एक महान अमर गाथा शहीद भगत सिंह की

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शहीद भगत सिंह की जीवनी / Bhagat Singh Life Biography in Hindi –

दोस्तों आज हम बात करेगे महान स्वन्त्रता सेनानी शहीद भगत सिंह की जिनका जीवन गाथा आज भी भी हम युवाओ को अपने देश सेवा के लिए प्रेरित करती है

जब हमारा देश आजाद नहीं था तब देश के युवाओ को अपने देश की आज़ादी के लिए एक जूनून सा था हर किसी को अपने देश को आज़ाद देखना चाहता था जिसके लिए हर कोई अपने देश पर मर मिटने को तैयार था इसी कड़ी में सरदार भगत सिंह का भी नाम आता है जो मात्र 23 वर्ष की अवस्था में ही देश के लिए शहीद हो गए

भगत सिंह –  जीवन परिचय / About Bhagat Singh –

Bhgat-Singhभगत सिंह का जन्म 27 सितंबर को पंजाब प्रान्त के बावली गाव में हुआ था जो की अब पाकिस्तान का हिस्सा है भगत सिंह के पिता किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती कौर था इन्हें देशभक्ति की भावना अपने घर से ही प्राप्त हुआ था जो इनके पिता और चाचा अपने देश के आज़ादी के लिए प्रयाशरत थे और इनके दादा जी तो अपने देश की आज़ादी की खातिर इनको ब्रिटिश स्कूल में पढ़ाने से मना कर दिया था जिसके कारण इनकी पढ़ाई गाव के आर्य समाज के स्कूल में हुआ

जब भगत सिंह मात्र 12 साल के थे तभी जलियावाला बाग़ हत्याकांड 1919 में हुआ था यह वही अवसर था जो की भगत सिंह को अंदर से झकजोर दिया था हजारो निहथ्थे लोगो पर अंग्रेजो द्वारा गोलिया चलायी गयी गर कोई आज भी देखता तो शायद गुस्सा खौल उठता जिसके कारण भगत सिंह भी बहुत क्रोधित हुए और इस घटना की सुचना मिलते ही वे अपने दोस्तों के साथ घर से १२ मील दूर जलियावाला बाग़ पहुच गए और अंग्रेजो के विरोध में हिस्सा लिया

भगत सिंह का क्रांतिकारी जीवन –

भगत सिंह बचपन से ही अंग्रेजो के अत्याचारो की कहानी सुनते आ रहे थे जिसके कारण इनके मन में अंग्रेजो के प्रति अपार गुस्सा थी वे बचपन से ही कांतिकारी देशभक्तो की कहानिया पढ़ते थे और अपने देश को आज़ाद करने की भावना इनके अंदर कूट कूट कर भरी हुई थी शायद वही वह कारण था की वे अंग्रेजो के विरोध में हमेशा बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते  थे

जलियावाला बाग़ हत्याकांड –

13 अप्रैल 1919 को जब अंग्रेजो के खिलाफ अमृतसर के जलियावाला भाग में हजारो लोग शांतिपूर्ण तरीके से सभा आयोजित कर रहे थे तभी क्रूर अंग्रेजो ने हजारो निहत्थे भारतीयों पर गोलिया चलवा दिए जिसके कारण लोग उस सभा से अपने जान बचाने के लिए दीवारों से कूदने लगे और बहुत से लोग तो उस असेम्बली में स्थित कुए में कूदकर अपनी जान बचानी चाही लेकिन गोलियों के आगे आगे प्रयाश बेकार थे इस तरह हजारो लोगो को बिन मौत अपनी जान गवानी पड़ी जो की अंग्रेजो की क्रूरता को दर्शाती है, आज भी उन गोलियों के निशान जलियावाला बाग़ में देखे जा सकते है जो की इतिहास को हमारे आखो के सामने ला देता है

शायद पूरे इतिहास में मौत का मंजर का ऐसा नही खेला गया हो जो की अंग्रेजो के क्रूरता की बर्बर निशानी है उस बाग़ की दीवारे आज भी उस क्रूरता की चीखे सुनाती है जो की किसी का भी दिल पिघला सकती है

यह वही वक़्त था जिसके कारण भारत के सभी नागरिको में अंग्रेजो के प्रति गुस्सा भर गया था हर कोई अब अंग्रेजो से बदला लेना चाहता था जिसके कारण भगत सिंह का भी खून खौल उठा था

उस समय महात्मा ग़ांधी जी ने अंग्रेजो के खिलाफ असहयोग आंदोलन चला रहे थे ग़ांधी जी को विश्वास था की अहिंसा के जरिये देश को आज़ादी मिल सकती है लेकिन चौरा चौरी काण्ड के बाद गाँधी जी ने अपना असहयोग आंदोलन बन्द कर दिया जिसके चलते लाखो नौजवानों ने अपने देश की आज़ादी के लिए क्रन्तिकारी मार्ग चुनना ही पसंद किया

जिसके कारण भगत सिंह  भी ने भी आज़ादी के लिए हिंसा का रास्ता चुन लिया और गोली बन्दुक के दम पर अंग्रेजो से  बदला लेने लगे 

काकोरी काण्ड –

जब देश की आज़ादी के लिए नौजवानों ने हिंसा का रास्ता चुन लिया था तो इसके लिए उन्हें बन्दूक और गोली की भी आवश्यकता पड़ने लगी जिसके चलते रामप्रसाद बिस्मिल ने ने आंग्रेजो का खजाना लूटने का योजना बनाया जिसके लिए 9 अगस्त 1925 ईसवी को लखनऊ जिले के काकोरी रेलवे स्टेशन से ट्रैन छुटी तो योजना अनुसार रामप्रसाद बिस्मिल अपने साथियो असफाक उल्लाह खान, चंद्रशेखर आज़ाद और अन्य १६ साथियो की सहायता से ट्रैन को बीच रास्ते में रोककर लूट लिया

जिसके चलते अंग्रेजो ने इन सभी के खिलाफ मुकदमा चलाया और फिर रामप्रसाद बिस्मिल के साथ असफाक  उल्लाह खान को फाँसी दे दिया गया.

रामप्रसाद बिस्मिल को जब फ़ासी हुआ तो इनके मुह से यही निकला था जो की देश की आज़ादी का गीत बन गया

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”सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

देखना है जोर कितना बाजुए-क़ातिल में है”

लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला –

१९२८ ईसवी में जब पूरा देश साइमन कमीशन के विरोध में था देश में भयानक प्रदर्शन हुए जिसके फलस्वरूप अंग्रेजो ने इन प्रदर्शन करने वालो पर लाठीचार्ज कराया जिसके चलते लाला लाजपत राय को गंभीर चोटे आयी तो

तो लाला लाजपत राय जी ने अंग्रेजो से कहा था

”मेरे शरीर पर पड़े हुए लाठी की एक एक चोट ब्रिटिश साम्राज्य के लिए ताबूत की कील बनेगी”

फिर कुछ दिनों बाद लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गयी , जिसके बाद तो मानो भगत सिंह का खून खौल उठा था, जिसका बदला लेने के लिए भगत सिंह ने ने अपने साथी राजगुरु की सहायता से स्कॉट को मारने की योजना बनायीं और फिर अपने योजना अनुसार ये लाहौर कोतवाली के सामने जैसे ही सांडर्स दिखा वे अपने योजना अनुसार ताबड़तोड़ गोलिया चलायी और सांडर्स को मार गिराया और इस तरह लाला लाजपत राय की मृत्यु के बदला लिया

असेम्बली पर बम फेकना –

अंग्रेजो के शोषण नीति के खिलाफ भगत सिंह और बटुकेष्वर दत्त ने दिल्ली के केंद्रीय असेम्बली में बम फेकने की योजना बनायीं और भगत सिंह नहीं चाहते थे की कोई खून खराबा हो या किसी की जान जाए इसके लिए उन्होंने ८ अप्रैल १९२९ को अपने योजना अनुसार ऐसे स्थान पर बम फेका जहा पर कोई भी नही था हाल चारो तरफ से धुएं से भर  गया था और शोषण नीति के खिलाफ अपनी कारवाही में वे वहा से भागे नही बल्कि इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगते रहे जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया

जेल में भगत सिंह –

गिरफ्तार होने के बाद भगत सिंह अपने साथी राजगुरु और सुखदेव के साथ जेल में करीब जेल में दो साल बिताया और  इस दौरान वे कई लेख भी लिखे और कई बार तो वे भूख हड़ताल पर भी रहे करीब दो महीने भूख हड़ताल के रहने के बाद अंग्रेज उनकी मांगे मानने पर विवस हो गए .

भगत सिंह को फ़ासी –

करीब जेल में दो साल गुजरने के बाद भगत सिंह को इनके साथी राजगुरु और सुखदेव को 23 मार्च 1931 की शाम को  निर्धारित समय से पहले ही फाँसी दे दिया गया क्यू की अंग्रेज इनके साहस के आगे घुटने टेक दिए थे और अंग्रेज सर्कार नहीं चाहती थी की इनकी फाँसी की खबर लोगो तक पहुचे.

फिर भी आज़ादी के दीवाने आखिरी समय में भी ज़रा सा भी विचलित नहीं हुए और हँसते हँसते फाँसी के फन्दों पर झूल गए और जाते जाते पूरे देश में आजादी की एक ज्वाला जगा गए

भगत सिंह का विचारधारा –

भगत सिंह का जन्म से ही अंग्रेजो के क्रूरता की कहानिया सुनते आ रहे थे जिसके कारण इनके मन में अंग्रेजो के प्रति बहुत ही गुस्सा था वे अपनी जान की कीमत पर भी देश को आजाद कराना चाहते थे जिसके लिए मात्र 23 वर्ष की अवस्था में ही अपने देश के आज़ादी के लिए फाँसी के फंदे पर झूल गए थे और जाते जाते इस देश के लोगो को प्रेरणा देते हुए अपनी जिंदगी न्योछावर कर दिया.

ऐसे आज़ादी के महानायक को हमारा कोटि कोटि प्रणाम

”जय हिन्द जय भारत”

आज़ादी का महत्व –

दोस्तों जब हमारा देश आज़ाद नही था तो हर किसी का यही सपना था की वे अपने देश को आज़ाद होते देखे तो ऐसे में में हमारा यही फर्ज बनता है की हम अपनी आज़ादी को बहुत सहेजकर रखे और अपने देश की अखण्डता बनाये रखने में अपना सहयोग दे, देश पर शहीद हुए अमर बलिदानियो के लिए यही हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होंगी

तो दोस्तों आप सबको भगत सिंह की जीवनी कैसा लगा प्लीज कमेंट बॉक्स में अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे

धन्यवाद दोस्तों

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