रहीम दास जी के दोहे Rahim Das ke Dohe

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Rahim Das Ke Dohe Hindi Meaning

रहीम जी के दोहे हिन्दी में अर्थ सहित

महापुरुषों की कही बाते हम सभी को अपने जीवन में आगे बढने का मार्ग दिखाती है इसी कड़ी में रहीम दास / Rahim Das का भी नाम आता है जिन्हें कहे गये दोहे जिन्हें हम रहीम के दोहे / Rahim Ke Dohe के नाम से भलीभांति परिचित है और ये दोहे हमे अपने जीवन में सत्य और वास्तविकता का बोध कराते है

तो आईये हम सभी कुछ रहीम दास जी के दोहे हिंदी अर्थ सहित व्याख्या / Rahim Das Ji Ke Dohe With Hindi Meaning को पढ़ते है और और इन दोहे से सीख लेते हुए हम सब अपने जीवन में आगे बढ़ने का सफल मार्ग बनाते है

रहीम दास के दोहे

Rahim Das Ke Dohe

रहिमन नीचन संग बसि, लगत कलंक न काहि

दूध कलारिन हाथ लखि, सब समुझाही मद ताहि 

हिंदी अर्थ – रहीम जी कहते है की नीच और दुष्ट लोगो के साथ रहने से भला किसका नाम नही ख़राब होता है ठीक उसी प्रकार यदि शराब बेचने वाला दूध भी बेचने लग जाए तो उसे शराब वाले के ही नाम से उसको जानते है और दूध को भी शराब ही समझते है

रहिमन धागा प्रेम को , मत तोरो चटकाय

टूटे से फिर न जुड़े, जुड़े ते गाठ पड़ी जाय

हिंदी अर्थ – रहीम जी कहते है की अपने कभी भी अपने रिश्तो के प्रेम बंधन को नही तोडना चाहिए क्यूकी अगर इन रिश्तो के प्रेम में दरार आ जाये तो फिर पहले जैसा प्रेमभाव नही रहता है ठीक उसी प्रकार यदि किसी धागे को तोड़ दिया जाय तो ये फिर कभी आपस में जुड़ नही पाते है और यदि उन्हें जोड़ा भी जाय तो उनके बीच में गाठ जरुर पड़ जाती है

रहिमन प्रीति सराहिए मिले होत रंग दून

ज्यो हरदी जरदी तजे, तजे सफेदी चून

हिंदी अर्थ – जब हम किसी से प्रेम करते है तो उसमे निश्छल भाव होना चाहिए और प्रेम के प्रति समर्पण होना चाहिए जिसमे कोई अंतर न हो ठीक उसी प्रकार यदि चूने और हल्दी को आपस में मिला दिया जाय तो दोनों अपना रंग खोते हुए एक दुसरे के रंग में ऐसे मिल जाते है जिन्हें अलग नही किया जा सकता है

टूटे सुजन मनाईये, जो टूटे सौ बार

रहिमन फिर फिर पोईए, टूटे मुक्ताहार

हिंदी अर्थ – रहीम जी कहते है की यदि मोतियों की माला बार बार टूटती है तो भी हम उसे धागे में पिरो कर सही कर लेते है ठीक उसी प्रकार अपना जो प्रिय होता है वो एक बार क्या 100 बार भी रूठ जाए तो हमे मना लेना चाहिए इससे हमारे रिश्ते फिर से बने रहते है

मथत मथत माखन रहे, दही मही बिलगाय

रहिमन सो मीत है भीर परे ठहराय

हिंदी अर्थ – सच्चा मित्र वही है जो दुःख के समय साथ देता है और लेकिन भला वह मित्र किस काम का जो दुःख आने पर तुरंत साथ छोड़ देता है ठीक उसी प्रकार मक्खन जब मथते है तो मक्खन तो दही का साथ नही छोड़ता है लेकिन मंठा दही का साथ छोड़ देता है

रहिमन वहा न जाईये, जहा कपट को हेत

हम तो ढारत ढेकुली, सीचत अपनों खेत

हिंदी अर्थ – हमे ऐसी जगह कभी भी नही जाना चाहिए जहा के लोग अपने मतलब के लिए छल कपट के लिए सहारा लेते है हम लोग मेहनत करना जानते है और कुए से पानी भी निकालना हो तो मेहनत से निकालते है जबकि दुष्ट और कपटी लोग तो बिना मेहनत किये ही अपने खेतो तक को सीच लेते है

मागे घटत रहीम पद, किती करो बढ़ी काम

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तीन पैड वसुधा करी, तउ बावने नाम

हिंदी अर्थ – रहीम जी कहते है आप चाहे कितना महत्व का ही काम क्यू न करते है यदि आप किसी के आगे हाथ फैलाते है तो फिर आपके बड़े बड़े पद भी उस व्यक्ति के आगे छोटा हो जाता है ठीक उसी प्रकार भगवान विष्णु ने बड़ी ही चतुराई से राजा बली के आगे पृथ्वी को तो तीन पग में तो माप तो दिया लेकिन यही तीन पग मांग देने के कारण भगवान भी राजा बली के आगे छोटे हो जाते है और उनका नाम वामन ही रह जाता है अर्थात बौना यानि छोटा ही नाम से पुकारा भी गया

रहिमन देख बड़ेन को, लघु दीजिये न डारी

जहा काम आवे सुई, कहा करे तरवारी

हिंदी अर्थ –  हमे बड़ी चीजो को देखकर छोटे चीजो की अपेक्षा नही करनी चाहिए मतलब जब हमे सुई का काम की जरूरत पड़ती है तो वहा काम तलवार से नही किया जा सकता है मतलब हर किसी का अपना अपना स्थान होता है

रहिमन निज मन की व्यथा, मनही राखो गोय

सुनी अठीलहै लोग सब, बाटी न लैहे कोय

हिंदी अर्थ – हमे अपने दुखो को सबसे चर्चा नही करनी चाहिए क्यूकी हमारे दुखो को कोई भी सुन सकता है लेकिन कोई मदद करने को तैयार नही होता है और उलटे लोग हमारी दुखो पर हँसेगे ही, इसलिए हमे अपने दुखो की चर्चा सबसे करने से बचना चाहिए

रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सुन

पानी गये न उबरै, मोती मानुष चून

हिंदी अर्थ – हमे अपनी इज्जत बचाकर रहना चाहिए क्यूकी बिना इज्जत के सबकुछ बेकार है जिस प्रकार बिना चमक के मोती बेकार होता है ठीक उसी प्रकार बिना इज्जत के आदमी का कोई मोल नही होता है ठीक उसी प्रकार यदि चुने में पानी भी मिला दिया जाय तो पानी जल जाता है जो वह भी किसी काम का नही रहता है

रहिमन वे नर मर चुके जे कहू मागन जाहि

उनते पहले वे मर चुके, जिनसे मुख निकसत नाही

हिंदी अर्थ – जो मनुष्य यदि किसी के आगे मागने के लिए हाथ फैलाता है तो वह वह एक मृतक के समान हो जाता है लेकिन वे लोग पहले से ही मृतक हो चुके है जो मागने पर भी पहले ही साफ मना कर देते है

जे रहीम उतम प्रकृति का, का करी सकत कुसंग

चन्दन विष व्यापत नही, लपटे रहत भुजंग

हिंदी अर्थ – जो मनुष्य का चरित्र उत्तम होता है उसका बुरे लोग कुछ भी नही बिगाड़ सकते है ठीक उसी प्रकार चन्दन का पेड़ अनगिनत सापो से घिरा रहता है फिर भी चन्दन अपनी शीतलता को नही छोड़ता है

तरुवर फल नही खात है, सरवर पियहि न पान

कही रहीम पर काज हित, संपति संचही सुजान

हिंदी अर्थ – पेड़ अपने कभी भी फल नही खाते है और तालाब भी अपने अपने पानी खुद नही पीता है ठीक उसी प्रकार जो लोग दुसरो के हित के लिए जीते है वे अपनी संपति कभी भी खुद पर खर्च नही करते है

पढ़े –कबीर दास जी के दोहे हिन्दी में Kabir Ke Dohe in Hindi

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4 thoughts on “रहीम दास जी के दोहे Rahim Das ke Dohe

  1. Main Rahim Das Ji Ke Anmol Vachan aur unke dohe sse Mera man prabhavit ho gaya hai
    Aisay Mahapurush ko dhanyavad
    Thanking for you

    • धन्यवाद अंकित जो आपको इन बातो से प्रेरणा मिला

  2. रहिमन वे नर मर चुके जे कहू मागन जाहि…….बहुत अच्छी पोस्ट.
    सभी दोहे अच्छी सीख दे रहे है|

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