साक्षी मलिक की प्रेरणादायक जीवनी Sakshi Malik Biography in Hindi


सफलता की एक कहानी साक्षी मलिक

Story of Success Sakshi Malik / Sakshi Malik Biography in Hindi 

Sakshi-Malik- saflta ka ek naya nam

दोस्तों सफलता किसे अच्छी नही लगती है और जब वो सफलता हमारे मन मुताबिक हो तो ख़ुशी दोगुनी हो जाती है इसी कड़ी में साक्षी मलिक का भी नाम जुड़ गया जिन्होंने अपने मेहनत और परिश्रम के दम पर वो कर दिखया जिसे करना हर इंसान का सपना होता है

तो आइए जानते है साक्षी मलिक और उनकी सफलता के बारे में जिनके चर्चे आज हर भारतीय कर रहा है

साक्षी मलिक के बारे में जाने / साक्षी मालिक का जीवन परिचय 

 Sakshi Malik Biography in Hindi

साक्षी मलिक ने इस बार भारत के तरफ से खेलते हुए रियो ओलम्पिक खेलो में पहलवानी यानि रेसलिंग का दम दिखाते हुए कास्य पदक जीतकर एक नया इतिहास रच दिया जो की अपने आप में एक अद्भुत मिशाल है और इस तरह ओलम्पिक खेलो में पदक जितने वाली पहली महिला पहलवान बन गयी है

साक्षी मलिक के पिता सुखबीर मलिक जो की भारत के हरियाणा राज्य के रोहतक के रहने वाले है और भारत की राजधानी नयी दिल्ली में डीटीसी (दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन) में कंडक्टर की नौकरी करते है और साक्षी मालिक की माँ सुदेश मलिक रोहतक में आंगनबाड़ी में कार्य करती है

साक्षी मलिक के बारे में / Sakshi Malik Biography in Hindi

नाम साक्षी मलिक / Sakshi Malik
जन्म 03-Sep-1992
जन्म स्थान  गाव- मोखरा, जिला – रोहतक , राज्य – हरियाणा – भारत
पिता सुखबीर मलिक / Sukhbir Malik
माता सुदेश मलिक / Sudesh Malik
कोच ईश्वर दहिया / Ishwar Dahiya
करियर पहलवानी / Wrestling
रेसलिंग केटेगरी 58 KGS
आदर्श गीता फोगाट / Geeta Phogat

साक्षी मलिक को बचपन से ही पहलवानी का शौक था महज 12 साल की उम्र में इन्होंने रेसलिंग यानि पहलनवानी में शुरुआत की, लेकिन हर माँ की तह साक्षी मलिक की माँ भी नहीं चाहती थी की उनकी बेटी साक्षी मालिक पहलवान बने क्यू की वे सोचती थी की पहलवानो में बुद्धि कम होती है

लेकिन सबको क्या पता था की जिसके दादा पहलवान रह चुके है उनकी पोती भी अपने अपने दादा की तरह एक दिन पहलवान बनेगी और और अपने इस कार्य से पूरे गांव के साथ पूरे देश का नाम रोशन करेगी लेकिन साक्षी मलिक ने ऐसा करके दिखा दिया

एक सीख साक्षी मलिक से

A Name of Success

दोस्तों भारत जैसे विकाशील देश में आज भी खेलो को उतना महत्व नहीं दिया जाता है दोस्तों इसका सबसे बड़ा कारण  है गरीबी लेकिन हमारे देश में ऐसे अनेको उदाहरण मिलते है जो की काफी गरीब और हजार दिक्कतों की सामना करते हुए लोग सफलता की एक नयी उचाई लिखते आ रहे है और ऐसा कारनामा साक्षी मलिक ने भी कर दिखाया है जो की अपने आप में बेमिशाल है

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दोस्तों साक्षी मलिक भारत के उस राज्य से आती है जहा लड़कियों की जनसख्या का अनुपात लड़को के मुकाबले सबसे कम है फिर भी साक्षी मलिक ने इन सब बातो को नजरअंदाज करते हुए आज सफलता के सर्वोच्च शिखर पर है जो की हर भारतवासी के लिए एक अद्भुत क्षण है

दोस्तों जब साक्षी मलिक प्रैक्टिस करने जाती थी की अक्सर उन्हें लोगो की सुनने को मिलती थी की पहलवानी लड़को का खेल है न की लड़कियों का, जिसका अहसास इनकी माँ को भी थी लेकिन साक्षी मलिक सबकी बातो को नजरअंदाज करते हुए अपने मकसद में लगी रही और वे 2016 के ओलम्पिक में एक नया इतिहास को रचा जिसे अब सभी गौरवन्तित कर रहे है

साक्षी मलिक की इस महान उपलब्धि का अंदाजा इसी से लगाया जा रहा है जहा लोग बेटियो को उतना महत्व नहीं देते है आज पूरे देश में एक ही नारा गूंज रहा है

 बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और और देश के लिए लिए मैडल लाये

दोस्तों ये सच है जब कोई इंसान जब भी कुछ नया करना चाहता है तो निश्चित ही हजार लोग उसे रोकने वाले मिल ही जाते है लेकिन जो लोग सिर्फ अपने एम् पर ध्यान देते है वे निश्चित ही एक दिन सफलता के शिखर पर जरूर जाते है

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इसलिए दोस्तों जब भी कोई हमारा दोस्त, रिश्तेदार या अपने गांव, मुहल्ले या देश का कोई भी आगे बढ़ना चाहता है तो सबसे पहले हमारा यही फर्ज बनता है की उसे आगे बढ़ने में हौसला बढ़ाये और एक अच्छे नागरिक होने का पहचान बने

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