाड़ से बचाने के लिए यह सबसे बड़ा हथियार है। इसके मुताबिक देश के कानून में महिलाओं को कुछ अधिकार दिए हैं। कार्यस्थलों पर महिलाओं के उत्पीड़न रोकने के लिए बनाए गए प्रावधान हैं विशाखा गाइडलाइंस.

दरअसल 1997 में सामाजिक कार्यकर्ता भंवरी देवी ने राजस्थान में बाल विवाह को रोकने के लिए आवाज उठाई थी ऐसे में दबंगों ने उसके साथ दरिंदगी की इस केस में फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा से जुड़े कुछ दिशा-निर्देश दिए। इसे विशाखा गाइडलाइंस का नाम दिया गया है।

अपने साथ हो रही बदसलूकी के खिलाफ आवाज उठाना क्यों जरूरी है ??

Office मे मैं काम करने वाली महिलाओं के साथ जब उनके सहयोगी ही बदसलूकी करते हैं तो वह इस बारे मे किसी दूसरे से बात करने में भी सकुचाती है। लेकिन महिलाओं को आवाज उठाना जरूरी है क्योंकि अगर आपने आज आवाज नहीं उठाया तो यह आपके साथ रोज होगा.हो सकता है आप इन सब से परेशान होकर वहां काम करना छोड़ दें

परंतु आप सोचिए आपके बाद जो भी महिला कर्मचारी वहां काम करने आएगी उसके साथ भी ऐसा ही होगा तो यह आपके लिए बहुत जरूरी हो जाता है कि आप इसके विरोध में खड़ी हो, आप अपनी आवाज इसके खिलाफ जरूर उठाएं ताकि इन सब चीजों को बंद कर दिया जाए इन सब चीजों से डरकर बिल्कुल भी आप अपनी जॉब को चेंज करने के बारे में ना सोचे.

आपको बिल्कुल भी ऐसा नहीं करना चाहिए आप अगली कंपनी में फिर आप ऐसी किसी हरकत का शिकार बन सकती हैं आपका आत्मविश्वास भी कमजोर पड़ सकता है और पुरुषों पर से आपका भरोसा भी टूटता है वही एक बार जब आप की आवाज कहर बनकर आरोपी पर पड़ती है तो उसे कानून के सामने कमजोर देखकर आप को मजबूती का एहसास होता है यह भरोसा भी होता है कि देश का कानून और संविधान आपके साथ है। जो हर समय आपकी मदद के लिए तैयार है। देश की हर महिला को यह सबक गांठ बांधकर रख लेना चाहिए कि उनकी आवाज सिर्फ उनके लिए नहीं देश की आधी आबादी के लिए है।

महिला के सवैधानिक अधिकार

Working Women Rights in Hindi

महिलाओं को अपने इन अधिकारो के बारे मे पता होना चाहिए।

1 :- इस गाइडलाइन के तहत किसी भी कंपनी या संस्थान में अगर कोई महिला काम करती है और किसी भी उम्र की है तो उसे अपनी सुरक्षा का अधिकार है ऐसे में कोई भी शख्स उससे गलत तरीके से बात यह हरकत करता है या किसी भी तरीके से उसका फायदा उठाने की कोशिश करता है तो उसे शिकायत करने का पूर्ण अधिकार है

2 :- हर कंपनी या संस्था में जहां महिलाएं काम कर रही हैं वहां महिलाओं को सुरक्षा का माहौल मिले वह नौकरी देने वालों की जिम्मेदारी है साथ ही साथ वहां शिकायत कमेटी का भी गठन करना भी जरूरी है

3 :- महिला कर्मचारी के पास अधिकार हैं कि अगर उसकी संस्था में 10 लोग काम करते हैं वहां कोई कमेटी नहीं है तो वह तुरंत इसकी शिकायत अपने अधिकारियों को करें और कमेटी बनवा सकती हैं।

4 :- महिलाओं को इस कमेटी में प्रार्थी प्राथमिकता मिलती है कमेटी में 50 फीट की महिलाएं ही होनी चाहिए इस कमेटी की प्रमुख भी महिला ही होगी।

5 :- शिकायत आने के बाद 90 दिनों के भीतर संस्था की अतिरिक्त अंतरिक्ष जांच पूरी होनी चाहिए और सजा मिलना चाहिए यहां एक बार ध्यान देने की जरूरत है कि महिला को भी भी 90 दिन के भीतर ही शिकायत दर्ज करा लेना चाहिए।

6 :- हर रोजगार देने वालों की यह जिम्मेदारी है कि वह महिलाओं को तुरंत से बचाने के लिए अपने आचार संहिता में एक नियम शामिल करें।

7 :- ऑफिस में महिलाओं को उनके अधिकारों के तरफ जागरुक करना चाहिए

8 :- महिलाओं की शारीरिक बनावट उसके कपड़ों या किसी और चीज को लेकर भद्दी टिप्पणी की जाती है तो उसके अधिकारों का हनन है वह तुरंत कमेटी में अपना शिकायत दर्ज करा सकती है।

9 :- महिला कर्मचारियों को यह छूट मिलनी चाहिए कि वह उत्पीड़न के मामले को सभी सहयोगियों के सामने ऑफिस की मुख्य बैठक में रख सके।

दोस्तों सबसे पहले धन्यवाद और बधाई देता हु Sahayatahindime.com हिंदी ब्लॉग की ओर से AchhiAdvice के संचालक राकेश जी को जिन्होंने हिंदी ब्लॉग में अपना काफी योगदान दे रहे है और बहुत ही सरल तरीके से और हम सभी को ज्ञान से सम्बंधित बातो को बताया. एक बार पुनः AchhiAdvice के संचालक राकेश जी को धन्यवाद..

इस पोस्ट के लेखक के बारे मे :-

Ram Gupta Founder of Sahayatahindime.com

मेरा नाम Ram Gupta है। मै Sahayatahindime.com का Founder हूं।  Sahayatahindime.com एक Multi topic हिन्दी Website है। इस पर आप Technical , Carrier Guide, Motivation , Make Money Online , Education , Jobs से सम्बंधित Article पढ़ने को मिलेंगे। Sahayatahindime को मैंने 2016 मे बनाया था। यह अपने Goals की ओर लगातार आगे बढ़ता जा रहा है एक बार फिर से यह पोस्ट पढ़ने AchhiAdvice के सभी पाठकों का धन्यवाद.

हमने राकेश जी का एक AchhiAdvice के लिए एक इंटरव्यू लिया है जिसे आप यहा इस लिंक से पढ़ सकते है

क्लिक करे – Achhiadvice के Founder Rakesh Gupta Ji का इंटरव्यू

इन्हें भी पढ़िए :- 


You May Also Like

1 Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *