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जैसा की हम सब जानते हैं अगर धरती पर लगातार पेड़ो की अन्धादुन्ध कटाई होती रही तो एक समय ऐसा भी आएगा जब धरती पर एक भी पेड़ो का नामोनिशान नही होगा और पेड़ो के न होने से हवा Automatic खत्म हो जायेगा फिर बिन हवा के मानव या किसी भी जीव के जीवन की कल्पना करना मुश्किल ही नामुमकिन भी हैं ,

इसलिए हम सभी को अपने धरती और इस पर्यावरण के प्रति हमेसा ही जागरूक होना चाहिए और हमेसा जीवन से जुडी हुई हवा , पानी और प्रकृति प्रदत्त वस्तुओं की रक्षा के लिए सदैव तत्पर होना चाहिए
तो दोस्तों हम आप सभी को एक कहानी बताते हैं जिससे आप लोग भी अपनी इस धरती के रक्षा के लिए जागरूक हो सकते हैं
दोस्तों एक गांव के रामु नाम का एक लड़का अपने parents के साथ रहता था, उसके parents बहत ही मेहनती किसान थे और दिन भर अपने खेतो में काम करते थे, तब जाकर उन्हें बहुत मेहनत करने के बाद उनको भोजन नसीब हो पाता था, जिससे उस गरीब परिवार का गुजारा चल रहा था,
लेकिन रामु अपने parents के ठीक उलट वह बहुत ही शरारती और कामचोर था , वह न तो school में ढंग से पढ़ाई करता था और ना ही अपने माता पिता के कामो में कभी भी help करता था, वह बस लोगो को शरारतो से लोगो को परेसान किया करता था जिसके कारण हर कोई रामु से परेशान थे और कितने बार लोगो ने उसके parents se उसकी शिकायत भी किये फिर रामु कभी भी नही सुधरता था,
रामु अक्सर जब school से आता जाता तो लोगो के गायो को खूँटे से छुड़ा देता और उन्हें भगा देता था,

वह जब कहि आता जाता तो रस्ते में पडने वाले पर पेड़ पौधों को नुकसान पहुचाता और उन्हें तोड़ देता, मतलब वह हर समय किसी न किसी तरह शरारते किया करता ही रहता था,  गांव वाले रामु को बहुत समझाते की हमे इन पेड़ो से ठण्डी हवा, जल , और छाव मिलती  हैं , अनेक पक्षीयो के इनके यही घर होते हैं , अगर तुम पेड़ो को तोड़ोगे तो फिर हमे हवा, पानी फिर कहा से मिलेगा, फिर जीवन जीना मुश्किल हो जायेगा, लेकिन रामु को ये सब बाते तो समझ में आती नही ,

उसे तो अपने शैतानियों में ही बहुत मजा आता था, उधर धीरे धीरे गांव की जनंसख्या भी धीरे धीरे बाद रही थी , लोग अपने बाग़ बगीचो को काटकर धीरे धीरे खेत बना रहे थे, हर जगह बस सब अपने फायदे के बारे में लोग सोच रहे थे कोई भी पर्यावरण के प्रति जागरूक नही हो रहा हैं , जिसके कारण अब बरसात भी कम होने लगी लेकिन लोगो को फिर भी समझ में नही आता , बस लोग अपनी खेतो का विस्तार कर रहे थे ,

इसी तरह वक़्त बीत रहा था की एक साल बहुत भयंकर सुखा पड़ा , चारो तरफ के पेड़ पौधे पानी की कमी से सुख रहे थे, नदिया, तालाब और कुओ का पानी बिलकुल भी सुख गया था, सभी अब तो भूख और प्यास से तड़पने लगे थे, जीव जन्तु सभी लोग पानी की कमी से गांव के उस area से छोडकर जाने लगे थे, और अब लोगो को मजबूरी में अपने गाव छोड़ने पर विवस होना पड़ रहा था, लेकिन रामु और उसके parents को समझ में नही आ रहा था की अब कहा जाये,

तभी एक दिन उधर से एक महात्मा गांव के रास्ते से गुजर रहे थे , उन्हें बहुत जोर से प्यास लगी लेकिन किसी के पास पानी तक नही था जो महात्मा जी का प्यास बुझाते, अब तो महात्मा जी बड़े बड़े चिंतित हो गए की यहा के लोग तो धरती को वीरान कर दिए हैं हर जगह बस खेत ही खेत दिखाई दे रहा हैं पेड़ की संख्या तो न के बराबर हैं,
धीरे धीरे लोग महात्मा के पास सभी इक्कट्ठा हुए और सबने महात्मा जी से सूखे से निपटने का उपाय पूछा तो महात्मा जी पूछा की सबसे ज्यादा पेड़ो को कोन कौन पसन्द करता हैं, कौन कौन पेड़ो को लगाता हैं और सबसे ज्यादा पेड़ो की देखभाल कौन करता हैं, तो किसी ने कोई Answer नही दिया ,तो महात्मा जी Ramu ko आगे अपने पास बुलाया और पूछा रामु तुम बहुत अच्छे लड़के दिखते हो, क्या तुम पेड़ो को लगाते हो और उनकी देखभाल करते हो क्या, ये सब बाते सुनकर रामु के होश ही उड़ गए , अब तो वह सोचने लगा की उसने तो हमेसा पेड़ो को तोडा ही हैं कभी भी किसी भी पेड़ को बढ़ने ही नही दिया हैं , रामु कुछ बोल नही पा रहा था,

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तो महात्मा जी ने एक नन्हे से पेड़ की इशारा करते हुए बोले देखो रामु ये छोटा सा नन्हा सा पेड़ हैं जैसे की तुम भी अभी बहुत छोटे हो अगर तुमको और इस पेड़ को अभी से खाने पिने को कुछ न दिया जाय तो क्या तुम कभी बढ़ सकते हो , या इस पेड़ को खाद , पानी और धुप न मिले तो क्या ये पेड़ बढ़ पायेगा , तो सबका जवाब ना में था, 
तो महात्मा जी समझाया की ठीक उसी प्रकार अगर पेड़ो को यु ही काटते रहे तो ये धरती क्या सुखी रहेगी , तो सबने ना में उत्तर दिया , अब सब समझ गए थे की पेड़ो का हमारे जीवन और इस धरती के लिए कितना उपयोगी हैं,

तो महात्मा जी बोला आप सभी लोग promise करो की आज से सभी लोग पेड़ लगाएंगे, और इस धरती को हमेसा हरा भरा रखेगे तो सबने हा किया और इसके बाद महात्मा जी बोले गांव से थोडा पहले नदी में अभी तक पानी सुखा नही हैं सो आप लोग वहा से पानी लेकर आये और पेड़ लगाये, सबने ऐसा ही किया , और कुछ दिनों के मेहनत के बाद सभी पेड़ बढ़ने लगे थे और इस बंजर धरती फिर से हरी भरी होने लगी थी , कुछ दिनों बाद खूब अच्छी बारिस भी हो गयी और सभी पेड़ खूब बढ़ गए और चारो तरफ हरियाली छा गयी ,

तो देखा दोस्तों किस प्रकार महात्मा जी के सुझाव से लोगो ने पेड़ लगाया और विषम परिस्थितियों में लोग हिम्मत नही हारे और धरती को फिर से हरा भरा बना दिए इसलिए दोस्तों हम सब को भी पेड़ लगाना चाहिए और इस धरती पर सूखे जैसी कभी भी स्थिति उत्पन्न न हो ऐसा हमारा प्रयास हो और हमे कभी भी अपनी इस प्यारी सी गांव घर को छोड़ कर जाना न पड़े   –

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Thanks दोस्तों आपको  दिए गये post में आप सबको ये बाते कैसी लगी please comment box में जरुर बताये .धन्यवाद ………..      
 


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