सकरात्मक सोच की शक्ति Power of Positive Thinking in Hindi


Power of Positive Thinking Best Kahani in Hindi

पॉजिटिव सोच की शक्ति एक हिंदी कहानी

कोई यह कह नही सकता है की बिजली (Electric) मौजूद है क्यूकी आप इसे छु (Touch) नही सकते है न इसे सूंघ (Smell) सकते है न सुन (Hearing) सकते है और न ही देख सकते है लेकिन इसका प्रभाव (Effect) आप हर जगह देख सकते है और इसी तरफ हमारी खुद की शक्ति (Power of Positive Thinking) हममे मौजूद है जो खुद अनुभव (Experience) कर सकते है इसे कोई नही देख सकता है लेकिन हमारी खुद की शक्ति का प्रभाव (Effect of Power) दूर दूर तक दिखाई दे सकता है जरूरत है तो कुछ करने की इच्छा शक्ति की…..और यह तभी सम्भव है जब हमारी सोच सकरात्मक (Positive) हो..

आपके विचार आपके सपनों को हासिल करने के लिए सकरात्मक सोच की शक्ति (Power of Positive Thinking) सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति है वर्तमान में आप जो कुछ भी हो उसके लिए आप खुद जिम्मेदार है, सकरात्मक सोच की शक्ति (Power of Positive Thinking) का उपयोग आपको सफलता और उपलब्धि का वो जीवन दे सकता है जिसकी कल्पना भी लोग नही कर पाते है यदि आपको अपने सपनों को जीना है तो आपमे सकरात्मक सोच की शक्ति (Power of Positive Thinking) का होना बहुत जरुरी है और हमारे विचार ही हमे सोचने की उर्जा (Energy) देते है

तो आईये हम AcchiAdvice से राकेश गुप्ता (Rakesh Gupta) आपको एक इसे एक छोटी सी कहानी (Hindi Kahani) से सकरात्मक सोच की शक्ति (Power of Positive Thinking) का महत्व बताते बताते है

जीवन की सोच में बदलाव कहानी इन हिंदी

Life Changing Thinking Kahani in Hindi

एक बार की बात है एक जीवविज्ञानी ने एक शोध के लिए बड़ा सा तालाब (Tank) बनवाया जिसमे उसने तालाब के बीचोबीच मजबूत कांचो की दिवार से इसे दो भागो में बाँट दिया बड़े वाले वाले हिस्से में एक बड़ी शार्क मछली को डाल दिया जबकि दुसरे हिस्से वाले छोटी छोटी मछलियों को छोड़ दिया

अब उन मछलियों को भोजन के लिए छोटे मछलियों को चारा डालता तो सभी छोटी मछलिया अपने हिस्से वाले में भोजन देखकर उस पर टूट पड़ती जबकि शार्क मछली भी उन चारो की पास जाना चाहता था लेकिन बीच में शीशे की दिवार होने के कारण वहा तक पहुच नही पाता था और बार बार चारे को देखकर शीशे की दिवार पर हमला करता लेकिन विफल रहता था और ऐसा अपने जन्मजात आक्रमक स्वाभाव के कारण शार्क मछली बार बार हमला करता लेकिन शीशे की दिवार की वजह से वापस लौटना पड़ता था

इस तरह उस जीवविज्ञानी ने यह प्रक्रिया कई दिनों तक जारी रखा जिसके फलस्वरूप शार्क मछली को विश्वास हो गया था वह उस चारे के पास नही जा सकता है इसलिए कुछ दिनों के पश्चात अब उसने कोशिश भी करना छोड़ दिया

इसके बाद जीवविज्ञानी के बीच में बने शीशे की दिवार को हटाकर भी यही प्रकिया दोहराई लेकिन यह क्या अब शार्क में वह उत्तेजना तनिक भी नही रहा इसलिए उसने चारे को खाने के लिए उधर नही गया क्यूकी उसे अब इस तरह प्रशिक्षित कर दिया गया था की वह उस पार चारे के पास नही जा सकता है

नैतिक शिक्षा (Moral Teach)

तो देखा आपने किस तरह से यदि किसी को प्रशिक्षित कर दिया जाय की यह यह नही कर सकता है तो सामने मंजिल चाहे कितनी आसान ही क्यू न हो लोग कोशिश करना भी छोड़ देते है

ऐसा ठीक हमारे जीवन (Life) में भी होता है जरा सोचिये जब आप छोटे थे तो आपके मन में न जाने क्या क्या ख्याल आते थे मै ये करूँगा, ये बनुगा या बड़ा होकर ये करूँगा ऐसी तमाम बाते होती है जिन्हें सिर्फ हम अपने मस्तिस्क में उन सपनों का ताना बाना बुनते थे

लेकिन यदि बचपन के समय आप अपनी सोच को किसी के सामने रख दिए तो आप जरुर हंसी के पात्र बने होंगे जैसे किसी ने कह दिया की मै बड़ा होकर डॉक्टर या वैज्ञानिक बनुगा फिर देखना कैसे कैसे आपके आस पास के लोग ही आप में नुख्स निकालने लगते है “पढने तो आता नही है और चले है बनने वैज्ञानिक”

फिर जैसे जैसे हम बड़े होते जाते है हम इन्ही पहले से स्थापित सोच की मर्यादाओ में बधते जाते है की ये न करो, ऐसा न करो, ये तुमसे नही होंगा या ये तुम्हारे बस की बात नही है ऐसी तमाम बाते जो की हमारी बचपन की सोच को ब्रेक लगा दिया जाता है फिर अंत में हम किसी स्थान पर अपने जीवन की चलाने के लिए संघर्ष कर रहे होते है जिसके लिए हमारी खुद की बनी बनायीं गयी सोच ही कही न कही जिम्मेदार होती है जो की हम उस शार्क मछली की तरह सीमाओ में बध जाते है ये हम नही कर सकते है और उससे हटकर कुछ सोच भी नही सकते है

वैसे तो मेरा मानना है दोस्तों कभी भी मेहनत व्यर्थ नही जाता है जरा आप ही सोचिये क्या होता है की गाँव के लडके यदि किसी तरह से मान लो वह पैसे जुटाकर कंप्यूटर चलाना सीखना चाहता है तो सबसे पहले लोग क्या कहेगे की कंप्यूटर सीखकर क्या करेगा कहा आज के जमाने में नौकरी मिलेगा… बस यही है एक नकरात्मक सोच जो हमे कभी  आगे बढ़कर सोचने ही नही दिया जाता है फिर भी उस लडके ने अपने दृढ इच्छा शक्ति से कंप्यूटर चलाना सीख लेता है तो देखना वही लड़का गाँव के लडको में सबसे अलग ही नजर आएगा और हा यदि उसे कही कोई काम नही मिलता है तो भी जब वः अपना खुद का Business शुरू करता है तो कही न कही उसके द्वारा सीखा हुआ कंप्यूटर का ज्ञान उसे अपने अपने व्यापार में आगे बढने को जरुर फायदा मिलता है और साथ में ही उस कंप्यूटर का प्रयोग अपने व्यापार में कैसे करे इसपर भी जरुर अमल करता है तो दोस्तों बस यही है एक सकरात्मक सोच की शक्ति (Power of Positive Thinking) की शुरुआत.. हमे कोशिश करनी है तो सिर्फ अपने सोचे और देखे हुए सपनों को वास्तविक जीवन में कैसे अमल करे

क्यूकी यदि हम सोच सकते है तो उसे कर भी सकते है बस जरूरत है एक इच्छा शक्ति और सकरात्मक सोच की शक्ति (Power of Positive Thinking) की……. तो आप भी जहा हो जिस फील्ड में एक सकरात्मक सोच के साथ बढिए…..फायदा जरुर मिलेगा ….तो जरूरत है हमे सिर्फ एक कोशिश करने की तो कोशिश तो करिये………..

तो आप सबको ये कहानी सकरात्मक सोच की शक्ति Power of Positive Thinking in Hindi कैसा लगा प्लीज कमेंट बॉक्स में जरुर बताये और दुसरो को भी शेयर जरुर करे

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2 thoughts on “सकरात्मक सोच की शक्ति Power of Positive Thinking in Hindi

  1. अती सुंदर लगी साहब कहानी पढ कर एक नया उत्साह आया, कि हम बहुत कुछ कर सकते हैं आवश्यकता हैं एक सकारात्मक सोच की।

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